TDS क्या होता है ?

TDS क्या होता है ?

TDS का पूरा नाम होता है Tax Deducted at Source. और अपने बहुत बार इस शब्द को सुना भी होगा लेकिन किसी ने इसके बारे में आपको विस्तार से बताया नहीं होगा। तो आज के इस article  में हम   से बताएँगे की TDS क्या होता है, इसका उपयोग कब कब होता है और यह किस व्यक्ति को देना होता है, तो सबसे पहले TDS के बारे में जान लेते हैं कि TDS क्या होता है ?

TDS क्या होता है ?

टी.डी.एस (Tax Deducted at Source) एक Direct Text होता है जो Payment के समय कलेक्ट किया  जाता है जैसे Salary, Fees, Commission, Interest From Bank, Lottery, Rent Payment इत्यादि। इस TDS transaction में Buyers & Deductor  और Sellers & Deductee होते हैं, आगे बढ़ने से पहले आइये आपको बताते हैं की ये डेडक्टर और डेडक्टी का क्या मतलब होता है

Buyers & Deductor – यह  प्रोडक्ट या सर्विस  खरीददार होता है, जो किसी प्रोडक्ट को खरीदता है या किसी सर्विस का उपयोग करता है।

Sellers & Deductee – यह प्रोडक्ट या सर्विस को बेचने वाला होता है जो किसी प्रोडक्ट को बेचता है या कोई सर्विस करता है।

Payment  करते समय Deductor  TDS काटता है जो आगे जाकर सरकार के खाते में जमा हो जाता है।  काटे हुए TDS के आधार पर Deductor डेडक्टी को एक TDS certificate जारी करता है। मुझे पता है कि अभी तक आप इसको बारीकी से नहीं समझे तो आइये एक उदाहरण के तौर पर समझने की कोशिश करते है। मान लीजिए आपको  hindish वेबसाइट को कुछ सर्विसेज के बदले  50,000 रुपये pay  करने हों, तो यह pay  करते समय Applicable rate के हिसाब से आपको  TDS काटकर Hindish को बचा हुआ पेमेंटकरना होगा, और बाकि (5%) Govt of India के Income Tax Department  के खाते में जमा करना होगा। और साथ ही साथ Hindish.com को एक TDS  Certificate भी जारीकरना होगा।

सर्विस की लगत थी – ₹50K
आपको TDS काटना पड़ेगा – 5%
इनकम टैक्स के खाते में जमा TDS – ₹2.5K
अब आप हिंदीश को Payment करेंगे – ₹47.5K

एक सरल भाषा में TDS की परिभाषा – अगर किसी की कोई आय होती है तो उस आय से टैक्स काटकर अगर व्यक्ति को बाकी रकम दी जाए तो टैक्स के रूप में काटी गई रकम को टीडीएस कहते हैं। सरकार टीडीएस के जरिए टैक्स जुटाती है। यह अलग-अलग तरह के आय स्रोतों पर काटा जाता है मसलन सैलरी, किसी निवेश पर मिले ब्याज या कमीशन आदि पर।

TDS का क्या महत्व है ? 

Government  के लिए टैक्स कलैक्शन prepone  हो जाता है। यानी deductor, deductee  को paymnets  करने से पहले ही TDS काट लेता है और इसीलिए टैक्स कलेक्शन पहले ही हो जाता है। और इसी वजह से सरकार को Regular Source of Income भी मिलता है। और वो ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुँच पाती है। और बात करे टैक्स पेय करने वालों की तो उनके लिए Tax Incident Distribute हो जाता है यानी जैसे जैसे आप कमाते हैं Applicable TDS काटा जाता है। और इसी वजह से जो टैक्स इंसिडेंट है यानी जो टैक्स आप भरते  हैं वो भी डिस्ट्रीब्यूट हो जाता है और यह आपके लिए टैक्स भरने का एक Simple Payment Mode है।

क्या Income Tax और TDS अलग अलग है ?

TDS इनकम टैक्स का ही एक हिस्सा है। इसे आप ऐसे देख सकते हैं कि “Pay as you earn” यानी जैसे जैसे आप मंथली कमाते रहते हैं आपका TDS काटता रहता है। और आप Financial Year के आखिर में एक बड़ा Amount Pay करने से बच जाते हैं।

यदि जो TDS कटा है वो आपके इनकम के अनुसार एप्लीकेबल टैक्स लैब से ज्यादा कटा है तो Income Tax Filing करते समय आप Refund demand कर सकते हैं। और यदि TDS  कम कटा है तो आपको Balance Tag खुद भरना चाहिए।

किस पेमेंट पर TDS कटता है ?

टीडीएस कई तरह के भुगतान (पेमेंट्स) पर काटा जाता है जैसे- सैलरी (Salary), ब्याज (Interest), लाभांश (Dividend), कमीशन (Commission), प्रोफेशनल फीस (Professional Fees), किसी भी तरह का किराया (Rent), ब्रोकरेज (Brokerage), काट्रेक्ट पेमेंट (Contract Payments) आदि पर टीडीएस काटा जाता है।

उदाहरण 2

माना आप कारोबारी है और अपने बिजनेस पर कुछ कर्मचारी रखे हुए हैं जिनको आप मासिक सैलरी देते हैं तो आप जब भी किसी कर्मचारी को सैलरी देंगे तो कर्मचारी की सैलरी से आपको टीडीएस काटना पड़ेगा।

टीडीएस रेट लिस्ट

कब टीडीएस नहीं कटता है ?

