Cryptocurrency क्या है

Cryptocurrency क्या है

यह बात तो हम सभी जानते हैं कि किसी भी समाज में किसी भी चीज को खरीदने और बेचने के लिए तथा अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक मुद्रा (Currency) की जरूरत होती है, जिस से हम किसी व्यक्ति या कंपनी को मुद्रा दें और वह बदले में हमें हमारी जरुरत का सामान दें। इसलिए प्रत्येक देश की अपनी एक अलग मुद्रा होती है, जैसे-भारत में रुपया, अमेरिका में डॉलर, रूस में रूबल, इजराइल में  शेकेल आदि। जिन नोटों को या सिक्को को हम छू सकते हैं देख सकते हैं उनको हम, भौतिक करेंसी कह सकते हैं क्योंकि वह भौतिक रूप में है जिसे आप देख सकते हैं, छू सकते हैं और उनके नियमो के अनुसार दुनिया में उनका उपयोग भी कर सकते हैं।

Cryptocurrency क्या है

लेकिन Cryptocurrency एक डिजिटल करेंसी है जो हमरी भौतिक मुद्रा से बिलकुल इससे अलग होती है। इसे आप न तो देख सकते हैं, न छू सकते हैं, क्योंकि अगर आपके पास कोई Cryptocurrency के रूप में 50 coin हैं तो आप सीधा किसी व्यक्ति के अकाउंट में उसको ट्रांसफर कर सकते हैं। लेकिन किसी भी ATM या बैंक से उसको बाहर नोटों की तरह नहीं निकाल सकते हैं क्योंकि इसको सिर्फ ऑनलाइन ही एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर किया जा सकता है। हाँ जैसे आप इसको अपने डिजिटल अकाउंट से बैंक में ट्रांसफर करेंगे तो फिर वह Convert होकर पारम्परिक तौर पर चलें वाली मुद्रा जैसे  रुपये, डॉलर, फ्रैंक इत्यादि के रूप में आप उसको बाहर निकाल सकते हैं। तो चलिए पहले हम यह जान लेते हैं कि Cryptocurrency क्या है।

Cryptocurrency क्या है –

Cryptocurrency एक ऐसी डिजिटल मुद्रा है जो ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित है। इस मुद्रा को भौतिक रूप में उपलब्ध रुपये, डॉलर आदि की तरह  छापा नहीं जाता, बल्कि इसको चलाने में कंप्यूटर एल्गोरिथ्म तकनीक का इस्तेमाल होता है, जिसको सुरक्षित रखने के लिए Cryptography  का प्रयोग किया जाता है। क्रिप्टोग्राफी सूचना और संचार को सुरक्षित बनाने का एक मजबूत डिजिटल सिस्टम है। Cryptocurrency एक स्वतंत्र मुद्रा है जिसका कोई मालिक नहीं होता इसे किसी सरकार या संस्थान द्वारा विनियमित नहीं किया जाता। इसको लोग इसकी सबसे बड़ी खामी भी मानते हैं, लेकिन फिर भी जिस तरह से इसका Cryptography  system बनाया गया है वह बहुत ज्यादा मजबूत व secure है जिसमे धोखादड़ी की सम्भावना बहुत कम होती है।

Cryptocurrency  या Digital currency को डीसेंट्रलाइज्ड पीयर-टू-पीयर नेटवर्क से सहारा मिलता है जिसे Blockchain कहा जाता है। ब्लॉकचेन तकनीक सभी क्रिप्टोकरेंसी को ट्रैक करती है और हर एक पैसे का हिसाब रखती है हर transaction का लेखा जोखा रखती है, भले ही फिर उस करेंसी को वे डिजिटल वॉलेट के रूप में उपयोग किया जा रहा हो या ट्रेडिंग में इस्तेमाल किया जा रहा हो। इस तकनीक के जरिए क्रिप्टोकरेंसी के लेन देन का पूरा रिकॉर्ड होता है।

क्रिप्टोकरेंसी को हम इंटरनेट पर किसी भी सुविधा को खरीदने के लिए उपयोग करते हैं। जैसे आपको किसी कंपनी से सॉफ्टवेयर, वेबसाइट, या कोई डिजिटल काम करवाना है  तो आप उस कंपनी को क्रिप्टोकरेंसी के द्वारा Pay कर सकते हैं और क्योंकि यह करेंसी किसी सरकार या किसी देश के द्वारा संचालित नहीं होती इसलिए आप इसका उपयोग पूरी दुनिया में कर सकते हैं। इस से पहले हम आगे बढ़ें थोड़ा सा जान लेते हैं

