OYO room के फाउंडर रितेश अगरवाल की कहानी

ritesh agarwal succes story
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रितेश अग्रवाल


रितेश अग्रवाल एक भारतीय उद्यमी और OYO room कंपनी के संस्थापक  हैं, जो यात्रियों को होटलों में ठहरने के लिए अच्छे कमरे सस्ते दाम पर अपनी Online website www.oyorooms.com के जरिये  उपलब्ध करवाते हैं । 21 साल के रितेश अग्रवाल को अपनी oyo कंपनी के लिए और उनके इस सफल बिज़नस के लिए कई पुरुस्कारों से भी पुरुस्कृत किया गया है । 21 साल की उम्र में लोग या तो कॉलेज में होते हैं या तो किसी नौकरी की तलाश में लेकिन रितेश अग्रवाल ने 360 करोड़ सालाना टर्न ओवर वाली कंपनी कड़ी कर के ये बात साबित कर दी की स्टार्टअप की कोई उम्र नहीं होती,सिर्फ इतना ही नहीं रितेश अगरवाल ने 16 साल की उम्र में एक किताब भी लिखी थी। जिसका नाम है Indian Engineering Collages: A complete Encyclopedia of Top 100 Engineering Collages  यह किताब फ्लिप्कार्ट पर खूब बिकी और इस किताब की सराहना भी हुई। आज लोगो की नज़र में रितेश अग्रवाल की छवि एक सफल उद्यमी के तौर पर है जो बाकि युवाओ को भी सफल होने के लिये प्रेरित करता है तो चलिए एक नज़र डालते हैं रितेश के इस उतार चढाव वाले सफ़र संघर्षमई  सफ़र पर ।

रितेश अग्रवाल बैकग्राउंड


 रितेश अग्रवाल का जन्म 16 नवंबर, 1993 को कटक, उड़ीसा में एक मध्यम मारवाड़ी मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ इनकी पृष्ठभूमि के बारे में कहें तो उनका परिवार पहले से ही व्यवसाई था उनके पिता का इंफ्रास्ट्रक्चर कारपोरेशन का काम करते हैं तथा इनकी माँ एक गृहणी हैं और वे तीन भाई बहन हैं । बचपन से ही व्यवसायी परिवार होने के कारन रितेश की के अंदर भी वो बिज़नस करने की झलक बचपन से ही थी यह इसी बात से साबित होता है कि जब उन्होंने मात्र 16 साल की उम्र में ही Indian Engineering Collages: A complete Encyclopedia of Top 100 Engineering Collages नाम की एक किताब लिख डाली जैसे की इस किताब के नाम से ही पता चल रहा है की इसमें भारत के 100 इंजीनियरिंग कॉलेज का ज़िक्र किया गया है इस किताब को फ्लिप्कार्ट पर ऑनलाइन बेचा गया था । रितेश  को घुमने का बहुत शौक है और उनके इसी शौक ने उनको फर्श से अर्श तक पहुँचाया वे  मानते हैं की वे bill gattes, stev jobs और facebook के निर्माता मार्क जुकेर्बर्ग से बहुत प्रेरित हुए। जिनसे उनके अंदर कुछ कर गुजरने का जज्बा पैदा हुआ और उन्होंने मात्र 21 साल में कड़ी कर दी 360 करोड़ की कंपनी  OYO room।

रितेश अग्रवाल शिक्षा


रितेश अग्रवाल ने इंटरमीडियट तक की पढाई अपने जिले के  cared Heart School से की, तथा आगे की पढाई करने के लिए वे राजस्थान के कोटा शहर में गए जहाँ उन्होंने IIT में दाखिल लिया। ओर यही उन्होंने अपनी किताब भी लिखी वे भाग्यशाली थे और कुछ कर गुजरने वाली सोच के इन्सान थे इसलिए  मात्र 16 साल की उम्र में ही  उनका selection मुंबई स्थित Tata Institute of Fundamental Research (TIRF) में आयोजित, Asian Science Camp के लिए किया गया। जहा पुरे पुरे एशिया से छात्र चुन कर जाते   हैं और विचार विमर्श करके सोशल प्रोब्लम को सोल्व करने के आइडिया ढूंडते हैं जहाँ से उनको बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बाद उन्होंने दिल्ली स्थति Indian school of business and Finance में दाखिल लिया लेकिन अपनी oravel के project में बिजी होने के कारण उनको पढाई छोडनी पड़ी ।

बिज़नस का आईडिया कहाँ से आया


अब दिल्ली हो मुंबई हो या कोटा जब भी ठंडीयो की गर्मियों की छुट्टी मिलटी रितेश घुमने निकल जाया करते थे होटल में ठहरा करते थे तो उनको वहां बहुत सारी असुविधाएं महसूस होती थी और उस वक़्त डायरेक्ट होटल से ही बुकिंग होती थी। कोई स्पेशल oyo जैसी कंपनी नहीं थी इसलिए वो नोटिस करते थे की कभी उनको कम दाम में अच्छे कमरे मिल जाते हैं। और कभी बहुत ज्यादा पैसे देने पर भी घटिया क्वालिटी के कमरे, अब बिज़नस तो उनकी रगों में बचपन से दौड़ता आ रहा तो वो भी बिजनिस करने की सोच तो रहे थे। लेकिन अभी तक वो तय नहीं कर पाए की आखिर बिज़नस करे तो करें किस चीज का अपनी इस गुमन्तु आदत के कारण उनके दिमाग में एक आईडिया आया की मेरे जैसे बहुत से लोग है जो घुमने जाते हैं तो क्यों न मैं एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू कर दूं जहाँ से लोग आसानी से अपने होटल के रूम की Online booking करवा सके । और बस यही से शुरू हुआ उनका Business Model जिसको उन्होंने नाम दिया Oravel ।

