परमाणु बम क्या होता है और कैसे काम करता है ?

परमाणु बम क्या होता है और कैसे काम करता है ?

आज के समय में शायद ही कोई होगा जो परमाणु बम (Atom Bomb) के बारे में न जानता हो। हम सभी को यह पता है कि परमाणु बम कितने भयानक और विनाशकारी हैं। आज पूरी दुनिया में 9 देशो के पार परमाणु हथियार हैं जितने परमाणु हथियार विश्व में अभी मौजूद हैं उनसे मानव सभ्यता को कई बार नष्ट किया जा सकता है।  लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये परमाणु बम बनाये कैसे जाते हैं ? और परमाणु बम कैसे काम करता है ? और परमाणु बम कितना खतरनाक होता है ? तो चलिए जानते हैं हैं आज परमाणु बम के बारे में विस्तार से।

परमाणु बम

परमाणु क्या होता है ?

परमाणु बम को जानने से पहले हमें एक परमाणु (Atom) के बारे में जानना होगा। तो विश्व के किसी भी पदार्थ चाहे वह ठोस हो  द्रव हो या गैस हो इनकी सबसे छोटी इकाई परमाणु  होती है अंग्रेजी में Atom कहा जाता है, इसका अर्थ यह कि अगर हम किसी भी पदार्थ के टुकड़े करें, तो टुकड़े करते करते अन्त में उसका सबसे छोटा टुकड़ा जो बचेगा जिसके बाद उसको आप तोड़ नहीं सकते, और अत्यधिक छोटा होने के कारण हम उसको नंगी आँखों से भी नहीं देख सकते उसको ही हम परमाणु  या इंग्लिश में Atom कहते हैं। एक परमाणु तीन तत्व इलेक्ट्रान (Electron), न्यूट्रॉन (Neutron) और प्रोटोन (Proton) से  मिलकर बना होता है। प्रोटोन और न्यूट्रॉन दोनों दोनों परमाणु के केंद्र में होते हैं जिनको नाभिक (Nucleus) कहा जाता है तथा इलेक्ट्रान परमणु की कक्षा में चक्कर लगता रहता है।

प्रोटोन पर धनावेश (positive electric charge) और इलेक्टॉन पर ऋणावेश (negative electric charge) पाया होता  है, और न्यूट्रॉन एक ऐसा कण है जिसपर कोई आवेश ही नहीं होता। धनावेश और धनावेश दोनों एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं और एक दूसरे से दूर रहने का प्रयास करते हैं। जबकि ऋणावेश और धनावेश दोनों एक दूसरे को आकर्षित करते हैं जिस से वे दोनों एक दूसरे के पास आने की कोशिश करते हैं। परमाणु की कक्षा में उपस्थित electron प्रोटोन को अपनी और आकर्षित करता है और आकर्षण में लगे इस बल को Electrostatic force कहते हैं। वही नाभिक पूरे परमाणु को बांधकर रखना चाहता है, इसलिए वह सभी को अपनी और आकर्षित करता है, और इस प्रकार लगने वाले बल को Nuclear force कहा जाता है। एटम का चित्र आप नीचे दी गयी इमेज में देख सकते हैं।

Atom diagram

प्रकृति में दो तरह के परमाणु पाए जाते हैं, एक स्थाई परमाणु और दूसरा अस्थाई परमाणु

स्थाई परमाणु – जिन परमाणुओं में प्रोटॉनों की संख्या न्यूट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है उनमे नाभिकीय ऊर्जा Electrostatic energy से अधिक होती है। ऐस परमाणु हमेशा बंधे रहते हैं इसलिए इनको स्थाई परमाणु कहा जाता है।अस्थाई परमाणु – जिन परमाणुओं में न्यूट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों की संख्या से अधिक होती है उनमे इलेक्ट्रोस्टेटिक ऊर्जा अधिक होती है। जो परमाणु को तोड़ने का कार्य करती है। ऐसे परमाणु को अस्थाई परमाणु कहा जाता है।

अस्थाई परमाणु जब दो या दो से ज्यादा परमाणुओं में टूट जाते हैं तो उसके साथ ही भारी मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है और यही ऊर्जा परमाणु बम (Atom Bomb) के निर्माण का मुख्या आधार बनती है। परमाणु के छोटे – छोटे टुकड़ो में टूटने की इस प्रक्रिया को नाभिकीय विखंडन कहते हैं। इस विखंडन के कारण भारी मात्रा में ऊर्जा रेडियो एक्टिव किरणे (Radio Active rays) निकलती हैं, और इनका ही उपयोग करके परमाणु बम को महा विनाशक बनाया जाता है। इसी कारण छोटे से एटम से बने महा विनाशकारी बम को एटम बम कहा जाता है।

परमाणु बम कैसे बनता है ?

परमाणु बम बनाने के लिए हमको जरुरत पड़ती है उचित मात्रा में एक रेडियो एक्टिव तत्त्व की, परमाणु बम बनाने के लिए सबसे अच्छा तत्व यूरेनियम का को माना जाता है, लेकिन समय के साथ साथ अब Thorium, Plutonium जैसे परमाणुओं का उपयोग भी किया जाने लगा है। यूरेनियम में दो प्रकार का होता है U235 और U238 जहाँ 235 और 238 यूरेनियम का द्रव्यमान होता है ऐसे परमाणुओं को जिनका परमाणु क्रमांक सामान हो तथा द्रव्यमान अलग अलग हो उन्हें समस्थानिक के नाम से जाना जाता है। U235 और U238 दोनों यूरेनियम के ही समस्थानिक हैं। लेकिन परमाणु बम बनाने के लिए U235 का ही उपयोग किया जाता है। क्योंकि U235 में न्यूट्रॉनों की संख्या ज्यादा होती है जिस से यह आसानी से टूट जाता है और आसानी से अधिक मात्रा में ऊर्जा प्राप्त करता है।

आपको यह बात जानकर हैरानी होगी कि पुरे विश्व में कुल यूरेनियम का 99.3% U238 ही पाया जाता है और बाकि 0.7% U235 (जिसको एटम बम बनाने में उपयोग किया जाता है ) पाया जाता है। यदि आप यह सोच रहे हैं कि परमाणु बम बहुत बड़े होते होंगे तो आप बिलकुल गलत हैं आइये सझते हैं क्यों –

यूरेनियम परमाणु का विखंडन करवाने के लिए उस पर न्यूट्रॉनों कि बौछार की जाती है। जैसे ही न्यूट्रॉन यूरेनियम से परमाणु से टकराते हैं तो वो यूरेनियम को तोड़ने लगते हैं सामान्यतः परमाणु बम 1KG यूरेनियम का उपयोग करके बनाये जाते हैं और एक किलो यूरेनियम में लाखो की संख्या में यूरेनियम के परमाणु मौजूद होते हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के समय निर्माण किये गए परमाणु बम में विस्फोटक के रूम में 11000 किलोग्राम TNT (Trinitrotoluene) का उपयोग किया गया था। और जब यह बम हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराया गया था तो पलक झपकते ही लाखो लोग जल कर खाक हो गए।और आपको यह जानकर भी आश्चर्य होगा वर्तमान में उपयोग किये जाने वाले विस्फोटक यूरेनियम की एक किलोग्राम मात्रा से 20000 Ton  TNT के बराबर ऊर्जा निकलती है अर्थात वर्तमान का 1 किलो का परमाणु बम 1945 के 11000 किलोग्राम के परमाणु बम से 2000 गुना अधिक विनाशकारी है।

परमाणु बम का निर्माण करने के लिए एक मजबूत धातु की खोल ली जाती है यह धातु इतनी मजबूत होती है कि नाभिकीय विखंडन की पूरी प्रक्रिया होने तक यह नष्ट ही नहीं होती इस धातु के आवरण में यूरेनियम की critical mass जितनी मात्रा ली जाती है क्रिटिकल द्रव्यमान किसी भी परमाणु की वह न्यूनतम मात्रा होती है जिसपर उसका विखंडन प्रारम्भ हो सकता है यह मात्रा परमाणु संपन्न देशो के द्वारा गुप्त ही रखी जाती है ताकि आतंकवादी समूहों द्वारा परमाणु बम जैसे घातक हथियार न बनाये जा सके।

उदाहारण के द्वारा समझे तो मान लेते हैं कि  U235 के लिए critical mass की सीमा 200 ग्राम है अगर हमने धातु के आवरण में यूरेनियम 200 ग्राम से कम रखा है तो यूरेनियम का विखंडन नहीं होगा, नाभिकीय विखंडन करवाने के लिए यूरेनियम की मात्रा को 200 ग्राम से अधिक ही रखना होगा धातु के आवरण में एक तरफ न्यूट्रॉन सक्रिय पदार्थ रखा जाता है तथा दूसरी तरफ यूरेनियम और बाहर एक छोटा सा विस्फोटक पदार्थ होता है जिसका नियंत्रण बाहरी रूप से किया जाता है। जब परमाणु बम में विस्फोट करवाना होता है तो बाहरी विस्फोटक पदार्थ में विस्फोट करवाया जाता है जिस से न्यूट्रॉन सक्रिय पदार्थ में से न्यूट्रॉन निकलने शुरू हो जाते हैं। ये न्यूट्रॉन यूरेनियम परमाणुओ पर प्रहार करते हैं और उन्हें अन्य छोटे छोटे परमाणुओं में तोड़ देते हैं एक यूरेनियम परमाणु के विखंडन से छोटे छोटे परमाणु तथा भारी मात्रा में ऊर्जा और कुछ नए न्यूट्रॉन उत्पन्न होते हैं ये नए न्यूट्रॉन पुनः दूसरे परमाणुओं को विखंडित करते हैं उस विखंडन के परिणामस्वरूप फिर नए न्यूट्रॉन निर्मित होंगे इस प्रकार यह प्रक्रिया एक बार शुरू होने के बाद स्वतः ही चलने लगती है जिसको हम  Chain Reaction भी कहते हैं, और यह चैन रिएक्शन तब तक चलता रहता है जब तक कि सारे यूरेनियम परमाणु विखंडित नहीं हो जाते।

इतने अधिक परमाणुओं के विखंडन से लगभग लाखों  डिग्री सेल्सियस का तापमान उत्पन्न हो जाता है इतने अधिक तापमान के कारण धातु का आवरण फट जाता है और जोर दर धमाके के साथ एक महाविस्फोट हो जाता है। एक किलोग्राम यूरेनियम के विखंडन में आधे सेकंड से भी कम समय लगता है।

परमाणु बम कितना हानिकारक हो सकता है ?

जैसे ही परमाणु बम में विस्फोट होता है ध्वनि की गति से भी तेज गति से उसकी तरंगे आस पास के वातावरण में फैलने लगती हैं। विस्फोट होने से वातावरण का तापमान लाखो डिग्री सेक्लियस से भी ज्यादा हो जायेगा। आकाश  सैकड़ो मीटर ऊपर तक एक आग, धुंए और गैस का मशरूम क्लाउड जैसा बवंडर उठने लगता है विस्फोट से उत्पन्न तरंगे पृथ्वी तल से टकराकर ऊपर और नीचे की और गति करने लगती हैं जिस से भयंकर भूकम उत्पन्न होता है बम ब्लास्ट का केंद्र भयनकर विस्फोट के कारण गरम होकर अपने चारो और लम्बी दूसरी तक निर्वात उत्पन्न कर देता है और इस निर्वात को ख़तम करे के लिए आस पास की ठंडी हवाएं केंद्र की और गति करती हैं जिस से भारी दबाव उत्पन्न होता है और दबाव पड़ने से घर और अन्य इमारते टूटने लगती है Atom Bomb  जिस जगह विस्फोट किया गया होता है वहां के आस पास के इलाको के लोग, जीव-जंतु, पेड़, मकान सब कुछ विस्फोट होने के साथ ही कुछ ही सेकड़ो में जल कर राख हो जाते हैं यूरेनियम के विखंडन से भरी मात्रा में Radio Active किरणे भी निकलती हैं जो जीवित कोशिकाओं को नष्ट कर देती हैं इस प्रकार दूर दर्ज के इलाको में ये रेडिओ एक्टिव किरणे विनाश का तांडव मचाती हैं। एक शहर को तबाह करने के लिए एक ही परमाणु बम काफी होता है। रेडियो एक्टिव किरणे तो कई सालों बाद जाकर नष्ट होती हैं, यही कारण है कि विस्फोट वाले स्थानों की जमीने आज भी बंजर ही पड़ी हुई हैं। आज भी नागासाकी और हिरोशिमा में पैदा होने वाले बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांग ही पैदा होते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि 9 August 1945 को जापान के हिरोशोमा शहर पर गिराए जाने वाले एटम का नाम Little Boy और 9 August 1945 को नागासाकी शहर पर गिराए जाने वाले एटम बम का नाम Fat Man था। और वह तो एटम बम का शुरवाती दौर था आज अमेरिका और रूस जापान में गिराए जाने वाले Atom Bomb से लगभग 20 गुणा ज्यादा विनाशकारी बम बना चुके हैं। अब इंसानो ने अपने ही विनाश के लिए एटम बम से भी विनाशकारी Hydrogen Bomb और TSar Bomb भी निर्मित कर दिए हैं, जो 100 एटम बम के बराबर अकेले ही काफी हैं।

