डॉ भीमराव अम्बेडकर के अनमोल वचन | dr bhim rao ambedkar quotes in hindi

डॉ भीमराव अम्बेडकर के अनमोल वचन | dr bhim rao ambedkar quotes in hindi -

डॉ भीम राव अम्बेडकर जी को हम बाबासाहेब के नाम से भी जानते हैं छुआ-छूत का प्रभाव जब सारे देश में फैला हुआ था, उसी दौरान 14 अप्रैल, 1891 को बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का जन्म हुआ था। बचपन से ही बाबा साहेब ने छुआ-छूत की पीङा महसूस की थी। जाति के कारण उन्हें संस्कृत भाषा पढने से वंचित रहना पड़ा था।  उन्होंने संविधान को तैयार करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भीमराव अम्बेडकर भारत के प्रथम कानून मंत्री भी थे। देश के प्रति अतुलनीय सेवाओं के लिए वर्ष 1990 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 24 मई 1956 को बम्बई में बुद्ध जयंती के अवसर पर उन्होंने यह घोषणा की कि वह अक्टूबर में बौद्ध धर्म अपना लेंगे। 14 अक्टूबर 1956 को उन्होंने अपने कई अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म को गले लगा लिया। 6 दिसंबर 1956 को बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर परलोक सिधार गए। आइये पढ़ते हैं आज बाबासाहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर के अनमोल वचन | dr bhim rao ambedkar quotes in hindi

डॉ भीमराव अम्बेडकर के अनमोल वचन | dr bhim rao ambedkar quotes in hindi -

डॉ भीमराव अम्बेडकर के अनमोल वचन | dr bhim rao ambedkar quotes in hindi –


 मैं उस धर्म को पसंद करता हूँ, जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे की भावना सिखाता है ।
 ज़िन्दगी लम्बी नहीं बल्कि महान होनी चाहिए ।
  ईश्वर नश्वर है ठीक उसी प्रकार हमारे विचार भी नश्वर हैं विचारों को प्रचार प्रसार की जरुरत होती है, जैसे पौधे को पानी की अन्यथा दोनों मुरझा जाते हैं ।
 हिन्दू धर्म में विवेक, कारण और स्वतंत्रता के लिए कोई गुंजाईश नहीं है ।
 सबसे पहले और अंत तक हम एक भारतीय हैं ।
 जाती कोई ईंटो की दीवार नहीं है, या कोई काँटों का तार नहीं है, जो हिन्दुओ को आपस में मिलने से रोक सके जाती एक धरना है जो मन की एक अवस्था है ।

 

 जैसे पानी की बूँद समुद्र में मिलकर अपना अस्तित्वा खो देती है इसके विपरीत इंसान समाज में मिलकर अपना अस्तित्वा नहीं खोता इंसान का जीवन स्वतंत्र है वह समाज के विकास के लिए नहीं बल्कि अपने विकास के लिए पैदा हुआ है ।
 जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता को हासिल नहीं कर लेते कानून द्वारा दी गयी हर स्वतंत्रता आपके लिए बेमानी ही रहेगी ।
 बुद्धि का विकास ही मानव अस्तित्व का सबसे बड़ा लक्ष्य होना चाहिए ।
 मैं किसी समाज की उन्नति को महिलाओ की उन्नति से मापता हूँ ।
 पति और पत्नी में एक मित्रता का सम्बन्ध होना जरुरी है ।
 कानून राजनीती के शरीर व दवाइयां हैं, जब शरीर बीमार हो जाये तो दवाईयो को अपना काम करना चाहिए ।
 एक महान इंसान एक सुप्रसिद्ध इन्सान से इसलिए बेहतर है क्योंकि वह समाज का सेवक बनने को हमेशा तैयार रहता है।

