प्रथम विश्व युद्ध की पूरी कहानी || 1st world war in hindi

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पहले विश्व युद्ध को The Great War भी कहा जाता है क्योंकि जब यह युद्ध हुआ उस से पहले इतना बड़ा युद्ध कभी नहीं हुआ तह इस से लगभग पुरे देश प्रभावित थे करोडो लोग मरे और अरबो का नुक्सान हुआ तब यह भी पता नहीं था की द्वितीय युद्ध होगा इसलिए पहले विश्व युद्ध को ऐसे नाम देने का कोई मतलब ही नहीं था इसलिए उसको The great war रखा गया जा दूसरा विश्व युद्ध हुआ तब इसको प्रथम विश्व युद्ध या 1st world war रखा गया,

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प्रथम विश्व युद्ध का  कारण 


28 जून 1914 को रविवार के दिन ऑस्ट्रिया हुग्नरी के राजकुमार franz fardinand और उनकी पत्नी आस्ट्रिया हंगरी के एक शहर Sarajevo के लिए एक प्रोग्राम देखने रवाना हुए जो उनका अपना ही जीता हुआ था और खुद के साम्राज्य में था लेकिन फिर भी उनके गुप्तचरों ने उनको उस शहर जाने की चेतावनी दी थी,

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लेकिन सवाल यह उठता है कि उनके गुप्तचरों ने उनके ही जीते हुए राज्य की मुलाकात लेने से क्यों रोका, तो बात साफ़ है कि ऑस्ट्रिया हंगरी के राजा franz joseph जब 1908 में जब Bosni Herecebovina देश को जीत लिया तो अब Bosni Herecebovina देश का अपना अस्तित्व मिट गया था, यह पूरा का पूरा देश अब किसी का गुलाम था इस बात से नाखुश वहां के   कई लोग क्रन्तिकारी भी बन चुके थे जिसका    नाम था ब्लैक हैण्ड , ये क्रन्तिकारी franz joseph  के सामने आमने सामने की लड़ाई  तो नहीं लड़ सकते थे लेकिन वो किसी बड़ी क्योंकि franz joseph की सत्ता को ललकारने की उनमें हिम्मत नहीं थी, लेकिन वो क्रन्तिकारी किसी बड़ी तख़्त में थे और राजकुमार के इस   शहर में जाना उनके लिए एक बड़ी तख़्त थी,तो इस प्रकार franz farndinand का इस शहर जाना    क्रांतिकारियों से खतरा था ,  जब राजकुमार   को या सुचना दी गयी की अपका   वहां जाना खतरे से खली नहीं लेकिन उन्होंने अपने गुप्त चरो की बात को यह टाल दिया की हमें कुछ नहीं होगा हमें इश्वर पर भरोसा करना चाहिए,

दरअसल आगे भी तीन बारराजकुमार को मरने के विफल प्रयास हो चुके थे लेकिन उनका बचा लिया गया था , यदि अपने गुप्तचरों की बात को मान कर राजकुमार इस शहर जा जाते तो शायद जैसी दुनिया हम आज देख रहे हैं वैसे नहीं होती तो इस तरह राजकुमार अपनी पत्नी को लेकिअर sarajevo शहर पहुँच गए और यहाँ इन्का भव्य स्वागत किया गया और इनके लिए स्पेशल 6 कारे मंगवाई गयी थी इनके लिए खुले छत की कार भी मंगवाई गयी थी रोड पर बहुत सारे लोग इन दोनों दंपतियो को देखने थे और इस भीड़ में वो क्रांतिकारी भी शामिल थे जो आज राजकुमार का काम तमाम करने के लिए वहां   आये थे उनमे से एक क्रन्तिकारी ने अपनी जेब से बम निकला और खुली छत वाली राजकुमार की गाडी पर फेंक दिया लेकिन राजकुमार की किस्मत ऐसी थी की इस बार भी बम गाड़ी के बोनट से टकराते हुए पीछे की और गिरा और बहुत बड़ा धमाका हुआ और फिर बम फेंकने वाले ने अपने जेब से cynide की गोली निकली और खा ली और उसके बाद वह पुल से नीचे गिर गया  लेकिन ज़हर धीमा साबित हुआ और नीचे ज्यादा पानी भी नहीं था इस लिए वो बच गया और उसको उसी वक़्त गिरफ्तार कर दिया गया,

राजकुमार ने घायल लोगो को हॉस्पिटल ले जाने के आदेश दिए और वे अपने टाउन हॉल के लिए अपने काफिले के साथ रवाना हुए वो जब टाउन हॉल पहुचे तो बहुत गुस्से में थे और उन्होंने वहन कोई प्रोग्राम नहीं देखा और हॉस्पिटल में घायल लोगो को देखने टाउन हॉल से उंसी काफिले के साथ हॉस्पिटल के लिए अपनी पति के साथ रवाना हुए , रास्ता वही तह और भीड़ वही थी जिनमे 6 शशस्त्र क्रन्तिकारी भी मौजूद थे उनमे से एक ने मौके का फायदा उठाते हुए अपनी जेब से पितौल निकली और एक के बाद एक फायरिंग शुरू कर दी जिनमे से एक राजकुमार के गले में लगी और एक राजकुमारी के पेट में , उनको बचने की सारी कोशिशे नाकाम रही और दोनों की मृत्यु हो गयी अब आगे इसका अंजाम भी कुछ बड़ा होने वाला था ,