भारतीय रिजर्व बैंक, भारत सरकार को किए गए भुगतानों पर टीडीएस नहीं काटा जाता है। जब ब्याज इनमें क्रेडिट होता है तब भी टीडीएस नहीं कटता है: केंद्रीय या राज्य वित्तीय निगम। बैंकिंग कंपनियों। आईटी विभाग से प्रत्यक्ष कर या रिफंड के तहत ब्याज का भुगतान। UTI, LIC और अन्य बीमा या सहकारी समितियां। सहकारी समितियों या बैंकों में आवर्ती जमा या बचत खाते से अर्जित ब्याज। इंदिरा विकास पार्टी, केवीपी, या एनएससी से मिलने वाला ब्याज। NRI खाते में अर्जित ब्याज। नो-टीडीएस के तहत अधिकृत सभी संस्थान।

कितनी इनकम पर कितना TDS भरना होता है ?

सालाना आय कितना प्रतिशत टैक्स देना है
3 लाख रुपये तक  कोई टैक्स नहीं भरना होता है
3 लाख से 5 लाख तक  5% टैक्स भरना होता है
5 लाख से 10 लाख तक  10%
10 लाख से ऊपर 30%

TDS प्रमाणपत्र

आयकर अधिनियम की धारा 203 के अनुसार, जो कोई भी TDS काट रहा हैं, उसे अन्य सभी जानकारी के साथ टैक्स के रूप में काटी गई राशि से संबंधित प्रमाण-पत्र उसे दिखाना होता है जिसका TDS काटा जा रहा है| इसे TDS प्रमाण-पत्र कहा जाता हैं।

नौकरीपेशा के मामले में

  • कंपंनी अपने कर्मचारी को फार्म 16 देती हैं जिसमें टैक्स राशि से संबंधित सभी जानकारी होती हैं।
  • फॉर्म में सभी जानकारियां होती हैं जैसे कम्प्यूटेशन, कटौती और टैक्स का भुगतान आदि।
  • फॉर्म अगले वित्तीय वर्ष के 31 मई तक देना होता हैं।

गैर-नौकरीपेशा के मामलों में

  • फॉर्म 16A टैक्स काटने वाले के द्वारा दिया जाता है जिसमें टैक्स कम्प्यूटेशन, टैक्स छूट और भुगतान से संबंधित सभी जानकारी होती हैं।
  • TDS रिटर्न फाइल करने की तय तारीख के 15 दिनों में कटौती करने वालों को प्रमाण-पत्र जारी करना होता हैं।

TCS: एक प्रमाण पत्र है जिसमें टैक्स छूट और टैक्स भुगतान से संबंधित जानकारी होती है जो फॉर्म 27D में जारी किया गया है|

केंद्र सरकार को TDS जमा करना

    • TDS काटने वाले को NSDL के द्वारा भुगतान करके केंद्र सरकार को TDS जमा करना होता हैं, जिसे ऑथॉराइज़ड बैंक शाखाओं में जमा किया जा सकता हैं।
    • यह भुगतान NSDL के आधिकारिक पोर्टल के द्वारा चालान 281 का उपयोग करके और नेट बैंकिंग के माध्यम से भुगतान ऑनलाइन किया जा सकता है।
    • TDS रिटर्न फाइल करने से पहले TDS राशि जमा करनी होती हैं।
    • ई-भुगतान उन सभी के लिए अनिवार्य है जो धारा 44AB के तहत ऑडिट हो सकता है|

TDS रिटर्न क्या है ?

टैक्स जमा करने के अलावा, टैक्स कटने वाले को TDS रिटर्न भी फ़ाइल करना चाहिए।

TDS रिटर्न वो स्टेटमेंट है जो आयकर  विभाग को हर तीन महीनों में दी जाती है। TDS रिटर्न को समय पर जमा करना टैक्स काटने वाले के लिए  आवश्यक होता है।

आपको नीचे बताई गयी जानकारी TDS रिटर्न फाइल करने के लिए जरुरी हैं:

  • टैक्स काटने वाले एवं जिसका टैक्स कटा है उसका पैन कार्ड
  • सरकार को आपने कितने टैक्स राशि का भुगतान किया है
  • TDS चालान से सम्बंधित जानकारी
  • अन्य जानकारी , अगर कोई हो तो

TDS रिटर्न फ़ाइल करने के लिए कौन योग्य है ?

TDS रिटर्न फ़ाइल करने के लिए वो कंपनी, संगठन योग्य है जिनके पास टैक्स जमा हो एवं डिडक्शन अकाउंट नंबर (TAN) हो। वो हर व्यक्ति जो आयकर अधिनियम के तहत नीचे बताई गए भुगतानों में से कोई भी एक करता है उसे TDS काटना और योग्य करना होगा:

  • वेतन भुगतान के समय
  • जब आपकी कमाई “सिक्योरिटीज पर इनकम ” के माध्यम से होती है
  • जब आपकी कमाई लॉटरी आदि खेल से होती है
  • घोड़े की रेस आदि खेल से होने वाली कमाई
  • बीमा पर कमीशन के माध्यम से कमाई
  • नेशनल सेविंग स्कीम आदि के द्वारा होने वाली कमाई

तो आशा करता हूँ की आपको TDS के बारे में काफी कुछ जानने को मिला होगा आप नीचे दिए गए आर्टिकल भी पढ़ सकते है।

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