NPR क्या है ?

NPR क्या है?

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर प्रक्रिया के दौरान कोई दस्तावेज या बॉयोमीट्रिक्स नहीं लिया जाएगा। विवादास्पद एनपीआर के संबंध में मंगलवार को लिए गए कैबिनेट के फैसले की घोषणा करते हुए, मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि आगामी एनपीआर यूपीए सरकार द्वारा 2010 में किए गए से अलग नहीं था। फरवरी 2021 से शुरू होने वाली जनगणना से पहले अप्रैल और सितंबर 2020 के बीच एनपीआर को अपडेट करने की प्रक्रिया आयोजित की जाएगी। प्रकाश जावड़ेकर ने मीडिया को बताया कि सरकार ने एनपीआर और जनगणना के लिए 13,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। जनगणना के लिए 8,754 करोड़ रुपये और एनपीआर के लिए 3941 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि सभी राज्य पहले ही एनपीआर करना स्वीकार कर चुके हैं और उनके अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। जावड़ेकर ने आश्वासन दिया कि एनपीआर की प्रक्रिया के दौरान कोई दस्तावेज या बायोमेट्रिक नहीं लिया जाएगा। “जो भी लोग कहेंगे वह स्वीकार किया जाएगा,” उन्होंने मंगलवार को नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा। आइये जानते हैं कि NPR क्या है ?

NPR क्या है?

NPR क्या है?

NPR की फुल फॉर्म है National Population Register यानी राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर  यह एक ऐसा सरकारी दस्तावेज है जिसमें दर्ज निवासियों की लिस्ट से ये पता चलता है कि ये आदमी एक खास एरिया में कम से कम पिछले छह महीने से रह रहा है या कम से कम अगले छह महीने और रहने की मंशा रखता है। इसमें भारत के निवासियों की गांव से तहसील, तहसील से जिला और जिला से राज्य और राज्य से देश स्तर तक की लिस्ट होती है।

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर एनपीआर में नाम लिखाने के लिए क्या करना होगा, क्या दस्तावेज देना होगा

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में नाम दर्ज करवाने के लिए जनगणना अधिकारियों के सवालों के जवाब देने होंगे. इसमें किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं है। लोग जो जवाब देंगे उसे ही अधिकारी दर्ज करेंगे और उसी के अधार पर रजिस्टर में सूचना दर्ज करेंगे. जनगणना अधिकारी आपका नाम, आपके माता-पिता का नाम, पत्नी, बच्चा समेत आपके परिवार के सदस्यों के नाम, जन्मदिन, राष्ट्रीयता, वर्तमान पता, स्थायी पता, रोजगार और शैक्षणिक योग्यता वगैरह पूछकर एक फॉर्म में दर्ज करेंगे लेकिन किसी भी जवाब के लिए प्रूफ में कोई दस्तावेज नहीं मांगेंगे। जनगणना में बायोमेट्रिक डेटा आधार के जरिए दिया जा सकता है और अगर आधार नंबर ना हो तो उसे आधार कार्ड लेने की प्रक्रिया के तहत हासिल किया जा सकता है. ये सारे काम 1 अप्रैल, 2020 से शुरू होगा।

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर एनपीआर कैसे तैयार होता है

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के लिए लोगों के द्वारा दी गई जानकारी की पुष्टि करने के लिए राज्य सरकार स्थानीय स्तर पर रजिस्ट्रार नियुक्त करेगी. भारतीय नागरिक कौन है इसका नियम स्पष्ट है। उस नियम के मुताबिक अगर किसी की नागरिकता संदिग्ध लगती है तो उसे रजिस्ट्रार नोटिस जारी करेगा। रजिस्ट्रार उसके जवाब के आधार पर फैसला लेगा कि उसे एनपीआर में शामिल किया जाए या नहीं. फिर हर इलाके के लोगों का एनपीआर का मसौदा प्रकाशित करके लोगों से आपत्तियां मांगी जाएंगी। रजिस्ट्रार आई आपत्तियों पर विचार करके फैसला लेगा और फिर रजिस्टर को अपडेट करेगा। रजिस्ट्रार फिर अपनी लिस्ट जिला रजिस्ट्रार को सौंप देगा और रजिस्ट्रार ने जिनके दावे खारिज कर दिए वो जिला रजिस्ट्रार के पास अपील कर सकते हैं।  जिला रजिस्ट्रार अगर किसी की अपील मान लेता है तो उसे रजिस्टर में डाल दिया जाएगा और फिर वो रजिस्टर राज्य स्तर पर भेज देगा जो वहां से राष्ट्रीय रजिस्टर का हिस्सा बन जाएगा।

किसी का नाम एनपीआर में छूट जाए तो क्या होगा 

नेशनल जनसंख्या रजिस्टर देश की आबादी का रजिस्टर है इसलिए उसमें हरेक निवासी का नाम होगा। अगर किसी का नाम छूट गया है तो वो अनुमंडल स्तर के रजिस्ट्रार के पास आवेदन कर सकता है जो लोकल रजिस्ट्रार से एक लेवल ऊपर का अधिकारी है।

एनपीआर का एनआरसी से क्या संबंध है 

जब राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का काम पूरा हो जाएगा तो जनगणना आयुक्त लोकल रजिस्ट्रार को नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स यानी एनआरसी तैयार करने को कहेगा. रजिस्ट्रार उन लोगों से सूचना मांगेगा जिनके नाम के आगे एनपीआर में कुछ रिमार्क्स दर्ज होंगे। इनको रजिस्ट्रार द्वारा मांगे गए दस्तावेज देने होंगे. जनगणना आयोग एनआरसी से उनके नाम हटा देगा जो नागरिक नहीं हैं. गैर नागरिक घोषित आदमी जनगणना आयुक्त के फैसले के खिलाफ 30 दिन के अंदर निर्धारित अथॉरिटी के पास अपील कर सकता है।

एनपीआर और एनआरसी में क्या अंतर है

एनआरसी  2011 की जनगणना में एनपीआर का एक हिस्सा था. एनआरसी की तरह एनपीआर देश की नागरिकता की सूची नहीं है क्योंकि एनपीआर में वो विदेशी भी दर्ज होते हैं जो एक जगह पर छह महीने से ज्यादा से रह रहे हों। एनआरसी के जरिए नागरिकता तय होती है और उसका एक यूनिक नंबर होता है जबकि एनपीआर में ऐसा नहीं होता।

क्या राज्य सरकारों की भागीदारी के बिना एनपीआर का काम हो सकता है

नियमों की बात करें तो राज्यों के बिना एनपीआर पूरा करना केंद्र सरकार के लिए मुश्किल होगा। एनपीआर नियमों के तहत लोकल, अनुमंडल, जिला रजिस्ट्रार और अपील अधिकारियों की नियुक्ति राज्य सरकार को करनी है। नियमों के तहत नगर निकाय और ग्रामीण निकाय की भी भागीदारी होती है। केंद्र सरकार चाहे तो स्वतंत्र एजेंसी से जनसंख्या डेटा जमा करवा सकती है लेकिन उसकी आधिकारिक पुष्टि के लिए भी राज्य सरकार के अधिकारियों की जरूरत होगी।

तो उम्मीद है की आपको इस आर्टिकल से यह जानने को मिल आया होगा की NPR क्या है ?

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