श्रीमद्भगवद्गीता के अनमोल विचार | bhagwadgeeta quotes in hindi

श्रीमद्भगवद्गीता के अनमोल विचार | bhagwadgeeta quotes in hindi | krishna quotes in hindi

आज हम पढेंगे श्रीमद्भगवद्गीता के अनमोल विचार | bhagwadgeeta quotes in hindi | महाभारत युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच जो संवाद हुआ वह हम इंसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं। क्योंकि इस संवाद में इस श्रृष्टि के रचनहार भगवान् श्रीकृष्ण ने अर्जुन के जरिये पूरी दुनिया को इंसान को उसका जीवन समझाया । जिसमें उन्होंने इंसान के जीवन के हर विषय को बहुत गहरे से समझाया है जन्म – मृत्यु, पाप – पुण्य, अपना – पराया, रिश्ते – नाते, हंसना – रोना, सुख – दुःख, आत्मा – परमात्मा, अकर्म, विकर्म, इर्ष्या, काम – क्रोध, लोभ – मोह सभी विषयो में बहुत अच्छे से समझाया है।  और हर दुःख से निपटने का solution भी बताया है। भले कुछ धर्म के ठेकेदार इसको धर्मो में बाँटकर इसको एक धार्मिक किताब की नज़र से देखते हैं और सच्चाई को नकार कर अपनी जिद्द पर अड़े रहते हैं। मगर असल में आप के बार गीता को पढेंगे तो इसमें किसी भी जाति – धर्म उंच – नीच का कोई ज़िक्र नहीं है।

हाँ गीता के चौथे अध्याय, तेरहवें श्लोक में श्रीकृष्ण नें इंसानों के चार वर्णों का ज़िक्र किया है।  जिसमें उन्होंने कहा है-

चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः ।
तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम् ॥  

मतलब ब्राह्मण, क्षत्रिया , शुद्र, वैश्य का विभाजन व्यक्ति के कर्म और गुणों के हिसाब से होता है, न की जन्म के, गीता में भगवान श्री कृष्ण ने और अधिक स्पस्ट करते हुए लिखा है कि वर्णों की व्यवस्था जन्म के आधार पर नहीं कर्म के आधार पर होती है। यदि  कोई  वैश्य   पूजा पाठ करने की विद्या सीख जाये तो वह ब्राह्मण बन सकता है और यदि कोई ब्राह्मण लोगो की रक्षा करना चाहता और पूजा पाठ न सीख कर युद्ध विद्या सीखता है तो वह क्षत्रिय बन सकता है। और इसी प्रकार कोई क्षत्रिय अगर पूजा – पाठ की विद्या सीखता है वेदों को अच्छे से जान लेता है तो वह भी ब्राह्मण बन सकता है । यानी  आपके जीने का तरीका  ही आपके गुणों को व्यक्त करता है जिसमे जाति , उंच – नीच  छोटे बड़े, का दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं है।

यह व्यवस्था इसलिए बनायीं गयी थी कि जैसे आज हमारे Office में काम करने के लिए manager, employee, peon, receptionist सभी बहुत जरुरी होते हैं और सभी अपना काम अच्छे से करते हैं और एक अच्छी arrangement के साथ office चलता है। ठीक उसी प्रकार धरती पर इंसानों की अच्छी व्यवस्था के लिए यह सब बनाया गया था। अब यह तो जरुरी नहीं की peon का बेटा भी peon ही बनेगा, manager का बेटा manager ही बनेगा, peon के बेटे को पूरा हक है कि अगर उसके अंदर manager की quality है तो वह manager की पोस्ट पर जा सकता है। और ऐसा ही होता भी है बस इसी प्रकार गीता की वर्ण व्यवस्था भी है कोई भी इंसान कुछ भी बन सकता है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि लोग इंसानों को जन्म से ही जाति के आधार पर बाँट देते हैं और उंच- नीच का भेदभाव करके इंसानों को इंसान से तोड़ देते हैं ।

श्रीमद्भगवद्गीता के अनमोल विचार | bhagwadgeeta quotes in hindi –


श्रीमद्भगवद्गीता के अनमोल विचार | bhagwadgeeta quotes in hindi | krishna quotes in hindi

Quotes  1  जो मन को नियंत्रित नहीं करते उनके लिए वह शत्रु के समान कार्य करता है। –भगवान श्रीकृष्ण  

 Quotes 2  आत्मा को शास्त्र नहीं काट सकते , अग्नि नहीं जला सकती , जल नहीं गाला सकता , वायु नहीं सूखा सकती। _भगवान श्रीकृष्ण  

 Quotes  3  बाहर का त्याग वास्तव में त्याग नहीं है , भीतर का त्याग ही त्याग है .हमारी कामना , ममता , आसक्ति ही बढ़ने वाले है , संसार नहीं।_भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  4   मनुष्य अपनी वासना के अनुसार ही अगला जन्म पाता है। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  5  हमेशा आसक्ति से ही कामना का जन्म होता है । _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  6 यह संसार हर क्षण बदल रहा है और बदलने वाली वस्तु असत्य होती है। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  7   जीवन न तो भविष्य में है न अतीत मैं ,जीवन तो बस इस पल मैं है। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 8  तुम खुद अपने मित्र हो और खुद ही अपने शत्रु। _भगवान श्रीकृष्ण

