हाइड्रोजन बम क्या होता है

हाइड्रोजन बम

हाइड्रोजन बम इतना खतरनाक होता है कि यह एक छोटे से देश को भी पूरी तरह नष्ट कर सकता है। और एक atomic bomb  से भी ज्यादा लोगो की जान ले सकता है। जिस बम को अमेरिका ने हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराया था। अमेरिका ने जब 6 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया था और इसकेतीन दिन के बाद 9 अगस्त को नागासाकी पर एक और बम  गिराया तो उसमे 20 लाख से भी ज्यादा लोगों की जान गयी थी। और क्या आप जानते हैं कि वहीं अगर एटॉमिक बम की जगह हाइड्रोजन बम गिराया गया होता तो तब यह संख्या 10 लाख से भी ज्यादा होती।

क्योंकि जब एक एटम बम को गिराया जाता है तो यह अपने चारो तरफ एक 1.5 किलोमीटर रेडियस का सर्किल बना देता है जबकि अगर इसकी जगह एक हाइड्रोजन बम को गिराया गया होता तो यह अपने चारो तरफ करीब 16 किलोमीटर रेडियस का सर्किल बना लेता और इस रेडियस में आने वाली हर चीज बहुत बुरी तरह से नष्ट हो जाती क्योंकि एक हाइड्रोजन बम एक एटम बम से हजारो गुना ज्यादा विनाशकारी होता है। लेकिन हाइड्रोजन बम काम कैसे करता है और यह इतना शक्तिशाली क्यों होता है।

परमाणु बम दो तरह के होते हैं पहला एटम बम, जिसको जापान पर गिराया गया था और दूसरा होता है Hydrogen Bomb जिसको हम थर्मल नुक्लिएर बम भी कहते हैं और इस बम को आज तक किसी भी देश पर नहीं गिराया गया है। हाइड्रोजन बम की संरचना दिखने में कुछ इस तरह का होती है।

हाइड्रोजन बम क्या होता है

हाइड्रोजन बम कैसे काम करता है ?

पहले एक बम के अंदर तीन बम लगे होते हैं पहला एक छोटा सा एटॉमिक बम जो कि इसके सबसे अंदर लगा होता है दूसरा आर्डिनरी केमिकल बम जो की इसके ऊपर लगा होता है और तीसरा होता है फ्यूज़न बम जो इसको हाइड्रोजन बम बनाता है। और इन सब के बीच में भरा होता है Beryllium लेकिन इसमें यह तीनो बम क्यों लगाए जाते हैं।

इसमें सबसे ऊपर लगे आर्डिनरी केमिकल बम का काम इसके अंदर लगे एटॉमिक बम को एक्टिव करना होता है और एटॉमिक बम के एक्टिव होने के बाद एक्टिव करता है फ्यूज़न बम को जिस से यह इतना बड़ा धमाका संभव हो पाता है। एक एटम बम बनाने में यूरेनियम या प्लूटोनियम का उपयोग किया जाता है।  जिसमे उसका नुक्लिएर दो भागो में टूट जाता है और उसमे नुक्लिएर फ्यूज़न की शुरू हो जाती है जिस से इतने ज्यादा ऊर्जा उत्पन्न होती है किस वह किसी एक शहर को पूरी तरह से ख़तम कर सकता है, वैसे तो एक एटम बम की ऊर्जा का रेडियस डेड किलोमीटर के लगभग ही होगा है लेकिन इस से निकलने वाली अल्फा बीटा और गामा किरणे  Radio Active Pollution कर देती हैं जो कि इतने ज्यादा लोगो के जान जाने और बीमारियों का कारण बनता है।

जबकि हाइड्रोजन बम बनाने के लिए भी यूरेनियम और प्लूटोनियम का ही उपयोग किया जाता है लेकिन इसके साथ ही इसमें हाइड्रोजन के दो isotopes – 1- deuterium और 2- Tritium भी उपयोग  किया जाता है। वैसे परमाणु बम को बनाने के दो तरीके होते हैं पहला Nuclear Fission और दूसरा Nuclear Fusion। 

