Chandrayaan-2 मिशन के बारे में यह बातें हर भारतीय को पता होनी चाहिए।

दोस्तों दुनिया कि सबसे बड़ी Space agency ISRO ( Indian Space Research Organization) ने 22 July 2019 को अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी छलांग लगायी, जिस से हमारे भारतीय वैज्ञानिको ने देश के हर नागरिक को गौरवान्वित होने का मौका दिया। Chandrayaan-2 को 22 July 2019 को आँध्रप्रदेश के श्रीहरिकोट स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लांच किया गया था। भारत इस से पहले  15 जुलाई को चंद्रयान-2 को लांच करने वाला था लेकिन cryogenic engine में Leaking के कारण इसको 22 जुलाई तक के लिए रोक दिया गया। और उसके 22 तारिक को 2.43 PM पर चंद्रयान-2 को सफलतापूर्वक लांच किया गया। आज हम आपको बताएँगे Chandrayaan-2 मिशन के बारे में यह बातें हर भारतीय को पता होनी चाहिए।

Chandrayaan-2 मिशन के बारे में यह बातें हर भारतीय को पता होनी चाहिए।

चंद्रयान-2 को लांच करने के साथ इसरो ने पुष्टि की है की एजेंसी द्वारा आयोजित किये गए कई हज़ारो परीक्षणों के बाद इस मिशन के साथ हम चन्द्रमा की सतह पर पानी खोजने की उम्मीद कर रहे हैं।

इस मिशन में Orbiter, विक्रम (lander) और प्रज्ञान (Rover) को मिलकर टोटल 3877 Kg के पेलोड को लांच किया गया जिसमें ऑर्बिटर का वजन है – 2379kg  लैंडर का वजन है-1471 kg  और रोवर का वजन है – 27 kg ।

Moon surface पर चंद्रयान 2 की लैंडिंग इसरो के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण कार्य है क्योंकि भारत ने अब तक कोई भी ऐसा मिशन नहीं किया जिसमे हमने किसी प्लेनेट पर किसी रोवर को सॉफ्ट लैंडिंग करवाई हो।

यद्यपि चाँद पर भारत से पहले अमेरिका चीन और रूस अपने  रोवर भेज चुके हैं अगर भारत इस मिशन में कामयाब होता है तो भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जायेगा।

रूस, अमेरिका, चीन अपने रोवर चाँद पर भेज चुके हैं, फिर भी चाँद पर अपने सेटेलाइट चंद्रयान 1 से पानी खोजने का श्रेय भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) को जाता है।

अभी तक जितने देशो ने अभी मून मिशन किये हैं सबने चन्द्रमा के सेण्टर पर ही अपने रोवर उतारे हैं लेकिन ISRO ने इस बार चन्द्रमा की South Pole यानि दक्षिणी ध्रुव  इस रोवर को लैंड करवाने का मुशकिल चैलेंज लिया है।  जैसा की अब तक किसी भी Space Agency ने नहीं किया। ISRO ने South Pole of moon इसलिए चुना है क्योंकी इस जगह पर पानी और बाकि अन्य minerals मिलने की ज्यादा संभावना है।

इसरो के मितबिक इस मिशन की पहली पिक्चर लैंडर के सतह पर उतरते ही 15 मिनट के बाद Available को जाएगी हालाँकि। Lander में से Rover  को बहर निकलने में 4 घंटे का समय  लगेगा।

इस मिशन के लैंडर और रोवर हैं उनकी लाइफ 1 Luner Day के बराबर है, जो धरती के 15 दिनों के बराबर होता है। और इन्ही दिनों में इसरो बहुत सारे experiment करेगी। और जो इस मिशन का ऑर्बिटर है उसकी लाइफ 1 साल है।

Chandrayaan-2 मिशन में सबसे गर्व करने वाली बात यह है कि पहले भारत ने लैंडर और रोवर बनाने के लिए रूस से बात की थी और रुस ने हाँ भी कह दिया था लेकिन फिर रूस अपने  वादे से मुकर गया और उसने मना कर दिया फिर इसरो के वैज्ञानिको ने विश्वाश रखा और खुद से ही Lander और  Rover बनाने के लिए तैयार हो गये, और उन्होंने बना बह दिया, इसलिए इस मिशन में A to Z सारी technology स्वदेशी है और इसके लिए हमको किसी अन्य देश की जरुरत नहीं पड़ी। और अब भारत अपने दम पर ही अंतरिक्ष के सारे बड़े मिशन्स को अंजाम दे सकता है। इसके लिए हमको ISRO में काम कर रहे उन वैज्ञानिको का हृदय से धन्यवाद् करना चाहिए जो कम सैलरी में भी मन लगा कर काम करते हैं और कम खर्चे में बड़े से बड़े मिशन को कामयाबी तक पहुंचाते हैं।

दोस्तों एक और बात मैं यहाँ पर आपको बताना चाहूंगा कि अभी तक एक साथ ज्यादा से ज्यादा satellite लांच करने का श्रेय रूस को जाता था जिसने एक बार में सबसे ज्यादा यानी 34 satellite लांच किये थे।  लेकिन 15 February 2017 को इसरो ने  PSLV-C37 मिशन में एक साथ 104 satellite लांच करके विश्व रिकॉर्ड बनाया था। जसमे से भारत के अपने सिर्फ 2 satellite थे बाकी सब दूसरे देशो के थे। और सारे के सारे सॅटॅलाइट सक्सेसफुल ऑर्बिट में स्थापित किये गए।  और  इस से पहले मंगलयान के बारे में तो आप जानते ही होंगे।

इस मिशन को धरती से चाँद पर पहुँचने में 48 दिन का समय लगेगा।  चंद्रयान 2 22 जुलाई से लेकर 13 अगस्त तक पृथ्वी के चारो तरफ 5 चक्कर लगाएगा। इसके बाद 13 अगस्त से 19 अगस्त 2019 तक धरती और चाँद के बीच की लम्बी दूरी को तय करेगा। 19 अगस्त को चाँद की कक्षा में पहुँचने के बाद 31 अगस्त 2019 तक वह चाँद के चारो तरफ चक्कर लगाएगा। फिर 1 सितम्बर 2019 को विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जायेगा, और चाँद के दक्षिणी ध्रुव की तरफ अपनी यात्रा शुरू कर देगा और सितम्बर के पहले सप्ताह में ही चाँद पर उतरेगा जबकि ऑर्बिट चाँद के ऑर्बिट में ही चक्कर लगाता रहेगा और धरती से connection बनाये रखेगा।

Chandrayaan-2 की कीमत लगभग 14 करोड़ डॉलर है जबकि अमेरिका के अप्पोलो प्रोग्राम की लागत 25 अरब डॉलर थी।

इसरो सबसे तेजी से विकास की तरफ बढ़ती हुई स्पेस एजेंसी है। जिसको देखकर बाकि स्पेस एजेन्सिया हैरान हैं। इसरो में अभी एक और मिशन पर काम चल रह है जिसका नाम है गगनयान जिसमे भारत के राकेट से भारत के किस व्यक्ति को अंतरिक्ष में भेजा जायेगा। और इस मिशन को 2022 में किया जायेगा। और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसका वादा कर चुके हैं।

इसरो के लिए हमारी अग्रिम शुभकामनायें। 

तो दोस्तों Chandrayaan-2 Mission के बारे में आपका क्या कहना है कमेंट में जरूर लिखे।

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