GDP क्या है और इसको कैसे कैलकुलेट किया जाता है।

GDP क्या है और इसको कैसे कैलकुलेट किया जाता है।

दोस्तों आपने GDP के बारे में कई बार सुना होगा और बहुत सारे लोगो ने नई और अख़बार में इसके बारे में पढ़ा होगा, जहाँ पर किसी भी देश के एकोनोमिक हेल्थ के बारे में GDP नंबर के माध्यम से बताया जाता है।  GDP की फुल फॉर्म Gross Domestic Product होती  है। तो आइये जानते हैं की GDP से आप क्या समझ समझ सकते हैं और इसको कैसे कैलकुलेट किया जाता है।

GDP क्या है और इसको कैसे कैलकुलेट किया जाता है।

GDP क्या है –

 GDP की सीधी और सरल परिभाषा दी जाये तो हम कह सकते हैं कि – देश में हर साल Produce होने वाले सारे Goods and services की जो कीमत होती है वह GDP होती है।

सारे गुड्स और सर्विस का अर्थ है जैसे – Smartphones, Car, Collage Study, खाद्य पदार्थ, स्टील, सॉफ्टवेयर, जितने भी बिज़नेस हैं इन सबकी वैल्यू को मिलकर बनती है GDP, और इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि इसमें सिर्फ उन्ही Goods and services को रखा जाता है जो उस देश में बने हों। जिस प्रोडक्ट या सर्विस को हमारे देश ने किसी अन्य देश से खरीदा हो तो उसको हम अपने देश की GDP में नहीं जोड़ेंगे उसकी जीडीपी उसी देश में कैलकुलेट होगी जिस देश का वह प्रोडक्ट है।

जीडीपी में वही सारे प्रोडक्ट शामिल किये जाते हैं जो कैलकुलेशन वाले साल में प्रोडूस हुए हों। उदाहरण के तौर पर मान लो की अगर किसी एक साल में एक कार को बनाया गया और 5 लाख में उसी साल में बेचीं गयी, तो यह 5 लाख रूपये उस साल की जीडीपी कैलकुलेशन में जोड़े जायेंगे।  लेकिन अगर यही कार अगले साल सेकंड हैंड के तौर पर बिकती है तो इसको जीडीपी में शामिल नहीं किया जायेगा। सीधे शब्दों में कहें तो 2nd हैंड प्रोडक्ट की वैल्यू जीडीपी में नहीं जोड़ी जाती है।

इसके अलावा जो प्रोडक्ट पूरी तरीके से तैयार जिनको Finished Goods भी कहते हैं, सिर्फ उन्ही को जीडीपी में शामिल किया जाता है, अगर कोई प्रोडक्ट अभी मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस में है तो उसकी कीमत जीडीपी में नहीं जोड़ी जाएगी।

GDP Calculation के तरीके – 

दोस्तों GDP calculation हम दो तरीकों से कर सकते हैं पहला Income Approach और दूसरा हैं Expedition Apporach.अब इनके बारे में विस्तार से बात करते हैं।

पहला तरीका –  Income Approach –

Income Approach  में इकॉनमी के सारे प्रोडक्शन फैक्टर से आने वाली इनकम  को  Include  किया जाता है।

ये चारो production Factors हैं

1-Labour → Wages (लेबर को तनख्वाह मिलती है )

2- Land → Rent  (जमीन से रेंट  मिलता है )

3-Capital → Interest- (कैपिटल पर इंटरेस्ट मिलता  है )

4-Management → Profit (और मैनेजमेंट प्रॉफिट कमाती है )

इन चारो इनकम को मिलकर देश की National Income बनती है और यही Net National Income को calculate करने का फार्मूला है। अगर हम Gross National Income calculation  करना चाहें। तो फिर हमको इसमें Depreciationऔर NFFI भी जोड़नी पड़ेगी।  NFFI के बारे में आपको बता दूँ। NFFI की फुल फॉर्म होती है Net foreign factor income ( इनकम इस देश से बाकी की देशो ने कमाई – इनकम देश ने बाकी देशो से कमाई ) यानि कि इनकम अप्रोच के अंतर्गत GDP calculate करने के लिए हमें  Net National Income में  Depreciation और  NFFI को जोड़ना होगा तो इस प्रकार इसका फार्मूला बनता है