Fission – मतलब टूटना जो होती है एटॉमिक बम में जिसमे नुक्लिएर दो भागो में टूट जाता है, इसमें नुक्लिएर को ब्रेक करने के लिए किसी ख़ास तापमान की आवश्यकता नहीं होती यह सामान्य तापमान पर भी तोड़ा जा सकता है।

Fusion – मतलब जुड़ना क्योंकि इस प्रक्रिया में किन्ही दो नुक्लिएर को मिलकर नया नुक्लिएर बनाया जाता है लेकिन यह प्रक्रिया किसी सामान्य तापमान पर नहीं होती, मतलब दो Nucleus आपस से टूटना तो चाहते हैं लेकिन मिलना नहीं चाहते पर अगर कोई इन्हे मिलाना चाहे तो जिस तरह किसी लोहे को किसी दूसरे आकार  में बदलने के लिए उसे करीब 900 डिग्री सेल्सियस तक गर्म करना पड़ता है। उसी तरह दो Nucleus को मिलाने के लिए करीब 100 Million Calvin यानी 10 करोड़ से भी ज्यादा डिग्री के तापमान की जरुरत होती है। अब ऐसे में इतना ज्यादा गर्म तापमान सिर्फ दो ही जगह मिल सकता है। पहला सूर्य पर और दूसरा किसी एटम बम के विस्फोट से। तो इसी लिए किस हाइड्रोजन बम में एक एटम बम को लगाया जाता है ताकि जो temperature एक हाइड्रोजन बॉब्म में नुक्लियर फ्यूज़न प्रक्रिया शुरू करने के लिए चाहिए होता है वह वहां शुरू किया जा सके।

हाइड्रोजन बम Nuclear Fission का उपयोग किया जाता है जिसमे एटम बम में उपयोग किये जाने वाले Nuclear Fusion से भी ज्यादा मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है। हाइड्रोजन बम के अंदर इस Nuclear Fusion प्रक्रिया को कराया जाता है, बम के बीच में बेरिलियम को इसलिए भरा जाता है क्योंकि इस से एक चैन रिएक्शन होती है जब एक Nucleus टूटता है तो उस से तीन Neutron निकलते हैं। जो आगे जाके और भी Nucleus तोड़ते हैं जिनसे और भी ज्यादा Neutron निकलते है, और इस तरह यह चैन रिएक्शन बढ़ता ही जाता है,  यहाँ पर बेरिलियम न्यूट्रॉन को इस बम से बाहर जाने से रोकता है, और इसको किसी शीशे की तरह अंदर ही फ्यूज़न बम पर फोकस कर देता है।

इसके बाद एक्टिव बम को एक्टिव करने के लिए आर्डिनरी केमिकल बम की जरुरत होती है।अब जब यह बम काम करना शुरू करता है तो सबसे पहले इसके अंदर के आर्डिनरी केमिकल बम को प्रोसेस कराया जाता है, जो एक्टिव होने  के बाद एटॉमिक बम को एक्टिव कर देता है और एटॉमिक बम में Nuclear Fusion प्रक्रिया को शुरू कर देता है।

अब क्योंकि Nuclear Fusion Process में न्यूट्रोंस निकलते हैं जो की बेरिलियम से रिफ्लेक्ट होकर इसे बम के कवर के अंदर इकट्ठा होकर fusion bomb पर फोकस कर देते हैं, और इसके अंदर का तापमान बढ़ाते जाते हैं अंततः दो बम एक्टिव होने के बाद तीसरे फ्यूज़न बम में नुक्लिएर फ्यूज़न की प्रोसेस शुरू हो जाती है और इतनी जोर से धमाका होता है की इस से जो 16 किलोमीटर का रेडियस बनता है उसमे आने वाली हर चीज नष्ट हो जाती है। इसका डायग्राम आप नीचे चित्र में देख सकते हैं। 

हाइड्रोजन बम क्या होता है

Hydrogen Bomb और Atom Bomb में क्या अंतर है ?

