NASA वापस चाँद पर क्यों नहीं गया

NASA वापस चाँद पर क्यों नहीं गया

20 जुलाई 1969 यह वह  तारिख थी जब पहली बार किसी इंसान ने चाँद पर कदम रखा भारतीय समय के अनुसार करीब 1:47 पर अमेरिका के अस्ट्रॉनॉट नील आर्मस्ट्रांग ने नासा के अपोलो 11 मिशन से चाँद पर पहला कदम रखा था यह इंसान इतिहास का एक अनोखा पल था क्योंकि उस दिन हमने जो अचीव किया था एक समय में उसकी कल्पना करना भी हमारे लिए कठिन था। आपको बता दें की आजतक केवल 12 इंसानो न चाँद पर कदम रखा है और वो सभी एस्ट्रोनॉट्स अमेरिकन्स ही थे।

14 दिसंबर 1972 को यानी कि आज से करीब 48 साल पहले अमेरिका के Eugene Andrew cerenan ने आखिरी बार चाँद पर कदम रखा और उसके बाद दुनिया के किसी  देश ने चाँद पर इंसानो को नहीं भेजा। 1969 से लेकर 1972 तक कुल 12 लोगो को चाँद पर भेजा गया लेकिन इसके बाद के 48 सालों में एक भी इंसान को चाँद पर नहीं भेजा गया !  आखिर ऐसा क्यों क्या अब स्पेस साइंटिस्ट को चाँद पर जाने से डर लगता है या  उनका इंटेरेस ही खत्म हो गया ? या फिर नासा को वहां कुछ ऐसा दिख गया था जिस से वह डर गया है आखिर इंसान के चाँद पर वापस नहीं जाने की क्या वजह है ? और क्या हम कभी भविष्य में चाँद पर जाएंगे ?ऐसे ही कई सवाल कई  बार आपके मन में भी  आते होंगे तो आज के इस आर्टिकल में हम आपके हर सवाल का जबाब देने  वाले हैं।

NASA वापस चाँद पर क्यों नहीं गया

जब हम पृथ्वी के बाहर किसी प्लेनेट या  चाँद पर जाने की सोचते हैं तो सबसे  पहला सवाल यही उठता है कि क्या हम इंसानो के पास इतनी टेक्नोलॉजी है की हम वहां जा सके। तो अगर हम चाँद की बात करे तो नासा पहले ही 6 मून मिशन कर चूका है और एक भी मिशन में कोई हादसा भी नहीं हुआ है तो फिर नासा ने पिछले 48 सालो में ऐसा फिर क्यों नहीं किया ? आज दुनिया के अलग अलग देशो की बहुत सी स्पेस एजेंसी स्पेस एक्सप्लोरेशन में लगे हुए हैं और उनके बीच में हर चीज को लेकर जबरदस्त कॉम्पिटिशन भी बना रहता है तो फिर उन्होंने कभी चाँद पर इंसानो को भेजने की कोशिश क्यों नहीं की। तो इसको समझने के लिए हमें दुनिया के सभी मैं स्पेस एजेंसी और उनकी मजबूरियों को अलग अलग समझना होगा।

तो चलिए फिर सबसे पहले बात करते हैं अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASA की जो अभी तक एकमात्र ऐसी स्पेस एजेंसी है जो चाँद पर इंसानो को भेजने में कामयागब हुआ है यहाँ आपको एक बात क्लियर करते  चले की नासा ने चाँद पर ऐसा कुछ भी खोज नहीं किया था जो आज उन्हें वहां फिर से जाने से रोक रहा हो दरअसल उनके वहां न जाने के पीछे कुछ कारण हैं जिसमे से सबसे पहला कारण है बजट अब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा की अमेरिका जैसे देश और नासा जैसी स्पेस एजेंसी को बजट की प्रॉब्लम भला कैसे हो सकती है ? हैना ! तो चलो इस बात को हम मानते हैं की नासा का एनुअल बजट $2200 करोड़ से भी ज्यादा है लेकिन यहाँ एक  बात यह भी है नासा स्पेस में जितने डीप रिसर्च कर रही है उसकी  तुलना में यह बजट कुछ भी नहीं है। अपोलो प्रोग्राम के दौरान नासा ने जो भी मून मिशन भेजे थे उनकी टोटल कॉस्ट $2500 करोड़ थी जो आज की करेंसी रेट के हिसाब से $20000 करोड़ से भी ज्यादा होते है।

1960 से 1973 के बीच नासा का बजट अमेरिका की इकॉनमी का 4% था लेकिन आज यह सिर्फ 0.5% ही रह गया है। जाहिर सी बात है की अब अमेरिका ह्यूमन मून मिशन पर इतना खर्च नहीं करना चाहता।  अमेरिका का मून एक्सप्लोरेशन मिशन पूरी तरह उस समय के अमेरिकी राष्ट्रपति John F. Kennedy की बात पर टिका हुआ था जिसमे वो अमेरिका के World Wide Respect को फिर से रिस्टोर करना चाहते थे और रूस को पीछे करना चाहते थे जो आज की तारिख में अमेरिका अचीव कर चुका है। हाल ही में अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यह कहा था की अमेरिका 2024 तक एक बार फिर से चाँद पर जायेगा। और इसलिए उन्होंने नासा के बजट में $100 करोड़  बढ़ने की पेशकश भी की थी लेकिन यह अभी तक हो    नहीं पाया है। क्योंकि हर एक देश के इंटरनल पोलिटिक्स होती है जो ऐसे कामो को आगे बढ़ने से रोकती है वहीँ रूलिंग पार्टी की रिस्क भी होती है की अगर वह किसी प्रोग्राम को शुरू करते हैं और वो सफल नहीं हुआ या फिर उसके दौरान किसी एस्ट्रोनॉट की मौत हो गयी तो उनकी पार्टी की इज़्ज़त पर भी चोट लगेगी। वैसे अमेरिका की कुछ प्राइवेट रिसर्च ऑर्गनिज़शन जैसे की Space x, USSF भी ह्यूमन को चाँद पर भेजने की टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं और ऐसा लगता है की वो जल्द ही इस काम को पूरा करेंगे, और फिर से इंसानो को चाँद की सतह पर पहुचा ही देंगे।

