कल्पना चावला की पूरी जीवनी | Kalpana Chawla Biography In Hindi

कल्पना चावला की पूरी जीवनी | Kalpana Chawla Biography In Hindi

कल्पना चावला की पूरी जीवनी | Kalpana Chawla Biography In Hindi

पूरा नाम –कल्पना जीन पियरे हैरिसन (शादी से पहले – कल्पना बनारसी लाल चावला )
जन्म –17 मार्च 1962
शहीद –1 फरवरी 2003,  (स्पेस शटल कोलम्बिया दुर्घटना )
स्थान  –करनाल, हरियाणा, भारत
पिता  –बनारसी लाल चावला
माता –संज्योति चावला
पति –जीन पियरे हैरिसन

कल्पना चावला की पूरी जीवनी


यह कहानी है उस कल्पना की जिसकी परवाज थी सितारों से आगे की जो अब बस एक याद बनके रह गई हैं। भारतीय  Remote Sensing satellites के एक नाम में स्कूली छात्रो के मन में एक छात्रवृत्ति के रूप में और नासा के Momorial शब्दों में।

कल्पना चावला का जन्म 17 मार्च 1962 को भारत के एक छोटे से शहर करनाल में हुआ था जो पहले पंजाब में और अब हरियाणा में स्थित है। उनके पिता का नाम बनारसी लाल चावला तथा माता का नाम संज्योति चावला था बचपन में उनका लाडला नाम monto था। कल्पना जिसके नाम का अर्थ ही imagination है। अपने नाम के अनुरूप  वे एक अत्यंत कल्पनाशील बलिका थीं। वो अक्सर कल्पना करती आकाश की उसकी अनंत ऊँचाइयों की करनाल उन चंद शहरो में से एक था। जहाँ तब  aviation club था जहां छोटे छोटे पुष्पक उड़ते देख कल्पना को भी उनमे सैर करने का मन करता था। एक दिन उनके  पिता उन्हें एविएशन क्लब ले गए। और वहां आखिर एक दिन कल्पना के पिताजी ने एक पुष्पक विमान में छोटी कल्पना और उसके भाई को उड़ान भरने का अनुभव करा ही दिया।

उनकी प्राथमिक शिक्षा करनाल के ही टैगोर बाल निकेतन सीनियर सेकंडरी से हुई। सन 1976 में अच्छे नम्बरों से पास करने के बाद वो engineering की शिक्षा के लिए चंडीगढ़ चली गयी। वहाँ सन 1982 में Punjab engineering collage से Aeronautical Engineering में स्नातक यानी B.tech की डिग्री प्राप्त की और उसके बाद वो High Education के लिए अमेरिका चली गयीं । वहाँ Texas university से स्नात्तकोतर (Ms) और Colorado university से Aerospace Engineering में Ph.D की उपाधि प्राप्त की।

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दिसंबर सन्न 1994 में वो नासा (National Aeronautics and Space Administration) में astronaut training के लिए चुनी गयीं। और फिर अगले साल मार्च में NASA के Johnson space center में astronaut के 15 वें ग्रुप में उन्होंने प्रशिक्षण लिया।

16 जनवरी को अंतरिक्ष में भेजा गया space shuttle Columbia STS 107  अपनी 16 दिन की अंतरिक्ष यात्रा पूरी करके फ्लोरिडा में Kennedy Space Center पर उतरने वाला था। आगे बढ़ने से पहले मैं आपको बता दूँ की यह कल्पना की पहली अंतरिक्ष यात्रा नहीं थी। इस से पहले सन 1997 में Columbia STS 87 में अंतरिक्ष यात्रा करने वाले 6 सदस्यों में कल्पना चावला शामिल थी। 19 November से 5 December तक वो अंतरिक्ष में रहीं और उन्होंने 6500000 मील की दूरी अंतरिक्ष में तय की और इस तरह उन्हें प्रथम भारतीय अंतरिक्ष यात्री होने का गौरव प्राप्त हुआ।

Columbia STS 87 के बाद जब दुबारा space shuttle Columbia STS 107 अंतरिक्ष अभियान के लिए चुना गया तो आमंत्रण पाकर वो ख़ुशी और उत्साह से उछल पड़ी। और फिर से एक बार अंतरिक्ष की यात्रा करने के लिए तैयार हो गयी इस अंतरिक्ष मिशन में 7 सदस्य थे जिनका संक्षिप्त परिचय है।

