वायेजर 2

वायेजर 2

वायेजर 2 का 40 साल का सफ़र 

साल 1977 में  दो space probe वॉयेजर 1 जिसको 5 सितम्बर 1977 को,  और वॉयेजर 2 जिसको 20 अगस्त 1977 को अमेरिका की जानी मानी Space Agency NASA द्वारा लांच किया गया था। इनका मूल उदेश्य  Jupiter,  Saturn , Saturn के rings और इन दोनों ग्रहों के उपग्रहों का नजदीकी से अध्ययन करना । इसके लिए यह mission 5 साल तक चलना था समय  के साथ  मूल mission complete हो गया scientist को लगा की वायेजर 2 बाकि के दो ग्रहों uranus और neptune का अध्ययन करने में भी सक्षम है । तो उन्होंने mission को आगे बढ़ा दिया और फिर जो मिशन केवल 5 साल में खत्म होना था वो आज 40 साल बाद भी जारी है ।

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हर  175 सालो के बाद एक दुर्लभ संयोग  बनता है जब Jupiter, Saturn, Uranus और Neptune ऐसे  geometrical arrangement में होते हैं कि एक अंतरिक्ष यानी उनके गुरुत्वाकर्षण बल का स्तेमाल कर उनसे आगे वाले ग्रह के पास काफी कम समय में पहुच सकता है। और वह भी बहु कम ईंधन स्तेमाल करके। इस तकनीक का उपयोग करने से यान की रफ़्तार कई गुना अधिक तेज हो जाती है और Voyager 2 में भी इसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया । इस से हुआ ये की जहाँ voyager 2 को Neptune तक पहुँचने में 30 साल लगते इस तकनीक का स्तेमाल करने से केवल 12 साल लगे।

वायेजर 2
वायेजर 2

वायेजर 2 को 20 अगस्त 1977 को भेजा गया था जबकि वायेजर 1 को इसके तीन हफ्तों के बाद  5 सितम्बर 1977 को 10,000 से भी अधिक  Trajectory (यान का मार्ग ) का अध्ययन करने के बाद छोड़ा गया था।  Voyager 2 के लिए एक ऐसी Trajectory का चुनाव किया गया था। जिस से कि यह बृहस्पति और इसके विशाल उपग्रह IO तथा शनि और शनि के चाँद (Titan) का करीबी से अध्ययन कर सके और साथ ही साथ जरुरत पड़ने पर uranus और Neptune का भी आप नीचे Image में देख सकते हैं कि Voyegar 1 को एक छोटी Trajectory में छोड़ा गया था । जसके कारण यह यान बाद में छोड़े जाने के बाद भी Jupiter और Saturn के पास Voyger 2 से पहले पहुँच गया वायेजर 1 की Trajectory ऐसी थी जिस से कि वह शनि के उपग्रह Titan के नजदीक से गुजरे तथा शनि के rings के पीछे जाकर elliptical orbit में घूमें  जिस से शनि के वलय (Rings) का अध्ययन किया जा सके इसके बाद उसको शनि की Gravity का स्तेमाल कर solar system से बाहर की और धकेला जा सके। Voyger 2 की Trajectory कुछ ऐसी थी की शनि उसको अपने आप यूरेनस की तरफ फेंक दे। आप दोनों यानो की trajectory  नीचे इमेज में देख सकते हैं

voyager trajectory
voyager 2 trajectory

voyager 2 की नज़र से बृहस्पति

9 जुलाई, 1979 को वायेजर 2 बृहस्पति गृह के सबसे नजदीक पहुंचा और इसकी मदद से हमने यह जाना कि  बृहस्पति (Jupiter) ग्रह इतना बड़ा है कि पृथ्वी के आकार के 1300  ग्रह इसके अन्दर समा जायेंगे धूल के दो Rings इसके चक्कर लगा रहे हैं । जिनमे cilicon और carbon की मात्र अधिक है हमने great red spot को भी नजदीक से जाना जो anticyclonic storm से बना है और Diameter पृथ्वी से तीन गुना बड़ा है और हमने जाना की बृहस्पति गृह के 16 उपग्रह हैं।

  1. IO
  2. Europa
  3. Ganymede
  4. CallistoMetis
  5. Adrastea 
  6. Thebe
  7. Amalthea
  8. Themisto
  9. Leda
  10. Himalia
  11. Lysithea
  12. Elara
  13. Dia
  14. Carpo
  15. Euporie
  16. Helike

इसके अलावा हमें jupter के और भी उपग्रहों के बारे में पता चला लेकिन वह बहुत छोटे हैं। जिनके बारे में ज्यादा जानकारी हासिल नहीं है बृहस्पति गृह का उपग्रह IO में 400 से ज्यादा ज्वालामुखी देखे गए जो पृथ्वी और शुक्र के अलावा अभी तक किसी और गृह पर नहीं दिखाई दिए थे।