 

Quotes  9  जो भी नए कर्म और उनके संस्कार बनते है वह सब केवल मनुष्य जन्म में ही बनते है ,पशु पक्षी आदि योनियों में नहीं, क्यों की वह योनियां कर्मफल भोगने के लिए ही मिलती हैं। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 10   जो मन को रोक नहीं पाते उनके लिए उनका मन दुश्मन के समान है । _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  11  हे पार्थ तू फल की चिंता मत कर बस अपना कर्म कर। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  12   चेतन व अचेतन ऐसा कुछ भी नहीं है जो मेरे बगैर इस अस्तित्व में रह सकता हो।_भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  13 ईश्वर सभी वस्तुओ में है और उन सभी के ऊपर भी। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 14 व्यक्ति जो चाहे वह बन सकता है अगर वह उस इच्छा पर पूरे विश्वास के साथ स्मरण करे। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 15  तुम मुझमे समर्पित हो जाओ मैं तुम्हे सभी पापो से मुक्त कर दूंगा। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 16  निद्रा , भय , चिंता , दुःख , घमंड आदि दोष तो रहेंगे ही , दूर हो ही नहीं सकते ऐसा मानने वाले मनुष्य कायर है। _भगवान श्रीकृष्ण

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Quotes  17  संसार के सयोग में जो सुख प्रतीत होता है , उसमे दुःख भी मिला रहता है, परन्तु संसार के वियोग से सुख दुःख से अखंड आनंद प्राप्त होता है। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 18   उत्पन्न होने वाली वस्तु तो स्वतः ही मिटती है, जो वस्तु उत्पन्न नहीं होती वह कभी नहीं मिटती, आत्मा अजर अमर है और शरीर नाशवान है । _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  19   जो व्यक्ति संदेह करता है उसे कही भी ख़ुशी नहीं मिलती। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  20   काम कोर्ध और लोभ नर्क के तीन द्धार है। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  21  अपने लिए कुछ न करने से कर्मो से सम्बन्ध टूट जाता है, जिसे निष्काम कर्म कहा जाता है। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 22  दैवीय सम्प्रदा से युक्त पुरुष में भय का सर्वथा आभाव और सबके प्रति प्रेम का भाव होता । _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 23  इस जीवन में कुछ भी व्यर्थ होता है। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 24  मुझे कोई भी कर्म जकड़ता नहीं है, क्योंकि मुझे कर्म के फल की कोई चिंता नहीं है। _भगवान श्रीकृष्ण

 

Quotes  25  मन बहुत ही चंचल होता है और इसे नियंत्रित करना कठिन है,  परन्तु अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता है। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 26   मैं इस धरती की सुगंध हूँ, मैं आग का ताप हूँ और मैं ही सभी प्राणियों का संयम हूँ। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  27  तुम उस चीज के लिए शोक करते हो जो शोक करने के लायक नहीं है, एक बुद्धिमान व्यक्ति न ही जीवित और न ही मृत व्यक्ति के लिए शोक करता है। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  28   हे अर्जुन तू युद्ध भी कर और हर समय में मेरा स्मरण भी कर। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  29  जो वास्तविक नहीं है उससे कभी भी मत डरो। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 30  सम्मानित व्यक्ति के लिए अपमान मृत्यु से भी बदतर होती है। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 31  सज्जन पुरुष अच्छे आचरण वाले सज्जन पुरुषो में , नीच पुरुष नीच लोगो में ही रहना चाहते है स्वाभाव से पैदा हुई जिसकी जैसी प्रकृति है उस प्रकृति को कोई नहीं छोड़ता।  _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 32  साधारण मनुष्य शरीर को व्यापक मानता है , साधक परमात्मा को व्यापक मानता है जैसे शरीर और संसार एक है ऐसे ही स्वयं और परमात्मा एक है । _भगवान श्रीकृष्ण