Oravel


साल 2012 में जब उनको online room book करवाने का ये आईडिया सूझा तो उन्होने इसको नाम दिया Oravel और काम करने लगे इस ऑनलाइन पोर्टल के शुरु होने के बाद उनके इस बिज़नस मॉडल को अच्छा आईडिया मानते हुए उनको स्टार्टपस में निवेश करने वाली कंपनी VentureNursery से 30 लाख का फंड भी प्राप्त हो गया। और उनके पास अब कोम्पनी को आगे बढ़ने की हर एक सुविधा हो गयी थी जब उनका यह बिज़नस थोडा और अच्छा चला तो उन्होने अपने इस बिज़नस मॉडल को पेपल के सह संस्थापक पीटर थेल के “थेल फाउनडेशन” द्वारा आयोजित एक वैश्विक प्रतियोगिता है में रखा जिसमें रितेश अग्रवाल को 10 नम्बर मिला और वो पहले पहले भारतीय बने जिनको  Theil Fellowship में जगह मिली और साथ ही 66 लाख रुपये का फण्ड भी । अब उनकी स्थिति और अच्छी हो गयी थी लेकिन कुछ दिन बाद उनका यह बिज़नस दिन प्रतिदिन घाटे में जा रहा था शायद वह इसलिए कि वे यात्रियों को ऑनलाइन रूम बुक करने की सुविधा तो दे रहे थे लेकिन यात्री को वह कमरा कैसा मिल रहा है, उसके पैन्सो के हिसाब से उसको मिल पाया की नहीं  ये नहीं देख रहे थे और यह कंपनी बहुत घाटे में गयी। जिस से इसको बंद करना पड़ा और और अब थी बारी उनके सफल OYO रूम की ।

OYO Room 


जब oravel घाटे में जाकर बंद हुई तो रितेश ने हिम्मत नहीं हारी और क्या वजह हो सकती है जो इसको बंद करना पड़ा इस पर उन्होने बारीकी से गौर किया तो यही रीज़न पाया की वे बुकिंग की सुविधा तो दे रहे थे। लेकिन यात्रियों का ध्यान नहीं फिर उन्होने सोचा फिर दुबारा से oravel  को launch किया जाये लेकिन oravel तो एक ऐसी ब्रांड बन चुकी थी जिसपर असुविधा के कारन पहले वाला यात्री दुबारा नहीं आना चाहते थे। इसलिए रितेश ने उसी बिज़नस मॉडल को OYO room के नाम से एक नए रूप में पेश किया और इस बार उन्होंने 5 सदस्यों की टीम बनाई थी जिनका काम होटल के साथ  टाई अप करते वक़्त  होटल के कमरों की जाँच करना था की वे साफ सुधरे हैं या नहीं। यदि वे OYO की नियमो पर खरा उतरते हैं तो तभी होटलों को OYO के साथ टाई अप किया जा है वरना नहीं, और उनके इसी सुधर के कारण उनकी कंपनी पहले से जबरदस्त स्टारडम पर पहुच गयी है। जिसकी सालाना टर्न ओवर करीब 400 करोड़ है ।

2014 में ही दो बड़ी कंपनियों Lightspeed Venture Partners (LSVP) एवं DSG Consumer Partners ने Oyo Rooms में 4 करोड़ रूपये का निवेश किया। वर्तमान वर्ष 2016 में, जापान की बहुराष्ट्रीय कंपनी Softbank ने भी 7 अरब रूपयें का निवेश किया है। जिस से रितेश अपने इस बुसिनेस को नयी बुलंदियां हासिल करवा सकते हैं  ।

रितेश 26 साल (2017) की छोटी सी उम्र में ही इतने सफ़ल उद्यमी बन गए हैं । जिन्होंने भारत की 182 शहरो में 6500 होटलों के साथ  टाई अप किया है,जिनके लिए आज उनकी इस कंपनी OYO  room में करीब 1500 कर्मचारी काम करते हैं ।

रितेश अग्रवाल के इस बिज़नस से हर युवा को कुछ कर गुजरने का जज्बा हौसला और प्रेरणा मिलती है ।

 

About kailash

मेरा नाम कैलाश रावत है और मैं hindish.com का एडमिन व लेखक हूँ और इस ब्लॉग पर निरंतर हिन्दी में ,टेक,टिप्स,जीवनियाँ,रहस्य,व अन्य जानकारी वाली पोस्ट share करता रहता हूँ, मेरा मकसद यह है की जैसे बाकि भाषाए इन्टरनेट पर अपनी एक अलग पह्चान बना रही हैं तो फिर हम भी अपनी मात्र भाषा की इन्टरनेट की दुनियां में अलग पहचान बनाये न की hinglish में ।

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