आभासी मुद्रा || Virtual currency –

जैसा कि हम पहले बता चुके हैं कि यह एक डिजिटल करेंसी है, जिसको इंटरनेट पर ही लेन देन के लिए उपयोग किया जाता है और भौतिक मुद्रा की तरह क्रिप्टोकरेंसी को छापा नहीं जाता।और यही वजह है कि इसे आभासी मुद्रा यानी Virtual currency भी  कहा जाता है। Virtual शब्द का अर्थ ही है जिसको छुआ नहीं जा सकता। आजकल इंटरनेट पर अनेको virtual currency मौजूद हैं जिनसे लोग इंटरनेट पर अपना लेन-देन करते हैं। और इनमे से सबसे ज्यादा प्रचलित करेंसी है Bitcoin, जिसका नाम अपने जरूर सुना ही होगा।

Cryptocurrency  की शुरुआत

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सर्वप्रथम क्रिप्टोकरेंसी की शुरुआत 2009 में हुई थी जो “Bitcoin” के नाम से जानी जाती थी और आज भी है। माना ऐसा जाता है कि बिटकॉइन यानी कि सबसे पहली क्रिप्टोकरेन्सी (cryptocurrency) की शुरुवात जापान के सतोषी नाकामोतो (Satoshi Nakamoto) द्वारा जारी किया गया था। हालाँकि दुनिया के अलग अलग स्थानों से लोग अपने आप को सातोशी नाकामोतो बताते हैं लेकिन आज तक इसके असली प्रोग्रामर का पता नहीं चल पाया।

शुरुवात में लोग लोग इंटरनेट की चीजों पर ज्यादा भरोसा नहीं करते थे क्योंकि खुद इंटरनेट उस समय नया नया था। तो लोग लोगो को  ऑनलाइन सामान खरीदने में भी संदेह ही रहता था कि लेकिन जैसे जैसे E-commerce कंपनियों ने cash on delivery का विकल्प रखा तब लोग को लगने लगा कि हाँ ऑनलाइन भी कोई चीज खरीदी जा सकती है। और इसी बीच जब पहली क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin नयी नयी आई थी तो उतनी प्रचलित नहीं थी, लेकिन जैसे जैसे internet का विस्तार होता गया एक से बढ़कर एक Digital कम्पनियां बनने लगी वैसे ही धीरे-धीरे Bitcoin के रेट आसमान छूने लगे, जिससे यह सफल हो गई।

आपको बता दें कि 22 मई 2010 में पहली बार एक पिज्ज़ा के बदले 10 हजार bitcoin की पेशकश की गई थी। उस समय 1 बिटकॉइन की कीमत 10 cents भी कम थी, लेकिन आज की बात करे तो 1 bitcoin की कीमत $70,000 है और भारतीय रुपयों में बात की जाये तो 1 bitcoin की कीमत 45,00000 रुपये है, यानी 2009 में कौड़ियों के भाव जिसकी कीमत थी उसकी कीमत आज हीरे की तरह हो गयी है, और आज भी इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों द्वारा खरीदें जाने के कारण इसकी कीमत में लगातार बढ़ोत्तरी होती ही जा रही हैं। हालाँकि आज के ज़माने में 1 bitcoin खरीदना भी बहुत मुश्किल हो चुका है।

इसके अति प्रचलन के कारण इसकी सुरक्षा भी बहुत जरुरी है इसलिए कई प्रोग्रामर इसे और सुरक्षित एवं मजबूत बनाने में लगे हुए हैं। क्रिप्टोकरेन्सी का मूल उद्देश्य पैसा एक स्थान से दूसरे स्थान पर बिना किसी थर्ड पार्टी की सहायता से जारी करना था। देखा जाए तो 2009 से लेकर वर्तमान समय तक सैकड़ो प्रकार की क्रिप्टो करेंसी इंटरनेट पर  मौजूद हैं, जो Peer to Peer इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के रूप में कार्य करती है। जब bitcoin का प्रचलन बढ़ा और इसकी कीमत बढ़ने लगी तो इसकी देखा देखि कर इंटरनेट पर अन्य क्रिप्टोकरेंसी भी आने लगी और लोगो को लगा की जैसे बिटकॉइन की कीमत बढ़ी वैसे ही इनकी कीमत भी बढ़ेगी और लोग ने अन्य नयी cryptocurrencies में भी invest करना शुरू किया और उनकी कीमत भी आसमान छूने लगी। आइये जानते हैं दुनिया में प्रचलति सबसे ज्यादा क्रिप्टोकरेंसी के बारे में