श्रीमद्भगवद्गीता के अनमोल विचार | bhagwadgeeta quotes in hindi – 

Quotes  33  कर्म योग एक बहुत ही बड़ा रहस्य है। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 34   “मैं करता हूँ ” ऐसा भाव उत्पन्न होता है इसको ही ” अहंकार ” कहते है क्योंकि सब कराने वाला परमात्मा है । _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  35   हे अर्जुन मैंने और तुमने कई जन्म लिए है, लेकिन तुम्हे याद नहीं है और मुझे दिव्यत्व के कारण सब याद है । _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  36  जो मुझसे प्रेम करते है और मुझसे जुड़े हुए है, मैं उन्हें हमेशा ज्ञान देता हूँ। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  37  जिसने काम का त्याग कर दिया हो उसे कर्म कभी नहीं बांधता (इसका यह मतलब नहीं की सारे काम छोड़कर साधू बन जाओ क्योंकि साधू भी कर्म तो करता ही है मन से कर्म का त्याग करो और इच्छारहित कर्म करो )। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 38  जो होने वाला है वो होकर ही रहता है और जो नहीं होने वाला वह कभी नहीं होता . ऐसा निश्चय जिनकी बुद्धि में होता है उन्हें चिंता कभी नहीं सताती। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 39  वह जो मेरी सृष्टि की गतिविधियों को जानता है वह अपना शरीर त्यागने के बाद कभी भी जन्म नहीं लेता है क्योंकि वह मुझमे समा जाता है। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 40   शास्त्र, वर्ण , आश्रम की मर्यादा के अनुसार जो काम किया जाता है वह ” कार्य ” है और शास्त्र आदि की मर्यादा से विरुद्ध जो काम किया जाता है वह ” अकार्य ” है। _भगवान श्रीकृष्ण

श्रीमद्भगवद्गीता के अनमोल विचार | bhagwadgeeta quotes in hindi | krishna quotes in hindi

Quotes  41   जब व्यक्ति अपने कार्य में आनंद प्राप्त कर लेता है तब वह पूर्ण हो जाता है। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 42   किसी भी काम को नहीं करने से अच्छा है कि कोई काम कर लिया जाए। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  43  सभी कर्तव्यो को पूरा करके मेरी शरण में आ जाओ। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  44  भय , राग द्वेष और आसक्ति से रहित मनुष्य ही इस लोक और परलोक में सुख पाते है। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  45   बुद्धिमान व्यक्ति को समाज की भलाई के लिए बिना किसी स्वार्थ के कार्य करना चाहिए। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 46  मेरे लिए कोई भी अपना – पराया नहीं है। जो मेरी पूजा करता है मैं उसके साथ रहता हूँ। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 47  अहम् भाव ही मनुष्य में भिन्नता करने वाला है ,अहम् भाव न रहने से परमात्मा के साथ भिन्नता का कोई कारण ही नहीं है। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 48  बुद्धिमान व्यक्ति ईश्वर के सिवा और किसी पर निर्भर नहीं रहता। _भगवान श्रीकृष्ण

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Quotes  49  एक ज्ञानवान व्यक्ति कभी भी कामुक सुख में आनंद नहीं लेता। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 50  वह सिर्फ मन है जो किसी का मित्र तो किसी का शत्रु होता है। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  51  बुरे कर्म करने वाले नीच व्यक्ति मुझे पाने की कोशिश नहीं करते। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  52  इसमें कोई शक नहीं है कि जो भी व्यक्ति मुझे याद करते हुए मृत्यु को प्राप्त होता है वह मेरे धाम को प्राप्त होता है। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  53  जो व्यक्ति जिस भी देवता की पूजा करता है मैं उसी में उसका विश्वास बढ़ाने लगता हूँ। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 54  मैं भूत, वर्तमान और भविष्य के सभी प्राणियों को जानता हूँ लेकिन कोई भी मुझे नहीं जान पाता। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 55  जो अपने कार्य में सफलता पाना चाहते है वे भगवान की पूजा करे। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 56  जो कोई भी किसी काम में निष्क्रियता और निष्क्रियता में काम देखता है वही एक बुद्धिमान व्यक्ति है। _भगवान श्रीकृष्ण

श्रीमद्भगवद्गीता के अनमोल विचार | bhagwadgeeta quotes in hindi | krishna quotes in hindi

 

Quotes  57  मैं सभी जीव – जंतुओ के हृदय में निवास करता हूँ। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 58   हे अर्जुन, केवल भाग्यशाली योद्धा ही ऐसा युद्ध लड़ने का अवसर पाते हैं जो स्वर्ग के द्वार के सामान है। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  59  आत्म-ज्ञान की तलवार से काटकर अपने ह्रदय से अज्ञान के संदेह को अलग कर दो, अनुशाषित रहो, उठो। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes  60  आपके सार्वलौकिक रूप का मुझे न प्रारंभ न मध्य न अंत दिखाई दे रहा है अर्जुन 

 Quotes  61  किसी और का काम पूर्णता से करने से कहीं अच्छा है कि अपना काम करें, भले ही उसे अपूर्णता से करना पड़े। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 62  प्रबुद्ध व्यक्ति के लिए, गंदगी का ढेर, पत्थर, और सोना सभी समान हैं। _भगवान श्रीकृष्ण

 Quotes 63 ईश्वर सभी वस्तुओ में है और उनके उपर भी । _भगवान श्रीकृष्ण

श्रीमद्भगवद्गीता के अनमोल विचार | bhagwadgeeta quotes in hindi | krishna quotes in hindi

 Quotes 64  वह  जो  सभी  इच्छाएं  त्याग  देता  है  और  “मैं ”  और  “मेरा ” की  लालसा  और भावना  से  मुक्त  हो  जाता  है  उसे  शांती  प्राप्त  होती  है। _भगवान श्रीकृष्ण

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