भगवान् साकार है या निराकार

भगवान् साकार है या निराकार

ईश्वर निराकार हैं और साकार रूप भी धारण करते हैं। हमारे वेद, पुराण और अनेकों संत, भक्तों के अनुभव हमें इस बात का प्रमाण देते हैं और कोई स्वयं भी इसका अनुभव कर सकता है।

(१) मूल रूप से ईश्वरी तत्व निराकार है और इसी ईश्वर से ये स्थूल विश्व भी उत्पन्न हुआ है। ये जगत ब्रह्म से ही व्याप्त है। हम इस स्थल जगत को देख सकते हैं। वैज्ञानिकों ने जब परमाणु का विभाजन किया तो न्यूट्रॉन, इलेक्ट्रॉन, प्रोटोन मिले और जब उसका विभाजन किया गया तो उसमें सतत गतिशिल एक तत्व मिला जिसे गॉड पार्टिकल या हिग बोसॉन नाम दिया गया है। इससे ये साबित होता है कि ये जगत भी ईश्वर का व्यक्त रूप है।

(२) मूल रूप से हम सभी ईश्वर के ही अंश है। आत्मा जो निराकार है लेकिन इस शरीर द्वारा साकार रूप में व्यक्त होता है लेकिन आत्मा शरीर नहीं है। इसी प्रकार ईश्वर भी निराकार है और अपनी इच्छा से शरीर भी धारण करते हैं लेकिन जो उन्हें शरीरधारी व्यक्ति मानते हैं वह भूल कर रहे हैं।

(३)प्राचीन भारतीय सनातन धर्म में ईश्वर की साकार और निराकार दोनों रूपों में पूजा होती है। इतना ही नहीं अनेकों ने ईश्वर का सगुण और निर्गुण दोनों रूपो में साक्षात्कार किया है।

(४)कुछ लोग मानते हैं कि ईश्वर कभी किसी साकार रूप में नहीं हो सकते ये लोग निश्वित ही भ्रम में जी रहे हैं। मीराबाई, तुलसीदास, सूरदास, तुकाराम, रामकृष्ण परमहंस आदि अनेक भक्तों ने ईश्वर का साकार रूप में दर्शन किया है।

(५)गीता में श्रीकृष्ण ने स्वयं कहाँ है कि जो लोग मुझे ये शरीरधारी मानते हैं ये भूल कर रहे हैं। उन्होंने अर्जुन को अपना विश्वरूप भी दिखाया जो सर्वव्यापी है। तत्वतः हमारा ‘स्वरूप’ भी ईश्वरी तत्व से भिन्न नहीं है।

(६)निराकार ईश्वर को हम देख नहीं सकते, उन्हें साकार रूप में देख सकते हैं। जब जब पृथ्वी पर धर्म की ग्लानि होती है तब ईश्वर साकार रूप में भी आते हैं जिसे अवतार कहते हैं। रामायण लिखने वाले वाल्मीकि ने श्रीराम के का साक्षात्कार किया था। वेद व्यास जी भी साक्षात्कारी थे।

Share post, share knowledge

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *