मंगल ग्रह पर पानी मिला पढ़िए पूरी रिपोर्ट

मंगल ग्रह पर पानी मिला जबसे इंसानों ने मंगल ग्रह के बारे में जाना और इस बात की पुष्टि की, कि अभी तक मिले सभी ग्रहों में जीवन की सम्भावना सबसे अधिक मंगल यानी Mars planet पर है, तब से हर देश की अंतरिक्ष agency मंगल ग्रह पर अपने यान भेजने के प्रयासों में जुटी है । आपकी जानकारी के लिए बता दें  कि अभी तक केवल चार देश (United States, Russia, European Space Agency, ISRO ) ही ऐसे हैं जो मंगल ग्रह के Orbit में अपना Satellite स्थापित कर चुके हैं जिसमें हमारा भारत भी शामिल है। और इस से भी गर्व की बात यह है कि इस से पहले इन तीन देशो ने Mars Planet पर 51 missions भेजे  जिनमे से सिर्फ 21 missions ही सफल हो पाए। लेकिन भारत ने अपनी पहली ही कोशिश में मंगल ग्रह की कक्षा में अपना उपग्रह स्थापित दिया जिसका नाम Mangalyaan है । और भारत ऐसा कारनामा करने वाला पहला देश बन गया।

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और उस से भी बड़ी बात यह है की जहाँ NASA के एक मंगल mission पर $672 million की लागात आती है, वही भारत ने मात्र $74 million में ही अपना मंगलयान सफलतापूर्वक मंगल पर पहुंचा दिया। दोस्तों इसी इसरो ने एक और  Record भी बनाया है एक ही बार में 104 satellites launch करने का। इस से पहले Russia के पास यह record था जिसने एक ही बार में 37 satellites launch किये थे। मैं जानता हूँ यह सब बाते जरा इस लेख के विषय से हटकर है मगर मैं इसलिए बता रहा हूँ ताकि हर भारतीय को पता चले कि भारत की अंतरिक्ष Agency  ISRO कितनी लगन मेहनत करती है वो भी कम पैसो में ।  लेकिन यही बात है जो यह साबित करती है कि IRSO scientist पैसो के लिए  बल्कि देश के लिए काम करते हैं और जितने भी Mission करती है खुद के कमाए हुए पैसो से करती है तो चलिए अब आते हैं अपने मुख्य विषय पर।

मंगल ग्रह पर पानी मिला –

अब मंगल ग्रह के बारे में सबसे Latest News यह है की Italian researcher ने यह घोषणा की है कि उन्हें मंगल ग्रह के South Pole के नजदीक मौजूद बर्फ के नीचे Liquid water की एक झील मिल गयी है। यह घोषणा 25 जुलाई 2018 को की गयी थी। यह खोज काफी Important मानी जा रही है, क्योंकि इस से पहले मंगल पर मौजूद कई Structures और निशानों को देखकर Scientists ने यह अनुमान तो जरुर लगाया था कि किसी जमाने में मंगल ग्रह पर पानी के सागर हुआ करते थे या फिर यह भी कि गर्मी के season में कुछ समय के लिए वहां liquid water अभी भी बहता होगा। लेकिन उनको अभी तक वहां liquid water में मौजूद होने के कोई सबूत नहीं मिल पाए हैं ।तो चलिए अब जानते हैं की इस research को कैसे अंजाम दिया गया।

कैसे मिला मंगल ग्रह पर पानी –

25 july 2018 को इटालियन खोजकर्ताओ ने एक घोषणा की कि उनको मंगल ग्रह के south pole के नजदीक बर्फ के नीच liquid water की एक झील मिली है। अपने इस research paper को उन्होंने science general में भी Publish  किया। जिसे उन्होने पुरे detail में यह समझाया कि उन्होंने इसका पता कैसे लगाया । European space agency द्वारा भेजा गया उपग्रह Mars express orbiter साल 2004 से लेकर अब तक मंगल ग्रह का  चक्कर लगा रहा है। इसमें Marsis नाम का एक बहुत powerful radar लगा हुआ है जिसकी फुल फॉर्म Mars Advanced Radar for Subsurface and Ionosphere Sounding है।