दुनियां भर में प्रचलित क्रिप्टोकरेन्सी –

यद्यपि दुनिया भर में अनेको क्रिप्टोकरेन्सी आ चुकी हैं उनमे से कुछ की कीमत तो अभी भी बहुत सस्ती हैं जिनको आप भी खरीद सकते हैं और कुछ कुछ की कीमत आसमान छू रही है आइये जानते हैं की आज के समय में दुनिया भर में कौन कौन सी Famous cryptocurrencies कौन कौन हैं।

यह बिलकुल भी मुमकिन नहीं है कि अगर हम Cryptocurrency की बात करें और उसमे Bitcoin की चर्चा न हो। क्यूंकि दुनिया की सबसे पहली Cryptocurrency Bitcoin ही है। जिसे Satoshi Nakamoto (ऐसा माना जाता है लेकिन इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है ) ने 2009 में बनाया था। Bitcoin एक digital currency है जिसे की केवल online goods और services खरीदने के लिए उपयोग किया जाता है या आप अपने बैंक में ट्रांसफर करके अपने देश की मुद्रा के रूप में इसको withdraw कर सकते हैं।  यह एक De-centralized currency है जिसका अर्थ है की इस पर किसी भी देश, सरकार, कंपनी, या किसी संस्था का कोई अधिकार नहीं है। यह स्वतंत्र करेंसी है।

2. Ethereum (ETH)

Bitcoin के बाद दूसरे स्थान पर सबसे Famous cryptocurrencies का नाम है Ethereum. यह भी एक  open-source, decentralized blockchain पर आधारित computing platform है। इसके Cryptocurrency token को ‘Ether’ भी कहा जाता है और इस क्रिप्टोकरेन्सी के फाउंडर रुसी मूल के कैनेडियन प्रोग्रामर  Vitalik Buterin है। 2016 में, Ethereum को दो अलग-अलग ब्लॉकचेन, Ethereum और Ethereum Classic में विभाजित किया गया था। एथेरेयम के सॉफ़्टवेयर प्लेटफ़ॉर्म से Generate smart contracts का एक सेट है।

3. Litecoin (LTC)

तीसरे नंबर की सबसे प्रचलित क्रिप्टोकरेन्सी Litecoin है और यह बाकि क्रिप्टोकरेन्सी की तरह decentralized peer-to-peer cryptocurrency है इसको Charles Lee द्वारा अक्टूबर 2011 में बनाया गया था जो कि गूगल के कर्मचारी भी रह चुके हैं। यह MIT/X11 license के अंतर्गत एक open source software की तरह रिलीज़ किया गया था। इसमें Scrypt algorithm का उपयोग किया जाता है। इस क्रिप्टोकैरेन्सी के काफी फीचर bitcoin से मिलते जुलते हैं।

4. Dogecoin (Doge) –

डॉगकोइन एक क्रिप्टोकरेंसी है जिसका आविष्कार सॉफ्टवेयर इंजीनियर Billy Marcus और Jackson Palmer ने किया था, इन्होने पहले इस करेंसी को bitcoin का मज़ाक बनाने के लिए मज़ाक में शुरू किया था लेकिन बाद में यह प्रचलित हो गयी और इसने एक प्रचलित क्रिप्टोकरेन्सी का ही रूप ले लिया।  Litecoin की तरह ही इसमें भी Scrypt Algorithm का इस्तमाल होता है। आज Dogecoin की Market Value $197 million से भी ज्यादा है और इसे पूरे विश्व में 200 merchants से भी ज्यादा में accept किया जाता है।  क्या आप सोच सकते हैं की मज़ाक मज़ाक में कोई इतनी विशाल कंपनी भी बन सकती है।

5. Faircoin (FAIR) –

Faircoin एक बहुत ही बड़े grand socially-conscious vision का हिस्सा है जो की Spain-based co-operative organization है और जिसे Catalan Integral Cooperative, or CIC के नाम से भी जाता जाता है।  ये Bitcoin की blockchain technology का इस्तमाल करता है, लेकिन ज्यादा socially-constructive design के साथ दुसरे cryptocurrencies के जैसे Faircoin mining or minting new coins के ऊपर निर्भर नहीं करता है।