Columbia STS 107 में अन्तरिक्ष यात्रा करने वाले 7 सदस्य –

  • Rick Husband – जो इस मिशन के इंजिनियर कमांडर थे।
  • William C. McCool – इस मिशन के payload pilot थे।
  • David M. Brown – मिशन स्पेशलिस्ट  और flight surgeon थे।
  • Kalpana Chawla – भारतीय मूल की Dr. कल्पना चावला जिन्हें उनके सहकर्मी K.C कहकर पुकारते थे जो एक mission specialist, aerospace engineer अपनी दूसरी उड़ान पर थी।
  • Laurel Clark –  मिशन स्पेशलिस्ट  और flight surgeon कल्पना की महिला साथी थी।
  • Michael P. Anderson – वैज्ञानिक payload pilot थे।
  • Ilan Ramon – बचपन से हवाई जहाज उड़ाने के शौक़ीन और इजराइल के प्रथम astronaut थे।

16 जनवरी 2003 को 7 crew मेम्बर के साथ space shuttle Columbia STS 107 ने कैनेडी स्पेस सेण्टर से अपनी उड़ान भरी और सफलता  पूर्वक अंतरिक्ष की और रवाना हुआ, सभी scientist अपने अपने प्रयोगों में जुटे हुए थे।

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करनाल से हजारो मील दूर अमेरिका और अब अंतरिक्ष से कल्पना चावला अपनी धरती और अपने देश को वो देख सकती थी। आत्मविभोर होकर उन्होंने अपने crew साथियों को वहाँ बुलाया और सबको वो विहंगम दृश्य दिखाया।

कल्पना चावला Death –


1 जनवरी 2003 को space shuttle का 16वां  दिन था। और वह धरती पर उतरने वाला था लेकिन किसी को पता नहीं था कि आगे क्या अनहोनी होने वाली थी। 40 सेकंड के बाद radio monitor पर वो हुआ जो कोई देखना नहीं चाहता था। धरती से मात्र 63 किलोमीटर परन्तु बहुत तेज 20,000 Km/hr की रफ़्तार से आ रहे Columbia STS 107 space shuttle से नारंगी रंग का गोला उभरा। धरती पर उतरने में सिर्फ 16 मिनट रह गए थे और shuttle जलते हुए सफ़ेद धुएं की लकीर में बदल गया। mission commander के टेलीमीटर पर मिलने वाले आखिरी शब्द थे …rojar aah bu.. .  .  but । कुछ पल में ही सब कुछ बिखर गया। NASA के Flight director से लेकर सारा विश्व जिसने भी सुना चाहे वह विज्ञान से सम्बन्ध रखता था या नहीं सहम गया। कोलम्बिया अंतरिक्ष यान के बिखरने के बाद अंतरिक्ष दीवानी अंतरिक्ष में ही सितारों में खो गयी हमेशा के लिए, मगर विज्ञान में उनके इस अदम्य योगदान को दुनियां हमेशा याद रखेगी ।

अंतरिक्ष यात्रा पर जाने से पहले नेशनल पब्लिक रेडियो को दिए गए pre flight interview में उन्होंने विस्तार से अपने mission और mission के दौरान उनके और उनके साथियों के द्वारा किये जाने वाले प्रयोगों के बारे में स्कूली बच्चो और आम लोगो को बताया। इस विदेश में बसी भारतीय को उसका बचपन का स्कूल नहीं भूला ।

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भारत सरकार ने उनके अभूतपूर्व योगदान को देखते हुए ये घोषणा की कि ISRO भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान के मौसम सम्बन्धी अब जो भी उपग्रह space में भेजे जायेंगे उनके नाम कल्पना की स्मृति में कल्पना satellite होंगे।  तथा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष ने भारतीय स्चूली छात्रो को प्रोत्साहित करने के लिए  कल्पना चावला की स्मृति में छात्रवृति शुरू की है। जब जब इस छात्रवृति की घोषणा होगी तब तब छात्र कल्पना चावला के दिखाए गए रास्तो पर चलने के लिए प्रेरित होंगे ।

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