चलिए अब बात करते  Roscosmos की यानी रूस की स्पेस एजेंसी की।  यह बात तो हम सभी जानते हैं कि रूस यानि की उस समय की सोवियत यूनियन  का लूनर 2 स्पेस क्राफ्ट चाँद  की सतह पर पहुँचने वाला पहला स्पेस क्राफ्ट था।  लेकिन रूस ने कभी भी इंसान को चाँद पर भेजने की कोशिश नहीं की, कम से कम दुनिया को  दिखाकर तो कभी नहीं की।  रूस की सरकार ने दुनिया के सामने अमेरिका से  कॉम्पिटिशन करने से तो इंकार कर दिया था। लेकिन ऐसा माना जाता है उन्होंने बिना किसी को बताये इंसानो को चाँद पर भेजने के लिए कई मिशन बनाये थे और उनके लिए स्पेस क्राफ्ट भी तैयार किया गया था लेकिन वह कभी कामयाब नहीं हो सके और बाद में सोवियत यूनियन के टूटने से रूस की सरकार की फाइनेंसियल कंडीशन भी इतनी अच्छी नहीं थी कि वह ऐसा कुछ करने की सोचे,  इसलिए उन्होंने चाँद पर जाने का सपना ही छोड़ दिया साल 2012 में यह खबर सामने आयी की रूस 2020 तक चाँद पर इंसानो को भेजने की सोच रहा है। और वो चाँद के orbit में एक space station भी डेवेलोप करना चाहता है लेकिन  इसके लिए उन्हें कम से कम $10000 करोड़ बजट की  जरुरत होगी  जिसका इंतजाम करना बेहद कठिन है।

अब बात करते हैं ESA यानी European Space Agency की। हाल ही में आयी रिपोर्ट्स के अनुसार यह एजेंसी 2030 तक चाँद पर एक छोटी सी बस्ती बसना चाहती है और फिर वह Permanently इंसानो को बसाना चाहती है लेकिन असलियत तो यह  है कि अभी तक यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने चाँद पर एक unmanned space craft भी successfully नहीं भेजा है। और ऐसे में वह इतना बड़ा टारगेट अचीव कर लेंगे यह नामुमकिन लगता है।  दोस्तों हाल कुछ सालों में चीन ने भी Space Exploration की filed  में काफी कुछ अचीव किया है आपको बता दे की चीन स्पेस में अपना एक Chinese Space Station भी बना  रहा है  जिसके 2020 तक पूरा होने की आशंका जताई जा रही है।

1 मार्च 2009 को चीन ने अपने स्पेस क्राफ्ट Chang’ e 1 को चाँद की सतह पर successfully लैंड किया था और इसके बाद भी तीन successful मून मिशन कर चुके हैं इसे देखकर ऐसा लगता है की चीन चाँद पर इंसानो को भेजने की रेस में दूसरे नंबर पर आने के लिये एक परफेक्ट कंडीडेट है। चीन के पास advance technology भी है और उनकी इकॉनमी भी ऐसे मिशन के  लिए स्टेबल है 2003 में चीन स्पेस में इंसानो को भेजने वाली तीसरी कंट्री भी बन चुकी है और पिछले एक दशक से यह बात खबरों में है कि चीन ऑस्ट्रोनौट्स को चाँद पर भेजने के लिए एक स्पेस क्राफ्ट बना रहा है 2016 में उसकी टेस्टिंग की खबरे भी आयी थी और 2019 में उसकी कुछ फोटो भी दुनिया के सामने आयी इसका अभी तक  कोई नाम नहीं रखा गया है लेकिन माना जा रहा है कि उसमे 6 एस्ट्रॉनॉट्स तक एक ही बार में चाँद पर जा सकेंगे और यह बहुत ही जायदा एडवांस होगा।  सुना तो यहाँ तक जा रहा है एस्ट्रोनॉट्स इसमें बैठकर  ही चाँद की सरफेस पर घूम सकेंगे जैसे की कोई कार चल रही हो, अगर ऐसा हो गया तो यह Human Space Exploration की दिशा और दशा सब बदल कर रख देगा वैसे अभी यह महज एक  न्यूज़ है और ऑफिशियली कुछ भी बात सामने नहीं रखी गयी है

इन देशो के अलावा भारत, जापान और इजरायल भी चाँद की तरफ अपने कदमो  को बढ़ा रहे हैं लेकिन अभी हम इतने एडवांस नहीं है की चाँद पर इंसानो को भेज सकें।

तो दोस्तों अब आप समझ ही गए होंगे की चाँद पर ना जाने के हर देश के अपने अपने कारण हैं। हाँ अगर चाँद पर कोई ऐसी धातु मिलती जो सोने या हीरे से भी महँगी होती तो  शायद तमाम स्पेस एजेंसी बाकि काम छोड़कर चाँद पर जाने की कोशिश करती रहती लेकिन अभी ऐसा कुछ भी नही मिला है इसलिए चाँद पर पहुँचने की कोई मारा मारी अभी नहीं है।

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