हाइड्रोजन बम || Hydrogen Bomb

परमाणु बम || Atom Bomb

Nuclear Fission में Nuclear Fusion से ज्यादा ऊर्जा उत्पन्न होती है। मतबल जब दो नाभिक (Nucleus) आपस में मिलते हैं तो उस से बहुत ज्यादा ऊर्जा उत्पन्न होती है हाइड्रोजन बम के अंदर इस Nuclear Fusion प्रक्रिया को कराया जाता है दूसरे नंबर पर इन बम के बीच में बेरिलियम को इसलिए भरा जाता है क्योंकि यह एक चैन रिएक्शन होती है जब एक Nucleus टूटता है तो उस से तीन Neutron निकलते हैं। जो आगे जाके और भी Nucleus तोड़ते हैं जिनसे और भी ज्यादा Neutron निकलते है, और इस तरह यह चैन रिएक्शन बढ़ता ही जाता है तो यहाँ पर बेरिलियम न्यूट्रॉन को इस बम से बाहर जाने से रोकता है, और इसको किसी शीशे की तरह अंदर ही फ्यूज़न बम पर फोकस कर देता है।

इसके बाद आर्डिनरी केमिकल बम की जरुरत होती है एक्टिव बम को एक्टिव करने के लिए। अब जब यह बम काम करना शुरू करता है तो सबसे पहले इसके अंदर के आर्डिनरी केमिकल बम को प्रोसेस कराया जाता है, जो एक्टिव होने  के बाद एटॉमिक बम को एक्टिव कर देता है  और एटॉमिक बम में Nuclear Fusion प्रक्रिया को शुरू कर देता है।

अब क्योंकि Nuclear Fusion Process में न्यूट्रोंस निकलते हैं जो की बेरिलियम से रिफ्लेक्ट होकर इसे बम के कवर के अंदर इकट्ठा होकर fusion bomb पर फोकस कर देते हैं, और इसके अंदर का तापमान बढ़ाते जाते हैं की अंततः दो बम एक्टिव होने के बाद तीसरे फ्यूज़न बम में नुक्लिएर फ्यूज़न की प्रोसेस शुरू हो जाती है और इतनी जोर से धमाका होता है की इस से जो 16 किलोमीटर का रेडियस बनता है उसमे आने वाली हर चीज नष्ट हो जाती है।

हालाँकि इसमें एक अच्छी बात यह है की एटम बम की तरह Hydrogen Bomb में अल्फा बीटा और गामा किरणे नहीं निकलती जिस से  इसमें नुक्लियर रेडिएशन नहीं होता। लेकिन उस से भी कई गुना ज्यादा की कसर यह सिर्फ एक ही बार में निकाल देता है

परमाणु बम का निर्माण करने के लिए एक मजबूत धातु की खोल ली जाती है यह धातु इतनी मजबूत होती है कि नाभिकीय विखंडन की पूरी प्रक्रिया होने तक यह नष्ट ही नहीं होती इस धातु के आवरण में यूरेनियम की critical mass जितनी मात्रा ली जाती है क्रिटिकल द्रव्यमान किसी भी परमाणु की वह न्यूनतम मात्रा होती है जिसपर उसका विखंडन प्रारम्भ हो सकता है यह मात्रा परमाणु संपन्न देशो के द्वारा गुप्त ही रखी जाती है ताकि आतंकवादी समूहों द्वारा परमाणु बम जैसे घातक हथियार न बनाये जा सके।

जब परमाणु बम में विस्फोट करवाना होता है तो बाहरी विस्फोटक पदार्थ में विस्फोट करवाया जाता है जिस से न्यूट्रॉन सक्रिय पदार्थ में से न्यूट्रॉन निकलने शुरू हो जाते हैं। ये न्यूट्रॉन यूरेनियम परमाणुओ पर प्रहार करते हैं और उन्हें अन्य छोटे छोटे परमाणुओं में तोड़ देते हैं एक यूरेनियम परमाणु के विखंडन से छोटे छोटे परमाणु तथा भारी मात्रा में ऊर्जा और कुछ नए न्यूट्रॉन उत्पन्न होते हैं ये नए न्यूट्रॉन पुनः दूसरे परमाणुओं को विखंडित करते हैं उस विखंडन के परिणामस्वरूप फिर नए न्यूट्रॉन निर्मित होंगे इस प्रकार यह प्रक्रिया एक बार शुरू होने के बाद स्वतः ही चलने लगती है जिसको हम  Chain Reaction भी कहते हैं,

