विज्ञान और भगवान से जुड़े कुछ सवाल

विज्ञान और भगवान से जुड़े कुछ सवाल

विज्ञान और भगवान के बीच कोई आपसी टकराव नहीं है। दोनों अपने अपने यथास्थान पर स्थित हैं और अगर हम अपनी सोच का स्तर थोडा ऊँचा करके देखेंगे तो हम पाएंगे कि विज्ञान और भगवान दोनों एक दुसरे के पूरक हैं। ब्रह्माण्ड में जितने भी गृह नक्षत्र तारे बल उर्जा है । सारे कही न कही एक दुसरे से जुड़े हुए हैं।  मगर विषय के तौर पर दोनों भिन्न हैं विज्ञान प्रमाणिक अधारो पर मिलने वाले वास्तविक ज्ञान का संग्रह है जबकि ईश्वर अध्यात्म धर्मशास्त्र और आस्था का विषय है।

विज्ञान और भगवान से जुड़े कुछ सवाल
Science vs God

विज्ञान द्वारा भगवान का अस्तित्व साबित न होने के कारण इश्वर का कोई अस्तित्व ही नहीं है ये सोच रखना भी गलत है। क्योंकि विज्ञान खुले मन का विषय है क्योंकि विज्ञान में जिसका अस्तित्व आज नहीं है ।क्या पता कल उसके प्रमाण मिलने से वह स्वीकृत हो जाये और हमारी रोजमर्रा कि ज़िन्दगी में हम देख्नते हैं कई चीजे ऐसी होती हैं,  कि उनके कोई प्रमाण न मिलने के कारण भी उनका अस्तित्व का आभास होता है। ओर ऐसे ही कुछ confusion create करने वाले सवालो के बारे में हम आज बात करेंगे।

Accelerator  

जब हम कोई भी Bike, Car, Bus, Train, कुछ भी चलाते हैं। तो जब Red light आती है तो हम गाडी की speed slow करते है और जबी हमें गाडी कि speed फिर से बढानी होती है तो हम Accelerator दबाते हैं जिस से हमारी गाडी को फिर से speed मिल जाती है।

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अब अगर हम अपने इन मानवीय यातायात के संसाधनो कि गति कि तुलता प्रकाश के Photon particles (फोटोन कण) के साथ करते हैं , तो हम पाते हैं कि प्रकश के ये कण शून्य अवकाश में 300000 Km/s कि रफ़्तार से यात्रा करते हैं। लेकिन किस पारदर्शक कांच की चीज में ये photon particles जैसे ही enter होते हैं उनकी गति थोड़ी धीमी ( 240000 Km/s) हो जाती है। मान ले कि वो पारदर्शी कांच एक red light थी जिसने उन light के photon particles को slow किया। मगर जैसे ही वे photon particle उस पारदर्शी कांच से बाहर निकलते हैं तो वे तुरंत ही अपनी maximum speed (300000 Km/s) वाली रफ़्तार पकड़ लेते हैं। इंसान आज तक इस बात का पता नहीं लगा पाया है, कि पर इन photon  particles को Accelerator कहाँ से मिलता है? इनको इतनी तेज गति कौन सी चीज प्रदान करती है ?

Energy

विज्ञान में रूचि रखने वालो या विज्ञान प्रेमियों को यह बात तो पता होगी कि thermodynamics theory के अनुसार उर्जा का किसी भी तरह से सृजन (create) करना असंभव है। और उर्जा को ख़तम भी नहीं किया जा सकता है। हमारे पूरे ब्रह्माण्ड में उर्जा static है उर्जा पदार्थ में और पदार्थ उर्जा में ही परिवर्तित होते हैं लेकिन किसी न किसी Form में सब कुछ यही रहता है, और यह सिद्धांत अडिग है। और यह सब पर लागू होता है तो अब सवाल यह है कि हमारे ब्रह्माण्ड में इतनी सारी Energy (उर्जा) से भर देने वाली वह कौन सी लौकिक शक्ति है , या फिर लौकिक नहीं अलौकिक है।

Big Bang 

हमारे ब्रह्माण्ड में चार ऐसी शक्तिया हैं जिनके कारण सभी आपस में में बंधे हुए हैं। और सुचारू रूप से यह ब्रह्माण्ड चल रहा है।

  1. Electromagnetism Force.
  2. gravitational force,.
  3. Strong Force,.
  4. weak Force.

इन चारो के बिना तो ब्रह्माण्ड कि कल्पना करना भी असंभव है। और उस से भी हैरान करने वाली बात तो यह है, कि ये 4 force ब्रमांड कि उत्पत्ति के लाखो सालो बाद उत्पन्न हुए और आज ब्रह्माण्ड में होने वाली प्रत्येक क्रिया और प्रतिक्रिया इन चारो force के ही मुताबिक होती है। force का यह नियम तो सटीक है। और उसमे जरा सी भी ऊँच नीच होने कि कोई गुंजाईश नहीं है । इसलिए सवाल अब यह उठता है कि इन चारो बलों के बिना Big bang का जन्म कैसे हुआ।

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Science के सारे नियमो को निस्तेनाबूत करने वाला एक सवाल यह भी है कि हम सभी यह मानते हैं कि ब्रह्माण्ड कि उत्पत्ति big bang theory से  हुई और उस से पहले singularity कि अवस्था थी।  मतलब कि शुन्य अवस्था थी तारे, गृह, उपग्रह, प्रकश, क्रिया, प्रतिक्रिया कुछ भी नहीं था।

