एक चालाक लोमड़ी की कहानी

एक चालाक लोमड़ी की कहानी

एक बार की बात है एक जंगल में एक चालाक लोमड़ी रहा करती थी । दिन भर इधर उधर से चुराकर खाना और बड़ी बड़ी गप्पे हांकना उसे बड़ा अच्छा लगता था । चोरी करने में और झूट बोलने में उसका कोइ साहनी नहीं था । पुरे जंगल में कोई भी ऐसा जीव नहीं था जिसको उसने ठगा नहीं हो । एक दिन उसने सोचा रोज रोज खाने से मैं उब चुकी हूँ क्यों न कुछ मीठा खाया जाए और इसलिए उसने गन्ना खाने की ठानी, और गन्ने की खेत की और चल दी । और आगे हरे-भरे लहराते गन्ने के खेत देखकर वह चालाक लोमड़ी बहुत खुश☺ हुई और उस खेत में घुसकर मज़े से गन्ना खाने लग गयी।

एक चालाक लोमड़ी की कहानी

खेत में हलचल देखकर एक किसान ने दुसरे किसान को जोर से अवाज देकर कहा ” अरे भाई वो देखो लगता है तुम्ह्रारे खेत में  कोई घुस गया है । ” तो इधर किसान को लगा शायद यह वही लोमड़ी है जो पिछली बार उसके गन्ने को खा कर भाग गयी थी ।और फिर वह किसान के बड़ी सी लाठी लेकर और गुस्सा होकर अपने खेत की तरफ गया । और उस गन्ने के खेत के अन्दर घुस गया तभी उसकी नज़र एक लोमड़ी पर पड़ी जो मजे से गन्ना खा रही थी । किसान को यह देखकर बहुत ही गुस्सा 😡 आया और उसने लोमड़ी को बहुत बेरहमी से पीटा और कहा। पिछले बार तू मेरे सारे गन्ने खा गयी थी इस बार नहीं छोडूंगा तुझे।

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चालाक लोमड़ी ने पिटते हुए कहा मैं तो यहाँ  पहली बार आ रही हूँ और आज के बाद मैं कभी इस खेत की तरफ देखूंगा भी नहीं। लेकिन किसान ने एक न सुनी और उसको पीटते रहा। किसी तरह से वह चालाक लोमड़ी  वहां से जान बचा कर भाग निकली और किसान को जोर जोर से गालियाँ देने लगा ” अरे ओ किसान कीड़े पड़े तेरे गन्ने को ”

फिर किसान को गुसा आया और फिर वह लोमड़ी के पीछे पत्थर फेंकने लगा लोमड़ी बहुत तेज भागी और उसको अचानक एक पथर से ठोकर लगती है ।और वह सीधे एक नीले रंग के पानी के हौज (टंकी) में गिर जाती है और उस लोमड़ी का पूरा रंग नीला हो जाता है ।लोमड़ी खुद को नीला देखकर जोर जोर से रोने लगी और कहने लगी  “एक मुसीबत टली नहीं और एक नयी नयी मुसीबत हो गयी अब तो सारे जंगल के जानवर मुझे भूत समझ कर मुझे मार डालेंगे😓😫 “।

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तभी उसके मन में एक ख्याल आया, की वह अपने इस नीले रूप से सारे जंगली जानवरों को उल्लू बनाएगी और उनपर खूब रौब झाड़ेगी, धौंस जमाएगी 😈  । और फिर वह उस नीले पानी की हौज से निकल कर जंगल की ओर चल पड़ी। जैसे वह जंगल में घुसी तो नीला रंग का अजीब प्राणी देख कर जंगल के सारे प्राणी डर गए । जैसे जैसे वह पास आ रही थी  वैसे वैसे सारे जानवर उस नील प्राणी के डर से कापने लगे ।जब वह पास आईतो एक बन्दर ने हिम्मत जुटाकर उस से पूछा की ” हे नील प्राणी आप कौन हैं😨😨  ? और कहा से आए हैं और भालू ने भी कहां की इस से पहले हमें ऐसा नीला प्राणी कभी नहीं  देखा है आप कौन हैं ?

चालाक लोमड़ी ने सबको ठगते हुए कहा मैं “ईश्वर का भेजा हुआ एक दूत हूँ और आज से इस जंगल का राजा मैं हूँ मैं नीले आकाश से आया हूँ इसीलिए मेरा रंग नील है, यदि आप आज से मेरी सेवा करोगे तो मैं आपको आने वाले सभी संकटो से मुक्त कर दूंगा।

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और बेचारे सभी जंगली जानवर उसकी जय जयकार करने लगे और वह चालाक लोमड़ी अपने नाम का जय जयकार सुन बहुत ही खुश हुई सारे प्राणियों ने उस लोमड़ी को राजा के सिंघासन पर बड़े ही सम्मान के साथ बिठाया । जंगल में चारो तरफ ख़ुशी का वातावरण था अलग अलग तरह के प्राणी ढोल ताशे बजाते हुए नए राजा के प्रशंशा के गीत गा रहे थे। तभी पास बैठी कोयल ने लोमड से कहा की ” महाराज अगर आपकी इज़ाज़त हो तो मैं अपनी सुरीली आवाज में आपके लिए एक गाना गाना चाहती हूँ” लोमड ने इज़ाज़त दे दी, और कोयल गाने लगी।

नीला तारा नील गगन से
देखो ये आया ये
दूत है सबसे न्यारा
मन को है भाया 

सारे प्राणी उस चालाक लोमड़ी की सेवा में लग गए कोई उसके हाथ पैर दबाता कोई प्रशंशा के गीत गाता, तो कोई अलग अलग तरह के फल मूल आदि लेकर देता। वह लोमड़ी अपने असली रूप को भुलाकर खुद को सच  मुच का जंगल का राजा समझने लगी थी । जंगल के राजा को देखने के लिए कोने कोने से प्राणी वहाँ आने लगे। एक लोमड़ियो का झुण्ड भी वहां आ पहुंचा फिर उन लोमड़ियों के झुण्ड ने नए राजा के अभिवादन के लिए एक साथ आवाज लगाना शुरू किया।

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यह देख आदतवश वह लोमड़ी भी लोमड़ियों के सुर में सुर मिलाकर चिल्लाने  लगी । उस लोमड़ी की आवाज सुनकर सभी प्राणी दंग रह गए लोमड़ी को यह अहसास हुआ की अब तो उसकी पोल खुल चुकी है तभी सभी प्राणी कहने लगे।

भालू – हैं ये तो एक लोमड़ी की आवाज है।
हाथी – हाँ दोस्तों यह तो वही लोमड़ी है जो रोज हम सबको ठगती है आज तो इसने कर दी।
भालू – अरे इसको इतना मारो की यह ज़िन्दगी भर याद रखे।

फिर सभी जानवरों ने उस चालाक लोमड़ी को बहुत पीटा वह क्षमा याचना करती रही  । लेकिन किसी ने उसकी एक न सुनी और इस तरह से उस चालाक लोमड़ी को सबक मिल गया।

रंग नहीं सोच बदलो 

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