GDP ( Factor Cost ) = Net National Income + Depreciation + NFFI

दूसरा तरीका – Expenditure Approach –

ये बात आप जानते हैं की पहले अप्रोच में हमने हमने Business Production Factors से आने वाली इनकम को ऐड किया। अब जो पैसा Goods and Services पर खर्च हो रहा है उस दृष्टिकोण से इसको देखेंगे। तो इस प्रकार GDP का फार्मूला होगा

GDP = Consumtion + Investment + Government Expenditure + Exports Import आइये इन पाँचो हम डिटेल में समझ लेते हैं कि इनका क्या मतलब होता है।

1-Consumtion – इसके अंतर्गत घर का सामान खरीदना, गैस  का बिल भरना, बिजली का बिल भरना आदि शामिल है।

2-Investment – इसके अंतर्गत जैसे घर खरीदना, जमीन खरीदना, शेयर खरीदना आदि।

3-Government Expenditure – इसके अंतर्गत जैसे Public Welfare खर्च, सड़क निर्माण, पुल निर्माण, आदि।

4-Exports – इसका मतलब तो आप जानते ही होंगे कि मान लीजिए कोई कार भारत में बनी और लन्दन में बेचीं गयी। इसी तरह से कोई भी प्रोडक्ट जिसको भारत में बनाया गया हो और विदेशो में बेचा गया हो।

5 – Import – इम्पोर्ट का मतलब है जैसे कोई प्रोडक्ट विदेश में बना और भारत में बेचा गया हो।

तो इस प्रकार GDP Calculation के लिए Income और Expedition Approach दोनों का उपयोग किया जाता है। और Calculation इस प्रकार की जाती है ताकि आपको दोनों Approaches से एक समान  GDP Approach Value मिले, इन दोनों अप्रोच से मिलने वाली जीडीपी नॉमिनल जीडीपी होती है।

Drawback of GDP numbers –

माना जीडीपी किसी भी देश का एक महत्वपूर्ण इकनोमिक इंडिकेटर होता है मगर इस जीडीपी गणना में भी कुछ कमियां होती है

१- जैसे कि अंडरग्राउंड एकनॉमी के ट्रांसक्शन्स कैलकुलेशन में नहीं लिए जाते। अंडरग्राउंड इकोनॉमी का अर्थ है जो भी रेकॉर्डेड मार्किट प्लेस के बाहर होने वाले ट्रांजेक्शन हैं। जैसे Cash या एक्सचेंज स्वरुप में जो किये जाते हैं। वो यहाँ पर रिकॉर्ड नहीं होते।

२- Non Market Production को जीडीपी में नहीं गिना जाता, इसका मतलब है कि मान लीजिये आप अपने खुद के परिवार के उद्देश्य से खेती करते हैं, या अपने एक दो गाय पाल रखी हैं, जिसका दूध का उपयोग सिर्फ आपका परिवार करता है  तो वो end product तो है किन्तु इसको जीडीपी में नहीं गिना जाता है।

३- Calculation Complexities और जीडीपी को कैलकुलेशन करने के कई तरीके अब जब जीडीपी as a concept इंट्रोड्यूस हुआ था तब इकॉनमी Manufacture Driven  हुआ करती थी मगर अब इकॉनमी service Driven  है तो यहाँ पर कैलकुलेशन काफी complex हो जाती है।  उदहारण के तौर पर Housing Service में, Banking service में , government services हो उसमे इत्यादि।

४- Change in quality को जीडीपी नम्बर मेजर नहीं कर सकता उदाहरण के तौर पर इस साल का मोबाइल फ़ोन पिछले साल के मोबाइल फ़ोन से महंगा होगा और Service में भी Better होगा अब ऐसे चेंज का statisticians पता नहीं लगा पाते और inflation over state होने की सम्भावना होती है।


अंतिम शब्द –

इन सारे ड्राबैक के बावजूद जीडीपी नंबर किस भी देश का एक महत्वपूर्ण Economic Indicator होता है, जिस से लोग ये अनुमान लगा पाते हैं की देश की आर्थिक स्थिति कैसी चल रही है। तो आशा करते हैं आपको इस आर्टिकल से GDP क्या है और इसको कैसे कैलकुलेट किया जाता है सीखने को मिला होगा इसी तरह के अन्य जानकारीपूर्ण आर्टिकल पढ़ने के लिए आप पढ़ते रहे  Hindish.com

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