लेकिन block generation के लिए उसके जगह में ये certified validation nodes, or CDNs, का इस्तमाल करते हैं।  Faircoin में coins को verify करने के लिए proof-of-stake or proof-of-work के बदले में ‘proof-of-cooperation’ का इस्तमाल किया जाता है।

6. Dash (DASH) –

इसके पहले के नाम थे XCoin और Darkcoin, Dash, का अर्थ है की ‘Digital’ और ‘Cash’. यह भी Bitcoin के जैसे ही एक open source, peer-to-peer cryptocurrency है। लेकिन इसमें Bitcoin की तुलना में ज्यादा features उपलब्ध हैं। जैसे की ‘InstantSend’ और ‘PrivateSend’. InstantSend में Users आसानी से अपने transactions को पूर्ण कर सकते हैं वही Privatesend में transaction पूरी तरह से safe होता है जहाँ की users की privacy को काफी importance दी जाती है।

Dash में एक uncommon algorithm का इस्तमाल होता है जिसे की ‘X11’ जिसकी खासियत ये है की ये बहुत ही कम powerful hardware से भी Compatible हो जाता है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग अपने currency को खुद ही mine कर सकें. X11 बहुत ही energy efficient algorithm है, जो की Scrypt की तुलना में 30% तक कम बिजली की खपत करता है.

7. Ripple (XRP) –

Ripple एक क्रिप्टोकोर्रेंसी ही है जो वर्ष 2012 में रिलीज़ हुई थी। इसको XRP के नाम से भी जान आजाता है। इस करेंसी को बनाने वाली कंपनी का नाम Ripple Labs Inc. है। Ripple एक real-time gross settlement system (RTGS) है जो की अपनी खुद की Cryptocurrency चलाता है जिसे की Ripples (XRP) भी कहा जाता है।  ये बहुत ही ज्यादा और famous Cryptocurrency है और जिसकी overall market cap लगभग $10 billion है। एक्सआरपी बिटकॉइन के समान ब्लॉकचेन एल्गोरिदम तकनीक का उपयोग करता है, ताकि बैंकों के बीच वित्तीय लेनदेन को अधिक तेज़ी से हल करने में मदद मिल सके।

8. Peercoin (PPC) –

Peercoin को शार्ट भाषा में PPC कहा जाता है यह पूरी तरह से Bitcoin protocol पर आधारित है और इन दोनों के बहुत से Source code दोनों में मिलती जुलती हैं।  इसमें transaction को verify करने के लिए केवल Proof of work पर ही मिर्भर नहीं किया जाता बल्कि इसके साथ Proof of stake system को भी नज़र में रखा जाता है। जैसे की इसके नाम से पता चलता है की Peercoin भी peer-to-peer cryptocurrency है जैसा कि Bitcoin मे होता है।  MIT/X11 software license के अंतर्गत इसके source code को release किया गया था। Peercoin भी Bitcoin के जैस ही SHA-256 algorithm का इस्तमाल करता है। और इसमें transaction fast होता है।

9. Monero (XMR) –

यह भी एक प्रकार की क्रिप्टो करेंसी है जिसमें विशेष प्रकार की सिक्योरिटी का उपयोग किया जाता है। इसे रिंग सिग्नेचर नाम से जाना जाता है। इसका उपयोग डार्क वेब और ब्लॉक मार्केट में बहुत अधिक होता है। इसकी सहायता से स्मगलिंग की जाती है। इस करेंसी से कालाबाजारी आसानी से की जा सकती है।

Cryptocurency के लाभ –

इंटरनेट पूरी दुनिया में अपना बहुत तेजी से फैला और उसने इंसानो के काम काज करने के तरीके ही बदल डाले, हर चीज डिजिटल हुए जा रही है जिस चीज के लिए आपको घर से बाहर जाना पड़ता था लाइन में लगना पड़ता था अब आप वह काम घर बैठे ही कर सकते हैं। तो इस बात की तो गॅरंटी है कि इंटरनेट अभी और भी विस्तार करेगा तो इसलिए इंटरनेट पर क्रिप्टोकरेन्सी के कई फ़ायदे भी हैं। पहला और सबसे बड़ा फ़ायदा तो ये है कि डिजिटल करेंसी होने के कारण धोखाधड़ी की गुंजाइश नहीं के बराबर है। अगर आप क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करते हैं तो इसमें आपको शानदार रिटर्न यानी मुनाफ़ा मिल सकता है, क्योंकि यहाँ बहुत तेजी से उतर चढाव होते हैं, क्रिप्टोकरेन्सी से online Shoping से लेन-देन आसान होता है।  क्रिप्टोकरेंसी के लिए कोई नियामक संस्था नहीं है, इसलिए नोटबंदी या करेंसी के अवमूल्यन या किसी महामारी जैसी स्थितियों का इस पर कोई असर नहीं पड़ता।