और हमारा विज्ञान यह मानता है कि किसी भी क्रिया का कारण होना जरुरी है। बिना कारण के कोई भी क्रिया या कोई भी Effect संभव ही नहीं है। और इतना ही नहीं यह क्रिया भौतिक नियमो के अनुरूप होनी चाहिए। तो इस हिसाब से तो हमारे Science के सारे नियम यहाँ निस्तेनाबूत हो जाते हैं। इसलिए संभावित कारण होने की कोई गुंजाईश ही नहीं । तो फिर जब big bang theory से पहले इतना सारा material आया कहा से, और शुन्य अवस्था इतने बड़े ब्रह्माण्ड में कैसे रूपांतरित हो गयी। ये एक बहतु बड़ा अनसुलझा सवाल है ।और ऐसे ही लाखो प्रश्न है, जिनका जवाब science के पास नहीं है । लेकिन इन सभी सभी  घटनाओ के पीछे कोई न कोई कारण तो रहा ही होगा । लेकिन विज्ञान के पास इसका भी कोई जवाब नहीं है, और विज्ञान इनके जवाब खोजने की कोशिश भी नहीं करता। क्योंकि science को पता है, कि उसको इनका जवाब कभी नहीं मिलने वाला।

विज्ञान और भगवान | Do scientist believe on God

  • भौतिक विज्ञान के सबसे बड़े scientist Albert Einsteine भी इश्वर को मानते थे ।उन्होंने अपनी General और Spacial दोनों theory में god doesn’t play dice जैसे कई ईश्वरवाची शब्दों का प्रयोग करके उन्होंने ईश्वर कि मौजूदगी को भी स्वीकार है । और इतना ही नहीं Albert Einsteine  भगवदगीता को भी पढ़ा करते थे ।और वो कहते थे, कि गीता से उन्होंने बहुत कुछ सीखा है।
  • Molecule functionality को जिन्होंने पूरी तरह से दुनिया को समझाया वो भौन्तिक शास्त्री Neil’s Bohr’s भी ईश्वर को मानते थे।
  • paul Daviece  नाम के महान भौन्तिक शास्त्री ने तो ब्रह्माण्ड को भगवान की रचना (Creation) के रूप में स्वीकार किया है। और उन्होंने The Mind of GOD नाम कि एक book भी लिखी थी।
  • Scientist carl sagan ने तो the cosmic dance of shiva नाम कि एक किताब भी लिखी। जो दुनिया कि सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबो में से एक है। इस किताब मे उन्होंने ब्रह्मा, विष्णु और महेश का पूरा आलेखन किया है।
  • Robert Oppenheimer जो कि अणु बम बनाने वाले सर्वप्रथम वैज्ञानिक हैं । अणु बम के सफल परिक्षण के बाद robert ने उस परिक्षण कि जगह पर भगवदगीता के दो श्लोक भी उच्चारे थे।
  • Higgs boson या god particle के खोजकर्ता और ब्रह्माण्ड कि उत्पत्ति के विषय में अभ्यास करने वाले जहाँ बहुत सारे वैज्ञानिको का काफिला जमा हुआ है । वह स्थान Geneva, switzerland के पास particle Accelerator के नाम से मशहूर है । जिसको CERN भी कहा जाता है।विश्व कि सबसे बड़ी प्रयोगशाला CERN में उन्होंने प्रयोगशाला के प्रवेशद्वार के सामने ही भगवान् नटराज की लगभग 2 मीटर की ऊँची मूर्ति को स्थापित किया है।यह भी पढ़े :- हिग्स बोसॉन (God Particle) क्या है 

conclusion

तो इस article में हमने जाना कि विश्व के बड़े से बड़े वैज्ञानिक भी ईश्वर पर यकीन करते हैं। और विज्ञान कि theory को समझने के बाद भी यह प्रतीत होता है, कि इस ब्रह्माण्ड कि रचना का कोई न कोई रचनहार तो जरूर होगा। हो सकता है, कि हम जिस तरह से भगवान् को मानते हैं उस अवस्था में न हो, हो सकता है कि वह निराकार हो (गीता में भी लिखा है) हो सकता है, कि वह cosmic energy हो या ब्रह्मांड कि अपार शक्ति हो, या फिर हम सोच भी नहीं सकते कल्पना भी नहीं कर सकते उस रूप में हो । लेकिन भगवान कहे, अल्लाह कहे, ईश्वर कहे, चाहे जो भी कहे लेकिन वह शक्ति जरुर है। और हम इस बात को बिलकुल भी नकार नहीं सकते । इसलिए विज्ञान ईश्वर से अलग नहीं है और विज्ञान ईश्वर से। हमारे ब्रह्माण्ड की हर वस्तु एक दूसरे कि पूरक है।

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One thought on “विज्ञान और भगवान से जुड़े कुछ सवाल”

  1. Sir ye Jo pahla sawaal hai
    Mere hisaab we prakash ki chal nirwaat me kuch or thos me kuch or hoti hai
    Or jab phir se nirwaate me prakash aata hai
    To apni gati ko apne aap pa leta hai

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