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 मैं पूरी सत्यानिष्ट से आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मैं सिर्फ एक हिन्दू बनकर नहीं मरूँगा ।
 हमको अपने पैरो पर खड़ा होना है अपने अधिकार के लिए लड़ना है तो अपने ताकत और बल को पहचानो, क्योंकि शक्ति और प्रतिष्ठा संघर्ष से ही मिलती है ।
 अगर मुझे लगा कि संविधान का दुरूपयोग हो रहा है तो इसे सबसे पहले मैं ही जलाऊंगा ।
 इतिहास गवाह हैं कि जहाँ नैतिकता और अर्थशाश्त्र के बीच संघर्ष होता है वहां जीत हमेशा अर्थशाश्त्र की होती है। निहित स्वार्थों को तब तक स्वेच्छा से नहीं छोड़ा गया है जब तक कि मजबूर करने के लिए पर्याप्त बल ना लगाया गया हो।।
 धर्म और गुलामी असंगत है।
 मनुष्य एवम उसके धर्म को समाज के द्वारा  नैतिकता  के  आधार  पर चयन करना चाहिये |अगर  धर्म  को  ही मनुष्य के लिए सब कुछ मान लिया जायेगा तो किन्ही और मानको का कोई मूल्य नहीं रह जायेगा।
 जो व्यक्ति अपनी मौत को हमेशा याद रखता है वह सदा अच्छे कार्य में लगा रहता है।

 

 कुछ लोग सोचते हैं कि समाज के लिए धर्म की कोई आवश्यकता नहीं लेकिन मैं इस विचार को नहीं मानता क्योंकि जीवन के लिए धर्म की स्थापना होना बेहद जरुरी है ।
 रात रातभर मैं इसलिये जागता हूँ क्‍योंकि मेरा समाज सो रहा है।
 समानता एक कल्पना हो सकती हैलेकिन फिर भी इसे एक गवर्निंग सिद्धांत रूप में स्वीकार करना होगा।
 सामान्यतः कोई स्मृतिकार कभी ये बात नहीं बताता कि आपके सिद्धांत क्यों है और कैसे हैं ।
 लोग और उनके धर्मसामाजिक नैतिकता के आधार परसामाजिक मानकों द्वारा परखे जाने चाहिए। अगर धर्म को लोगों के भले के लिये आवश्यक वस्तु मान लिया जायेगा तो और किसी मानक का मतलब नहीं होगा।
 जो कौम अपना इतिहास नहीं जानतीवह कौम कभी भी इतिहास नहीं बना सकती।
 एक सफल क्रांति के लिए सिर्फ असंतोष का होना ही काफी नहीं हैबल्कि इसके लिए न्यायराजनीतिक और सामाजिक अधिकारों में गहरी आस्था का होना भी बहुत आवश्यक है।

डॉ भीमराव अम्बेडकर के अनमोल वचन –

जो अपना इतिहास भूल जाते हैं वे कभी इतिहास नहीं बना सकते  ।
 स्‍वतंत्रता का रहस्‍यसाहस है और साहस एक पार्टी में व्‍यक्तियों के संयोजन से पैदा होता है।
 यदि हम एक संयुक्त एकीकृत आधुनिक भारत चाहते हैंतो सभी धर्मों के धर्मग्रंथों की संप्रभुता का अंत होना चाहिए।
 महात्‍मा आये और चले गये परन्‍तु अछुतअछुत ही बने हुए हैं।
 आज भारतीय दो अलग-अलग विचारधाराओं द्वारा शासित हो रहे हैं। उनके राजनीतिक आदर्श जो संविधान के प्रस्तावना में इंगित हैं वो स्वतंत्रतासमानताऔर भाई -चारे को स्थापित करते हैं और उनके धर्म में समाहित सामाजिक आदर्श इससे इनकार करते हैं।
 ज्ञान व्‍‍यक्ति के जीवन का आधार हैं।
 जो धर्म जन्‍म से एक को श्रेष्‍ठ और दूसरे को नीच बनाए रखेवह धर्म नहींगुलाम बनाए रखने का षड़यंत्र है।