  • voyager 2 की नज़र से शनि (Saturn)

25 अगस्त, 1981 को Voyager 2 शनि गृह के सबसे नजदीक पहुंचा जिस से हमको शनि ग्रह के बारे में भी काफी जानकारी हासिल हुई। जैसे की यह hydrogen और helium से बना एक ठंडा गृह है जहाँ आंधियां 11000 मील प्रति घंटे की रफ़्तार से चलती हैं । इसके वलय (rings) के अध्ययन से हमने जाना कि  यह astoroid और दुसरे उपग्रहों के टकराव से बने हैं इसमे पत्थर बर्फ और धुल मौजूद हैं । वायेजर 1 ने इसके सबसे बड़े उपग्रह Titan की जानकरी दी।

  • voyager 2 की नज़र से अरुण (Uranus) 

वायेजर-2  24 जनवरी 1986 को यूरेनस के पास पहुंचा और इसके बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकरिया हमें दी । इसने इसके चाँद magnatic field और इसके  और Darik rings के बारे में जानकारी दी और साथ ही साथ तस्वीरे भी भेजी । इस से हमको पता चला की इसका चाँद Miranda  solar system में सबसे अलग है इसका अध्ययन करने से पता चला की भूतकाल में कभी दो चन्द्रमाओ की टक्कर हुई होगी। और उसके बाद उनके पदार्थ धीरे धीरे फिर से एकत्रिक हुए होंगे जिस से फिर Miranda Moon का जन्म हुआ होगा।

  • वायेजर 2 की नज़र से वरुण (Neptune )

  वायेजर-2  25 अगस्त, 1989 को Neptune Planet पर पहुंचा जो हमारे solar system का अंतिम ग्रह हैऔर voyager 2 मानव निर्मित पहला ऐसा यान बना जो Neptune ग्रह तक पहुँचा और अभी भी यह एकलौता ऐसा यान  है जो Uranus और Neptune तक पहुंचा है। वायेजर 2 की जानकारी के मुताबिक Neptune गृह Blue color का दिखाई देता है।  क्योंकि इसमें मौजूद methen, spectrum Layer के लाल रंग को absorb कर देती है जिसके कारण यह नीला दिखाई देता है इसमें Hydrogen, Helium और Methen काफी मात्र में मौजूद है।

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तथा यहाँ हवा 700 mile/hr की रफ़्तार से चलती है इसके 6 उपग्रह हैं जिसमें Titan सौरमंडल का सबसे ठंडा और सबसे reflective Satellite है Naptune अंतिम ग्रह था जिसका अधययन वायेजर-2 ने अध्ययन किया।

  • currnet position of voyager 2 

voyager 2 Jupiter, Saturn, Uranus और Naptune का अध्ययन करने के बाद दक्षिण की और ऐसे रस्ते पर चल दिया जो 40,000 साल बाद इसको दुसरे तारामंडल में ले जायेगा इस समय voyager 2  अपनी 57,890 km/h की speed  से चल रहा है तथा Heliopause region में है।  Heliopause region  सौरमंडल का आखिरी छोर है। जो सूर्य के magnatic field से बनता है तथा इस field में सौलर हवाए बहुत तेजी से चलती हैं  यह सोलर सिस्टम के खगोलीय पिंडो को interstellar space से आने वाली वस्तुओ से बचाता है ।

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यह यान तब  तक भी सुरक्षित रहेगा जब यहाँ सब कुछ मिट जायेगा जिसे आप अभी जानते हैं । और इस बात का भी खास ध्यान रखा गया है कि यदि कोई विकसित aliens इसके संपर्क में आये तो उनको यह पता चल सके की यह यान कहाँ से आया है और जहाँ से यहाँ आया है, वह जगह कैसी है इसके लिए एक तरह के Time capsule दोनों voyager यानो में डाले गए हैं जसको वायेजर Golden record कहते हैं।

voyager 2 Golden Record

यह एक phonograph record है जो 12 इंच के gold plated disk में है जिसमे धरती की अलग अलग आवाजे जैसे बच्चो के रोने की, पशु पक्षियों की, जानवरों की, मशीनों की, ट्रेन, इंजन स्टार्ट, इत्यादि हैं तथा कुछ विडियो और 115 फोटो भी हैं जो धरती के लोग, जीव जंतु तथा यहाँ की सभ्यता के बारे में जानकारी देते हैं। आप नीचे इमेज में देख सकते हैं

voyager golden record

अंत में मैं यही कहूँगा कि जिन scientist ने दिन रात काम करके अपनी लगन और मेहनत से इस बड़े और अद्भुद मिशन को अंजाम दिया वो वाकई काबिल इ तारीफ है।  हम इसके लिए उनका जितना भी शुक्रिया करे कम हैं। पर फिर भी हमारी दुनिया को इतना Powerfull बनाने के लिए।

Thanks to all scientist 

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