और यह चैन रिएक्शन तब तक चलता रहता है जब तक कि सारे यूरेनियम परमाणु विखंडित नहीं हो जाते।

इतने अधिक परमाणुओं के विखंडन से लगभग लाखों  डिग्री सेल्सियस का तापमान उत्पन्न हो जाता है इतने अधिक तापमान के कारण धातु का आवरण फट जाता है और जोर दर धमाके के साथ एक महाविस्फोट हो जाता है। एक किलोग्राम यूरेनियम के विखंडन में आधे सेकंड से भी कम समय लगता है।

कितना विनाशकारी होता है हाइड्रोजन बम –

यदि किसी घनी आबादी वाले शहर में जहाँ करोड़ों लोग रहते हैं कुछ ऑफिस जाते हैं, कुछ अपने काम धंधे पर जाते है, कुछ स्कूल जाते हैं, और  कुछ घर पर रहते हैं, ऐसे में अगर कभी इस शहर पर कोई 250 किलो टन TNT का परमाणु हमला कर दे और आप इसी शहर में मौजूद हों तो क्या क्या हो सकता है आइये हम उसको जान लेते हैं।

जैसे  ही उस शहर पर Hydrogen Bomb का हमला होगा तो सबसे पहले तो जो धमाका होगा तो उस से इतनी भयानक ऊर्जा उत्पन्न होगी जिस से  तापमान लाखो Degree coleus पहुँच जायेगा, और धमाके से ऊर्जा निकलेगी उस से भूकंप पैदा होगा, साथ ही साथ 16 Kilometer Radius तक तेजी से जो आग का गोला बनेगा उस से 16 किलोमटर के क्षेत्र में सब कुछ ध्वस्त हो जायेगा जो चीजे जलने वाली होंगे जैसे कपडा, लकड़ी, प्लास्टिक इत्यादि जिस से घरों में भी आग लग जाएगी। आग की लहर इतनी तेज होगी की वह Car, bike, मनुष्य, पशु,  जैसी चीजों को आसानी से हवा में उड़ा सकती है। बिल्डिंग और पेड़ों के टूटने से जगह जगह सड़के ब्लॉक हो जाएगी, बिजली के खम्बे टूट जायेंगे और तारे जमीन पर गिर जाएँगी और जगह जगह शॉट सर्किट होंगे, जोरदार विस्फोट से जब बम के केंद्र में निर्वात पैदा होगा और इस निर्वात को भरने के लिए आस पास की हवा जल्दी से निर्वात को भरने के लिए केंद्र की और गति करेंगी जिस से बम के केंद्र से आस्मां की तरह गैस, धुंवा, और आग का एक बड़ा गोला आसमान की तरफ उठेगा और वह एक बड़े मशरूम के जैसा अकार ले लेगा जैसा आप नीचे दी गयी तस्वीर में देख सकते है।

हाइड्रोजन बम

हालाँकि यह पूरी प्रक्रिया पलक झपकते ही 1 सेकड़ के 100 हिस्से में हो जाएगी जिसमे किसी को सोचने तक का मौका नहीं मिलेगा। और सब कुछ जलकर टूटकर ध्वस्त हो जायेगा। वैसे तो 16 KM के दायरे में 99% लोग मर जायेंगे लेकिन फिर भी यदि किसी तरह यहाँ कोई घायल होकर बच भी जाता है तो उसको बचाने के लिए वह कोई होगा भी नहीं और बाहर से उसको बचाने के लिए कोई वहां जा भी नहीं सकता क्योंकि सब जगह सडको पर बिल्डिंग गिर जाएँगी कही कहीं सड़कों पर पेड़ गिरे होंगे कहीं सड़को पर गड्ढे जो जायेंगे जिसके कारण वह किसी भी आदमी को बचाना असम्भव सा हो जायेगा। हालाँकि हाइड्रोजन बम की अच्छी बात यह है कि 16 और वतरण में गर्मी बढ़ जाएगी। हालाँकि हाइड्रोजन बम की अच्छी बात यह है कि इस से एटम बम की तरह Alpha, Beta, Gama Radiation नहीं निकलता। लेकन उस से कई गुना कसर यह यह अपने धमाके में ही निकाल देता है।

क्या कोई देश hydrogen bomb को कोई युद्ध में प्रयोग कर सकता है ?

