रामायण के 5 महाझूट जिनको आप सच समझते हैं

रामायण के 5 महाझूट जिनको आप सच समझते हैं

कुंभकरण 6 महीने तक सोता था –

अक्सर हमे serieal मे दिखाया जाता है कि रामायण में रावण का भाई कुंभकरण 6 महीने तक सोता था ओर 6 महीने जागता था लेकिन यह सबसे बड़ा झूठ है, क्योंकि इस बात को हम खुद सोच सकते हैं कि कोई भी व्यक्ति 6 महीने तक सोया रहेगा तो वह नहीं खाएगा ओर अगर कोई 6 महीने तक खाना नहीं खाएगा तो निश्चित ही मर जाएगा ।

हनुमान जी पर्वत उठा कर लाये थे –

दरअसल Photos मे ओर आधुनिक रामलीला मे यह दिखाया जाता है कि हनुमान जी पर्वत उठा कर लाये थे जो सरासर गलत है।   हनुमान जी बहुत बलवान थे लेकिन उन्होने सारा पर्वत नही उठाया था असल सच्चाई तो यह है कि हनुमान जी को संजीवनी बूटी लाने के लिए द्रोणागिरि पर्वत पर भेजा गया था।  तो वहाँ बहुत सारी जड़ी बूटियाँ थी ओर हनुमान जी को यह को नहीं पता चला की इनमे से संजीवनी बूटी कौन सी है इसलिए द्रोणागिरि पर्वत पर जितनी भी जड़ी बूटियाँ थी वो सारी की सारी ले आए थे ॥

वनवास के 14 सालों के दौरान लक्षम ही सोये नहीं थे –

कुछ पाखंडी पंडो ओर कथावाचको के द्वारा आपको यह सुनने को मिलता है कि 14 साल के वनवास के दौरान लक्ष्मण जी कभी सोये नहीं थे।  ओर यह भी एक बहुत बड़ा झूठ है। क्योंकि इस बात को हम सभी जानते हैं कि रामायण को  महर्षि वाल्मीकि जी ने लिखा है ओर खुद उनके द्वारा लिखी गयी रामायण मे यह श्लोक लिखा गया है ।

अथ रात्र्यां व्यतीतायामवसुप्तमनन्तरम ।
प्रबोधयामास शनैर्लक्ष्मणम रघुनंदनम । ।

अर्थात रात व्यतीत हो जाने के बाद श्री राम जी धीरे धीरे लक्ष्मण जी को भी उठाते थे तो यहा पर तो सीधा सीधा सिद्ध हो गया कि लक्ष्मण जी सोये थे । तुलसीदास द्वारा लिखी गयी रामचरित मानस मे भी कुछ काल्पनिक बाते घुसा दी गयी हैं ।

सबरी के जूठे बेर –

चाहे वह धारावाहिक TV serial हो या आजकल दशहरा के समय खेली जाने वाली रामलीला, हर जगह एक दृष्टांत बहुत प्रचलित है कि सबरी ने राम और लक्ष्मण को जूठे बेर खिलाये थे । अब आइए जरा हम महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के अरण्ड्यकांड के इस श्लोक को पढ़ते है

मया तु विविधं वन्य संचितम पुरुषर्षभ ।
तवार्त्थे पुरुषव्याघ्र पम्पायास्तीरसम्भवं । ।

अर्थात –

यानि कि शबरी ने हे पुरू श्रेष्ठ कहकर दोनों भाइयों का अतीथि सत्कार किया  और जो फल फूल कन्द मूल वह पंपा सरोवर के पास के एक वन से तोड़कर लायी थी ओर उस से उसने श्रीराम ओर श्री लक्ष्मण का आतिथ्य किया । तो यहाँ पर तो काही भी कोई ऐसी बात नहीं आई की सबरी ने श्री राम को जूठे बेर खिलाये । रामायण से अंजान ओर धर्म से कोसो दूर रहने वाले कुछ व्यक्ति कहते हैं कि यह घटना उस वक़्त जाती प्रथा को खत्म करने के लिए अच्छा उदाहरण था, अरे भाई उस वक़्त जाती प्रथा थी ही नहीं तो खत्म क्या करना था जो जातियाँ हमने आज बना दी हैं वो तब थोड़ी न थी तभ भी वर्ण व्यवस्था थी ओर वर्ण व्यवस्था कर्म से होती है न की जन्म से । ओर आजकल के बिना दिमाग वाले इंसान जाती को जन्म से जोड़ देते हैं जो बिलकुल गलत है जन्म से कभी कोई महान नहीं होता है कर्म से होता है । खैर आगे बढ़ते हैं

रामसेतु के पत्थर तैरते हैं –

अक्सर आज भी कुछ लोग यह कहते हैं कि रामसेतु के पत्थर तैरते हैं रामसेतु 2 km चौड़ा ओर 48 Km लंबा समुद्री मार्ग है जो भारत ओर श्री लंका को जोड़ता है ओर इस सेतु का निर्माण त्रेता युग में भगवान राम के द्वारा लंका जाने के लिए किया गया था । जिसके अंश आज भी आप जाकर स्पष्ट रूप से देख सकते हैं वह परत दर परत बना हुआ है। तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस में भी बहुत सारी मिलावट की गयी है, लेकिन आप सच जानना चाहते हैं तो आपको वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण पढ़नी चाहिए । खैर अपने विषय पर आते हैं । रामसेतु के पत्थर तैरते हैं यह मिलावट कहा से आई ओर किसने की इसका तो पता नहीं लेकिन मिलावट करने वाले लोगो ने ही हिन्दू धर्म से लोगों को भटकाया है । अब आप महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण का श्लोक पढ़िये ओर समझिए।

हस्तिमात्रान महाकाया: पाषणाश्च  महाबला ।
पर्वताश्च समुत्पाट्य यंत्रै:  परिवहन्ति च । । 

इसमें कहा गया है कि उन महाकाया यानि विशाल ओर महाबली हस्तियो ने बड़े बड़े पत्थर और पर्वतो को तोड़कर यंत्रो कि सहायता से समुद्र के तट पर लाना शुरू कर दिया था । तो यहा तो कोई ऐसी बात नहीं आती कि पत्थरो पर राम नाम लिख कर समुद्र मे डाला और वह तैरने लग गए । तो आज से आप भी सावधान रहें और गलत फहमी न फैलाएँ ।

तो दोस्तो ये थे रामायण के 5 महाझूट जिनको आप सच समझते हैं । इसके अलावा और भी झूठी कहानियाँ लोगों के द्वारा फैलाई जाती हैं । समय समय पर उनका भी पर्दाफाश किया जाएगा। लेकीन जो मेरे पढे लिखे भाई बहन हैं उनसे मेरा निवेदन है की कृपया किसी भी बात को मानने से पहले उसकी अवलोकन अध्ययन अच्छी तरह से जरूर कर लें। क्योंकि पहले मैं भी बहुत सी ऐसी बातों को सुनकर सोचने पर विवश हो जाता था की क्या यह सत्य है ? हिन्दू धर्म सत्य सनातन है जो एकमात्र ऐसा धर्म है जो इंसानियत का पाठ पढ़ता है ।

। । हरी ॐ तत्सत । । 

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