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 मैं तो जीवन भर कार्य कर चुका हूँ अब इसके लिए नौजवान आगे आए।
 हर व्यक्ति जो मिल के सिद्धांत कि एक देश दूसरे देश पर शासन नहीं कर सकता को दोहराता है उसे ये भी स्वीकार करना चाहिए कि एक वर्ग दूसरे वर्ग पर शासन नहीं कर सकता।
 शिक्षा जितनी पुरूषों के लिए आवशयक है उतनी ही महिलाओं के लिए।
 राजनीतिक अत्याचार सामाजिक अत्याचार की तुलना में कुछ भी नहीं है और एक सुधारक जो समाज को खारिज कर देता है वो सरकार को खारिज कर देने वाले राजनीतिज्ञ से ज्यादा साहसी हैं।
 मनुवाद को जड़ से समाप्‍त करना मेरे जीवन का प्रथम लक्ष्‍य है।
 मैं राजनीति में सुख भोगने नहीं बल्कि अपने सभी दबे-कुचले भाईयों को उनके अधिकार दिलाने आया हूँ।
 उदासीनता लोगों को प्रभावित करने वाली सबसे खराब किस्म की बीमारी है।

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 हमारे पास यह स्वतंत्रता किस लिए हैहमारे पास ये स्वत्नत्रता इसलिए है ताकि हम अपने सामाजिक व्यवस्थाजो असमानताभेद-भाव और अन्य चीजों से भरी हैजो हमारे मौलिक अधिकारों से टकराव में हैको सुधार सकें।
 याय हमेशा समानता के विचार को पैदा करता है।
 अपने भाग्य के बजाय अपनी मजबूती पर विश्वास करो।
 एक सुरक्षित सेना एक सुरक्षित सीमा से बेहतर है।
 मेरे नाम की जय-जयकार करने से अच्‍छा हैमेरे बताए हुए रास्‍ते पर चलें।
 राष्‍ट्रवाद तभी औचित्‍य ग्रहण कर सकता हैजब लोगों के बीच जातिनरल या रंग का अन्‍तर भुलाकर उसमें सामाजिक भ्रातृत्‍व को सर्वोच्‍च स्‍थान दिया जाये।

 

 किसी का भी स्‍वाद बदला जा सकता है लेकिन जहर को अमृत में परिवर्तित नही किया जा सकता।
 इस दुनिया में महान प्रयासों से प्राप्‍त किया गया को छोडकर और कुछ भी बहुमूल्‍य नहीं है।
 निहित स्वार्थों को तब तक स्वेच्छा से नहीं छोड़ा गया है, जब तक कि मजबूर करने के लिए पर्याप्तव बल ना लगाया गया हो।
 मन की स्‍वतंत्रता ही वास्‍तविक स्‍वतंत्रता है।
 एक इतिहासकारसटीकईमानदार और निष्‍पक्ष होना चाहिए।
 जो झुक सकता है वह सारी दुनिया को झुका भी सकता है ।
 लोकतंत्र सरकार का महज एक रूप नहीं है।

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 धर्म में मुख्य रूप से केवल सिद्धांतों की बात होनी चाहिए, यहां नियमों की बात नहीं हो सकती।
 गुलाम बन कर जिओगे, तो कुत्ता समझ कर लात मारेगी ये दुनिया। नवाब बन कर जिओगे तो शेर समझ कर सलाम ठोकेगी।
 मैं यह नहीं मानता और न कभी मानूंगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे। मैं इसे पागलपन और झूठा प्रचार-प्रसार मानता हूं।
 एक सफल क्रांति के‍ लिए सिर्फ असंतोष का होना पर्याप्त नहीं है, जिसकी आवश्याकता है वो है न्याय एवं राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों में गहरी आस्था।
 उदासीनता लोगों को प्रभावित करने वाली सबसे खराब किस्म की बीमारी है।
 मैं गौरी, गणपति और हिन्दुओं के अन्य देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखूंगा और न ही मैं उनकी पूजा करूंगा।

डॉ भीमराव अम्बेडकर के अनमोल वचन 

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