Cryptocurrency के नुक़सान –

क्रिप्टो का कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है यह इसका सबसे बड़ा नुकसान है , क्योंकि इसका मुद्रण नहीं किया जा सकता, मतलब कि ना तो इस करेंसी के नोट छापे जा सकते हैं और न ही कोई बैंक अकाउंट या पासबुक जारी की जा सकती है। दूसरा, इसको कंट्रोल करने के लिए कोई देश, सरकार या संस्था नहीं है जिससे इसकी कीमत में कभी बहुत अधिक उछाल देखने को मिलता है तो कभी बहुत ज्यादा  गिरावट, जिसकी वजह से क्रिप्टो करेंसी में निवेश करना जोखिम भरा सौदा है।

अगर बैंकिंग में गलती से अपनी किसी के अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर दिए तो आप बैंक से बात चित करके उसका समाधान निकल सकते हैं लेकिन cryptocurrency में नुकसान यह है कि यदि कोई ट्रांजैक्शन आपसे गलती से हो गया तो आप उसे वापस नहीं मंगा सकते हैं जिससे आपको घाटा होता है।

भारत में Cryptocurrency –

भारत में भारत में क्रिप्टोकरेंसी को मुद्रा नहीं माना गया है, जिसकी वजह से इसको बन भी कर दिया गया था। अभी भारत में जो कानून क्रिप्टोकरेंसी को लेकर मौजूद हैं वो पर्याप्त नहीं हैं। आपको बता दें कि फिलहाल क्रिप्टोकरेंसी के लिए कोई भी कानूनी ढांचा रिजर्व बैंक, सेबी आदि जैसी नियामक संस्थाओं के पास नहीं है। पहले भारत में क्रिप्टोकरेन्सी खरीदने बेचने रखने वालो पर  सरकार ने 10 की सजा का प्रावधान बनाया था लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रतिबन्ध को हटा दिया है।  क्रिप्टो करेंसी में व्यापार की बात करें तो बाजार को प्राइवेट करेंसी की परिभाषा का इंतजार है।  क्रिप्टोकरेंसी को पब्लिक ब्लॉकचेन कहा जाता है। डिजिटल करेंसी में भारत का 1 बिलियन डॉलर का  निवेश है। 8 मिलियन से ज्यादा निवेशक हैं। इसमें 2020 में 2.4 करोड़ डॉलर का निवेश हुआ। भारत में 2019 में 50 लाख डॉलर का निवेश हुआ। क्रिप्टोकरेंसी बिल को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है,  इसे लेकर जल्द ही एक विधेयक लाया जाएगा। इसके प्रचलन को देखते हुए हो सकता कि भारत सरकार नए  कानूनों के साथ खुद की स्वदेशी क्रिप्टोकरेन्सी लांच कर सकती है।

क्या है क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य –

अभी तो कुछ देशों ने इसे ‘ग्रे जोन’ में रखा है। कहने का तातपर्य यह कि वहां ना तो इसे औपचारिक तौर पर बैन किया गया है और ना ही इसके प्रयोग की मान्यता दी गई है। जिस तरह से cryptocurrency का प्रचलन पिछले कुछ सालों में बढ़ा है उसके अनुसार तो क्रिप्टोकरेन्सी का उपयोग भविष्य में जरूर बढ़ेगा और यह भविष्य में इंटरनेट पर लेन देन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अगर बात की जय Bitcoin की तो यह वर्तमान में 96 देशों में उपयोग किया जाता है और हर घंटे इसके 12,000 लेनदेन होते हैं। लेकिन क्रिप्टोकरेन्सी के लिए जब तक एक सुदृढ़ और ठोस कानून नहीं बनता तब तक यह लोग के संदेह के घेरे में ही झूलता ही रहेगा सभी यह सोचेंगे की खरीदे या न खरीदे जबकि जिनका काम इस से बनता होगा वह इसका धड़ल्ले से उपयोग करते हैं और आगे भी करेंगे।


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