परमाणु बम कभी भी अकेले उपयोग में नहीं लाये जाते हैं उन्हें मिसाइलो के अंदर रखा जाता है भारत की ब्रह्मोस मिसाइल एक परमाणु युक्त मिसाइल है जिसमे परमाणु बम का ही स्तेमाल किया गया है इन्ही मिसाइलो के माध्यम से परमाणु बम को यह बैठे बैठे पाकिस्तान या चीन पर दागना संभव हो पाता है। आज पूरे विश्व में लगभग 13000 -14000 परमाणु बम हैं। लेकिन पूरी दुनिया की आबादी को नष्ट करने के लिए मात्र 400 बम ही काफी हैं। अब आप कुछ सोच सकते हैं कि यदि तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो मानव का अंत निश्चित है। अल्बर्ट आइंस्टीन पहल ही कह चुके हैं की अगर तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो मैं गारंटी के साथ कह सकता हूँ कि फिर चौथा विश्व युद्ध इंसान डंडा और पत्थर से लड़ेगा।

परमाणु बम से सम्बंधित सवाल ( Atom Bomb Q&A ) –

प्रश्न – परमाणु बम से कितना नुकसान हो सकता है ?
उत्तर – यह निर्भर करता है कि वह किस प्रकार का परमाणु बम यानी एटम बम है हाइड्रोजन बम है या जार बम है, बम के अंदर कितना विस्फोटक रखा गया है, उसको कौन सी जगह पर गिराया गया है। जब बम फटेगा तो आग के धमाके से जो गरम लहर ध्वनि की रफ़्तार से फैलेगी उस से कई मकान, इमारते, ढह जाएंगी, लोग जल जायेंगे, और जहाँ तक धमाके से हुआ आग के  बवंडर पहुंचेगा वहाँ से भी कई किलोमीटर दूर तक के लोग रेडिएशन से और विषैली गैस के कारण बीमारियों से मर जायेंगे। साथ ही कुछ घंटो के बाद या कुछ हफ्तों के बाद भी आसमान से बम का मालवा गिरता रहेगा। और सालों तक वह जमीन उपजाऊ नहीं हो पायेगी। और रेडिएशन की चपेट में आने वाले लोग में नपुंसकता फैलेगी और जेनेटिकल समस्याएं  उत्पन्न हो जाएँगी जिसके कारण कई पीढ़ियों तक वह के बच्चे विकलांग पैदा होंगे।

प्रश्न – सबसे पहला परमाणु बम कब गिराया गया था  ?
उत्तर – सबसे पहला परमाणु बम अमेरिका ने 6 अगस्त 1947 को जापान के हिरोशिमा शहर पर गिराया था। और दूसरा परमाणु बम  भी अमेरिका ने तीन दिन बाद ही 9 अगस्त 1947 को जापान के नागासाकी शहर पर गिरा दिया था। जिसके बाद जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया था और द्वितीय विश्व युद्ध ख़तम हुआ था। और उस दिन के बाद से आजतक किसी भी देश ने दुश्मन देश पर परमाणु बम नहीं गिराया।

प्रश्न – युद्ध में परमाणु हथियारों का उपयोग करने वाला पहला देश कौन था ?
उत्तर – संयुक्त राज्य अमेरिका युद्ध में परमाणु हथियारों का उपयोग करने वाला पहला और एकमात्र राष्ट्र बन गया ?

प्रश्न – अगर परमाणु हमला हुआ तो आप कैसे बचेंगे ?
उत्तर – वैसे तो परमाणु हमला होने की सम्भावना कम है लेकिन फिर भी भविष्य में क्या होगा यह कोई भी नहीं कह सकता, फिर भी अगर परमाणु हमला होता तो उस से बचने का सिर्फ एक ही उपाय है और वह है बंकर क्योंकि विस्फोट की गरम लहर ऊपर सतह पर चलेगी तापमान ऊपरी सतह का बढ़ेगा और इस हालत में बंकर सबसे सुरक्षित जगह होती है। विस्फोट से मची तबाही बंकर में ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचती।


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