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विश्व युद्ध को शुरू करने के लिए एक ओर वजह जिम्मेदार है और वह ये है की राजकुमार को मरने वाला 19 साल का नौजवान Gavrilo Princip मूल सर्विया का नागरिक था, और सर्विया ऑस्ट्रिया हंगरी का दुश्मन था , पर हैरानी की बात यह की यह सब होते हुए भी franz joseph काफी दिनों तक शांत रहे और इसको इश्वर द्वारा की गयी अनहोनी कहकर सब सह लिया लेकिन franz joseph के सेनापति की सर्विया पर नज़र थी    जो किसी भी तरह सर्वेया को ऑस्ट्रिया हंगरी साम्राज्य में मिलाना चाहता था और उसने ये सब करने के लिए franz joseph को राजकुमार का बदला लेने ले लिए और सर्विया को अपने साम्राज्य में मिलाने के लिए  उकसाया,

23  जुलाई 1914 राजकुमार की हत्या के ठीक 25 दिन बाद ऑस्ट्रिया हंगरी ने सर्विया को 10 प्रस्ताव का ultimatam भेजा जिसमें से सर्विया ने 8 बातो को   स्वीकार कर  लिया लेकिन 2 बातो के लिए क्षमा मांगी   क्योंकि वो बातो से उनका राजधर्म अपंग होता था ऑस्ट्रिया हंगरी को यहीं पर बात ख़त्म कर देनी चाहिए थी लेकिन उल्टा इसके ठीक तीन दिन बाद ऑस्ट्रिया हंगरी ने सर्विया पर युद्ध की घोषणा कर दी,

28 जुलाई 1914 को ऑस्ट्रिया हंगरी ने सर्विया की उत्तर पश्चिम सीमा पर गोले बरसा दिए और इसने विश्व युद्ध को मोड़ दे दिया,

2 अगस्त 1914 को जर्मनी ने फ्रांस को सुचना दे दी कि आप डिक्लेअर करो की आप किसके साथ हो तब फ्रांस ने यह जवाब दिया की अगर युद्ध हो उस परिस्थिति में फ्रांस खुद का निर्णय खुद करेगा, जर्नमी के सम्राट केजर ने सोचा की अगर फ्रांस भी हमारे साथ युद्ध करे तो पूर्व में रूस के साथ और पछिम में फ्रांस के साथ दो मोर्चो पर युद्ध करना उसके लिए मुश्किल था इस लिए केजर ने फ्रांस का काम तमाम करना चाहा ,

लेकिन फ्रांस और जर्मन की सीमा पर फ्रांस के फौजी तैनात थे अब जर्मनी के शाशक केजर को यह समझ नहीं आया की सेना को फ्रांस में कैसे इंटर किया जाये तो उसने फ्रांस और जर्मनी के बीच बसे एक छोटे से देश बेल्जियम के राजा को सूचित किया की आप अपने देश से हमरे फौजिओ को फ्रांस में घुसने की इजाजत दीजिये लेकिन बेल्जियम के राजा ने इनकार कर दिया जर्मन के दर से बेल्जियम के राजा ने ग्रेट ब्रिटेन से सहायता मागी क्योंकि इंन दोनों देशो का पहले करार हो चूका था की अगर बेज्लियम को किसी देश से खतरा हो तो ब्रिटेन उसकी सहायता करेगा और 4 अगस्त 1914 को बेज्लियम सेना के विरोध करने पर भी जर्मन की सेना बेल्जियम में घुस गयी उसी दिन संधि के कारण ब्रिटेन ने भी जर्मन के साथ युद्ध की घोषणा कर दी,

प्रथम विश्व युद्ध में भारत 


ब्रिटेन की इस घोषणा के बाद जहाँ जहाँ पर ब्रिटिश राज्य था जैसे की भारत, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका, इजिप्ट, कैनेडा, जिनमे सबसे बड़ा सैन्य था भारत देश का, जहाँ से भारत के 850000 हज़ार सैनिको को जहाज में युद्ध लड़ने के लिए ग्रेट ब्रिटेन भेजा गया था

4 अगस्त के दिन जब यूरोप ने युद्ध की घोषणा की तो एक के बाद एक देश युद्ध में कूद गए और एक ही महीने में 9 देशो ने एक दुसरे के साथ युद्ध का बिगुल बजा लिया और यदि ब्रिटेन राज्य के भारत न्यूजीलैंड ऑस्ट्रेलिया जैसे देश गिने जाये तो कुल 28 देश युद्ध में कूद पड़े जिनमे से गौर करने वाला देश था अमेरिका,जिसको यूरोपियन देशो से कुछ लेना देना नहीं था, लेकिन कुछ विचित्र कारन बने जिस से अमेरिका भी युद्ध में कूद गया, फिर सम्राट केजर ने अपने देश की सबमरीन को अतलांटिक महासागर में काम पर लगा दिया और यह सबमरीन वहाँ आने जाएं वाली सभी जहाजो को टारगेट बनाने लगी , सिर्फ इतना ही नहीं उसने जर्मन पेसेंजेर जहाजो को भी नहीं छोड़ा

7 मई 1915 के दिन घटी घटना ने अमेरिका को युद्ध में कूदने के लिए मजबूर कर दिया क्योंकि जर्मन सबमरीन ने ब्रिटेन पेसेंजर जहाज को नस्ट कर दिया जिसमें 1198 लोग मरे गए जिस में 128 अमेरिका के नागरिक थे,और इस तरह धरती के सभी देश आपस में लड़ने लग गए आखिर कार यह युद्ध   11 नवम्बर 1918  को ख़त्म हुआ ,

द्वितीय विश्व युद्ध के बारे में  

6 thoughts on “प्रथम विश्व युद्ध की पूरी कहानी || 1st world war in hindi”

  1. लखन कुमार भील चछ्लाव सुनेल झालवाड़ राजस्थान says:

    द बेस्ट वैरी मोस्ट वर्ल्ड हिस्ट्री

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