इस वक्त दुनिया में नौ देशों के पास परमाणु हथियार हैं जिनमें अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, इस्राएल और उत्तर कोरिया शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हथियारों पर नजर रखने वाली संस्था स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति शोध संस्थान (सिपरी) का अनुमान है कि 2019 की शुरुआत में दुनिया में परमाणु हथियारों की संख्या 13,865 थी। इस आंकड़े में उन सभी हथियारों को गिना गया है जिन्हें तैनात किया गया है या फिर डिस्मेंटल किया जाना है।

कोई भी देश परमाणु हथियारों का उपयोग ऐसे ही नहीं कर सकता है।  इसके लिए NPT (Non-Proliferation of Nuclear Weapons)  यानी परमाणु अप्रसार संधि का गठन किया गया है।एनपीटी की घोषणा 1970 में हुई थी। अब तक 187 देशों ने इस पर साइन किए हैं। इस पर साइन करने वाले देश भविष्य में परमाणु हथियार विकसित नहीं कर सकते। हालांकि, वे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन इसकी निगरानी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के पर्यवेक्षक करेंगे।  ऐसे  point to point जानते हैं की आखिर क्या है यह NPT ( परमाणु अप्रसार संधि)

  • परमाणु अप्रसार संधि एक बहुदेशीय संधि है जिस पर 1968 में हस्ताक्षर हुए और जो 1970 से प्रभावी है. वर्तमान में इसमें 190 सदस्य हैं।
  • इसका उद्देश्य परमाणु अस्त्रों के प्रसार को तीन दृष्टि से रोकना है – i) अप्रसार ii) निरस्त्रीकरण iii) परमाणु ऊर्जा का शांतिपरक उपयोग।
  • इस संधि पर हस्ताक्षर करने वाले देश ने यदि अभी तक परमाणु अस्त्र नहीं बनाए हैं तो वह भविष्य में ऐसा अस्त्र बनाने का प्रयास नहीं करेगा।
  • परमाणु अप्रसार संधि के जिस सदस्य देश के पास पहले से ही परमाणु हथियार हैं वह निरस्त्रीकरण के लिए काम करेगा।
  • सभी देश शान्तिपरक उद्देश्यों के लिए कतिपय सुरक्षाओं के साथ परमाणु तकनीक प्राप्त कर सकते हैं।
  • इस संधि में परमाणु अस्त्र वाला देश (nuclear weapon states – NWS) उस देश को कहा गया है जिसने 1 जनवरी, 1967 के पहले परमाणु अस्त्र बना लिया है।
  • संधि के अनुसार शेष अन्य देश परमाणु-अस्त्र विहीन देश (non-nuclear weapon states – NNWS) माने जाते हैं।
  • जिन पाँच देशों को परमाणु अस्त्र देश माना जाता है, वे हैं – चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका।
  • परमाणु अप्रसार संधि सदस्य देशों को शान्तिपरक उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा का निर्माण, उत्पादन एवं उपयोग करने से नहीं रोकती है।
  • इस पर साइन नहीं करने वालों में भारत, पाकिस्तान और इस्राइल जैसे देश शामिल हैं। उत्तर कोरिया इससे पहले ही अलग हो चुका है।
  • भारत काफी समय से कहता रहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार संधि पर साइन नहीं करेगा, क्योंकि यह भेदभावपूर्ण है। भारत और इस संधि पर साइन नहीं करने वाले देशों का तर्क है कि विकसित देशों ने पहले ही परमाणु हथियारों का भंडार बना लिया है और बाकी देशों पर अप्रसार संधि थोप रहे हैं।

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