सेंसेक्स क्या होता है ?

सेंसेक्स क्या होता है ? Sensex kya hota hai

सेंसेक्स क्या होता है ?

सेंसेक्स को हिन्दी में संवेदी सूचकांक कहते हैं जो Mumbai Stock Excchange का एक सूचकांक है। भारत जैसे बड़े अर्थव्यवस्था वाले देशों में कंपनियों के शेयरों की कीमतों के आंकलन के लिए दो सूचकांक बनाया गया है।  शेयर बाजार में इन कंपनियों के शेयरों की बढ़ती-घटती कीमतों पर नजर रखता है। बढ़ती-घटती कीमतों को बाजार के सामने प्रस्तुत करता है, जिससे सेंसेक्स (Sensex) कहते हैं। इसी तरह निफ्टी सूचकांक भी एक प्रकार का सूचकांक है जिस का संबंध National Stock Exchange से है।  हमारे देश में दो प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज है BSE और NSE । सेंसेक्स बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE का सूचकांक है जो दो शब्दों SENSITIVE + INDEX से मिलकर बना है। इसे संवेदी सूचकांक,  BSE 30 या BSE SENSEX भी कहा जाता है। BSE में 30 प्रमुख कंपनिया लिस्टेड होती हैं जो कि अपने फील्ड की सबसे बड़ी कंपनी होती है उनके share के आधार पर सेंसेक्स बनता है। अगर इन 30 कंपनियों के शेयर में गिरावट आती है तो यह माना जाता है कि BSE आज गिरकर बंद हुआ, और अगर इन 30 कंपनियों के शेयर में तेजी रहती है तो यह माना जाता है कि BSE आज तेजी के साथ बंद हुआ। 1 जनवरी, 1986 को पहली बार प्रकाशित होने के बाद सेंसेक्स आजतक मुंबई शेयर बाजार के लिए indicator की तरह कार्य कर रहा है। सेंसेक्स का जो base year है वो 1978-79 है, और इसका base value उस समय के लिए 100 है। यहाँ Base Year तथा Base Value कहने का मतलब यह है की किसी दिन के सेंसेक्स को वर्ष 1978-79 के Market Cap एवं base value से कैलकुलेट करते है।

सेंसेक्स में कंपनियों के चुनने की प्रक्रिया –

इन तीस कंपनियों को चुनने के लिए एक कमिटी बनाई गयी है जिसे इंडेक्स कमिटी कहते है। इस कमिटी में देश के कई वर्गों के प्रोफेशनल्स शामिल होते है। जिसमे अर्थशास्त्री, प्रबंधक, सरकार तथा बैंको के प्रतिनिधि रहते है। टॉप 30 में शामिल होने के लिए किसी कंपनी द्वारा किन शर्तो का पूरा होना जरुरी होता है।

  • कंपनी कम से कम सक्रिय रूप से एक वर्ष से शेयर बाजार में पंजीकृत होनी चाहिए।
  • कंपनी के शेयर्स का प्रतिदिन ख़रीदा और बेचा जाना अनिवार्य है।
  • तीस कंपनियों की सूची में शामिल होने के लिए किसी कंपनी का Free-float Market Capitalisation Weightage अच्छा होना चाहिए।
  • प्रतिदिन के ट्रेड और वैल्यू के हिसाब से कंपनी देश की बड़ी कंपनियों में शामिल होनी चाहिए।

सेंसेक्स की गणना कैसे की जाती है ?

सेंसेक्स की गणना से फ्री फ्लोट बाजार पूंजीकरण पद्धति(Free-float Market Capitalization method) का उपयोग करके किया जाता है।  यह नि: शुल्क फ्लोट उन शेयरों के लिए है जो trading के लिए खुले होते हैं।  सभी शेयर फ्री फ्लोटिंग नहीं हो सकते कुछ गिरवी हो सकते हैं।  कुछ हितों/प्रवर्तकों को नियंत्रित करने वाले व्यक्तियों या निकायों के हाथ में हो सकते हैं, कुछ शेयर सरकारी होल्डिंग्स हो सकते हैं, etc. ऐसे लॉक-इन (locked-in) शेयरों को फ्री फ्लोटिंग नहीं माना जाता है इस पद्धति में, सूचकांक base period के मुताबिक 30 constituent शेयरों के फ्री-फ्लोट बाजार मूल्य को दर्शाता है।

भारत में कितने स्टॉक एक्सचेंज है ?

भारत में दो प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज हैं जिससे लोग सेंसेक्स या शेयर बाजार समझते हैं, उसका नाम इस प्रकार है

  • मुंबई स्टॉक एक्सचेंज, मुंबई
  • नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, मुंबई

Sensex Indiaके तहत 30 प्रमुख कंपनियां-

अदानी पोर्ट्स कोल इंडिया एचयूएल एम एंड एम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
एशियाई पेंट्स डॉ रेड्डीज़ लैब्स आईसीआईसीआई बैंक मारुति सुजुकी सन फार्मा
ऐक्सिस बैंक गेल इंफोसिस एनटीपीसी टाटा मोटर्स
बजाज ऑटो एचडीएफसी आईटीसी ओएनजीसी टाटा इस्पात
भारती एयरटेल एचडीएफसी बैंक लार्सन पावर ग्रिड टीसीएस
सिप्ला हीरो मोटोकॉर्प लुपिन Reliance विप्रो

Performance Report of S&P BSE-Sensex (1979-2016)

सेंसेक्स क्या होता है ?
BSE-Sensex Report (1979-2016)

सेंसेक्स का महत्व –

शेयर बज़ार किसी भी देश की अर्थव्यवस्था (Economy) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह Market में आवश्यक Money Flow को बनाये रखता है। आसान शब्दों में कहूं तो अर्थव्यवस्था की तरलता को बनाये रखने में शेयर बाजार का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान होता है।

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