सोनार क्या है आइये जानते हैं इस लेख में what is sonar in hindi

passive sonar, पैसिव सोनार

दोस्तों आज इंसान ने Science के क्षेत्र में खुदको इतना developed कर दिया है कि नामुमकिन चीजो को भी मुमकिन कर दिखाया है। अगर हम technology की उन खोजो की लिस्ट बनाये तो आप अभी पढ़ते पढ़ते थक जायेंगे। इसलिए हम आज बात करेंगे SONAR technology  की। SONAR क्या होता है ? और यह कैसे काम करता है ?

SONAR Technology क्या है ?


SONAR की फुल फॉर्म SOund Navigation And Ranging होती है और इस technology को हम समुद्र की गहराई मापने या समुद्र में मौजूद किसी ऑब्जेक्ट्स का पता लगाने के लिए उपयोग करते हैं। जैसे  हम आसमान में किसी Airplane या missile का पता लगाने के लिए radar का उपयोग करते हैं, ठीक उसी तरह से हम समुद्र में अपने आस पास के एक Object से दुसरे Object की दूरी पता लगाने के लिए किया जाता है। सोनार तकनीक का उपयोग किसी जहाज के मलवे को ढूंडने के लिए भी किया जाता है ।

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SONAR यानी SOund Navigation And Ranging का  उपयोग करके ही पानी में रहने वाले जीव यह पता लगाते हैं, कि उनके आगे कोन सी चीज कितनी दूरी पर है। और चमगादड़ भी SONAR sound wave के जरिये ही अँधेरे में आसानी से पता लगा लेता है, कि उसके आगे कोई दीवार या कोई object है या नहीं।  और उसको कितना तेज उड़न है और right मुड़ना है या left . तो आइये अब जानते हैं की SONAR काम कैसे करता है ।

SONAR Technology कैसे काम करती है ?


दो तरह के होते है –

  1. Active Sonar – active sonar टेक्नोलॉजी में एक तरफ से Sound wave को भेजा जाता है । और और जब वह wave सामने वाले किसी Object से टकराकर वापस आती है, तो तब हम Transmitter से पता लगा सकते हैं, कि सामने वाला ऑब्जेक्ट हमसे कितनी दूरी पर है। नीचे दी गयी इमेज से आपको एक्टिव सोनार को  और अच्छे से समझ जायेंगे ।

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  2. Passive Sonar – passive sonar टेक्नोलॉजी में हम बिना किसी sound wave को भेजे ही सामने से आने वाली wave से पता लगा सकते है कि हमारे आस पास कौन सा Object कितनी दूरी पर है। और उस technology का उपयोग navy में भी किया जाता है। ताकि उनको पता लग सके कि कही कोई दुशमन का जहाज उनके इलाके में तो नहीं घुस आया ?

    passive sonar, पैसिव सोनार
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लेकिन हमारी technology इतनी high tech हो चुकी है कि sound wave से हम सिर्फ किसी object की दूरी ही नहीं बल्कि उसका shape भी पता लगा सकते हैं कि जिस object से हमारी sound wave वापस आई उसका अकार क्या है ।

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इसके अलावा सोनार का उपयोग ultrasonography या sonography में भी किया जाता है। जिसमें हम  Transducer की मदद से पेट में कुछ Sound wave को छोड़ते हैं। और जब वह waves टकराकर कम या ज्यादा मात्र में वापस आती है तो एक scanner उन waves को electric signals में बदल देता है। फिर ये एलेक्टिक सिग्नल कंप्यूटर में भेजे जाते हैं और कंप्यूटर calculation करके एक तस्वीर के रूप में उसको दिखा  देता है । जो हम ultrasound में भी देख सकते   है ।

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आशा है आपको सोनार टेक्नोलॉजी (Sonar technology) के बारे में जानकारी अच्छा लगा हो यदि कोई प्रश्न हो तो कमेंट में लिखे और जानकरी को अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे ।

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