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यह मंगल ग्रह के surface की ओर low frequency electromagnetic pulses छोड़ता है। इमने से कुछ waves मंगल ग्रह की सतह से टकराकर वापस आजाती हैं जबकि कुछ waves मंगल की जमीन के नीचे जाकर वहां मौजूद चीजो से टकराकर वापस आती हैं । वापस आकार इन waves को study करने से हमको पता चलता है कि मंगल ग्रह की सतह कैसी है और इसके अंदर क्या छुआ हुआ है। उसी तरह अगर हमें ये जानना है की मंगल की south pole पर मौजूद बर्फ के नीचे क्या है तो हम उस बर्फ की तरफ electromagnetic pulses छोड़ते हैं। और देखते हैं कि वहां से  टकराकर वपस आई हुई waves से हमें   क्या पता चलता है । मंगल के south pole  के एरिया को साड़े तीन साल study करने के बाद और वहां से मिले 29 अलग अलग डाटा को Observe करने के बाद Scientists ने यह पाया की वहां सतह से डेढ़ किलोमीटर अन्दर तक केवल धुल और बर्फ है। लेकिन जैसे ही उन्होंने इसके नीचे  की Radar Reading को देखा वहां एक ख़ास Layer है जिसका reflection काफी bright है।

मंगल ग्रह पर पानी मिला पढ़िए पूरी रिपोर्ट
Image credit :- http://www.dailymail.co.uk

उन्होंने पहले इस सम्भावना पर ध्यान दिया कि कहीं ये जमा हुआ Carbon Dioxide तो नहीं। फिर उन्होंने पाया कि वह Carbon Dioxide  नहीं है। उसके बाद उन्होंने उसके आस पास मौजूद के फील्ड को analyse  किया और   आखिरकार इस नतीजे पर पहुंचे कि वह highly reflected layer कुछ और नहीं बल्कि Liquid Water Lake है। जिसमें काफी मात्र में NaCl यानी कि salts भी मौजूद है । यह एरिया लगभग 20 kilometer तक फैला हुआ है लेकिन यह कितना गहरा है इस बात का पता अभी तक नहीं चल पाया है। पर Scientists का मानना है कि इसकी  गहरे एक मील तक हो सकती है। मंगल के pole पर मौजूद बर्फ low frequency electromagnetic waves  को मंगल    की जमीन या उसके अन्दर मौजूद किसी दुसरे Solid Material की तुलना में कही अधिक reflect करता है।

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लेकिन Marsis ने कई बार यह पाया कि south pole के नजदीक मौजूद बर्फ की एक layer भी  उन low frequency electromagnetic waves काफी ज्यादा reflect कर रहा था । जिस से यह साफ़ हो गया कि वहां कोई सॉलिड ऑब्जेक्ट मौजदू नहीं है। हमने पृथ्वी   में अन्टार्क्टिका और ग्रीनलैंड जैसे बर्फीले इलाको में भी यह देखा है कि बर्फ के नीचे मौजूद पानी low frequency electromagnetic waves  को जमीन के नीचे मौजूद किसी Solid layer की तुलना में कहीं ज्यादा अधिक reflect करता है। और यहाँ भी हम उसी radar का स्तेमाल करते हैं जिसका मंगल ग्रह पर किया गया इसलिए वैज्ञानिक मंगल पर पानी होने की बात मान रहे हैं क्योंकि मंगल ग्रह पर मिले Radar readings वैसे ही हैं जैसे पृथ्वी पर हमें अन्टार्क्टिका जैसे बर्फीले इलाको में देखने को मिली। इस से वैज्ञानिको का मानना है कि मंगल ग्रह पर पानी मौजूद है।

Zero Degree Celsius के नीचे भी liquid form में कैसे है पानी –

इस सवाल में Scientists का मानना है कि mars Poles पर water ice glacier का pressure जमीन के नीचे मौजूद पानी के Freezing Point को घटा देता होगा । इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि मंगल ग्रह पर पानी में Magnicium, Calcium और sodium salts काफी मात्र में मौजूद होंगे जिसके कारण पानी का freezing point घट गया होगा और ऐसा होना possible भी है क्योंकि मंगल पर यह काफी प्रचुर मात्र में पाए भी जाते हैं।

Conclusion –

इस सभी तथ्यों के आधार पर हम यह तो मान सकते हैं कि मंगल ग्रह के नीचे पानी मौजूद है। लेकिन इस बात की पुष्टि तो तभी हो पायेगी जब धरती से मंगल ग्रह के south या north pole पर कोई Lander या Rover भेजा जाय और वह वहां जाकर Drill करे। और यदि इस बात की पुष्टि हो जाये कि मंगल ग्रह पर पानी मौजूद है। फिर मंगल पर जीवन जीने की एक नयी उम्मीद जग जाएगी ।

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