ब्रह्माण्ड कितना बड़ा है आइये जानते हैं

मिल्की वे , आकाशगंगा

मानव इतिहास की शुरूवात से ही हम आसमान की तरफ देखकर हैरान होते आये हैं हमारे पूर्वजो के अनुमान और आधुनिक विज्ञान की मदद से हम ये जान पाने में सफल हो पाए की इस पुरे ब्रह्माण्ड में हमारी जगह कहाँ पर है । लेकिन खुद को जान पाने का यह सफ़र बहुत ही लम्बा है एक वक़्त वह भी था जब धरती ब्रह्माण्ड का केंद्र मानी जाती थी, और सभी का यह मानना था की सूर्य और अन्य जितने भी गृह उपग्रह क्षुद्र पिंड उल्का पिंड हैं वह धरती के चारो और चक्कर लगाते हैं।

यदि कोई इस तथ्य को गलत ठहराने की कोशिश करता तो उसको कड़ी सजा दी जाती थी । क्योंकि प्राचीन रोम में यह माना जाता था कि इस पर सवाल खड़ा करना भगवान् को चुनौती देना है लेकिन वक़्त के साथ सब कुछ सामने आ गया तो चलिए आज हम करवाते हैं आपको पुरे ब्रहमांड का सफ़र । जहाँ  हम अपने घर से लेकर और वह तक का सफ़र तय करेंगे जहाँ तक अभी इंसान और हमारा बिज्ञान पहुच चुका है ।

आखिर कितना बड़ा है हमारा ब्रह्माण्ड – एक सफ़र 

तो दोस्तों धरती जो जिस ग्रह पर हम रहते हैं जो हमारा घर है उसको तो आप जानते ही हैं।  यह ब्रह्माण्ड का एक मात्र ऐसा ग्रह है जिसमें जीवन संभव है और जिसके बारे में हम सबसे ज्यादा जानते हैं।

(पृथ्वी  हमारे सौरमंडल का एक मात्र ऐसा ग्रह जिसका नाम किसी देवता के नाम पर नहीं है  )

चाँद | The Moon 

प्रथ्वी के बाद चलते हैं हम अपनी अंतरिक्ष की सबसे नजदीकी पिंड और हमारी धरती का एक मात्र उपग्रह चंद्रमा पर, जहां पर धरती के जैसा कुछ भी देखने को नहीं मिलता ना पानी, ना वातावरण, और ना ही जीवन ऐसा माना जाता है की चाँद का जन्म आज से  करीब साड़े चार अरब साल पहले धरती पर एक मंगल ग्रह जितना एक बड़े पिंड के टकराने से हुआ था । उस टक्कर से निकला मालवा धीरे धीरे इकठ्ठा हुआ और आगे चलकर पृथ्वी का चक्कर लगाते लगाते हमारी धरती का उपग्रह बन गया।

सूर्य | The Sun 

हमारा सूर्य हमारे सौरमंडल की सबसे बड़ी शक्ति है और धरती पर जीवन के लिए जिम्मेदार है । और इसके प्रकाश से ही हमारा 8 ग्रहों का सौरमंडल प्रकाशित है इसकी gravity के प्रभाव से ही हमारी समूची सौरव्यवस्था टिकी हुई है  जिसकी शुरुवात सूर्य के सबसे नजदीकी ग्रह बुध (Mercury) से शुरू होती है।

बुध | Mercury

बुध ग्रह सूर्य का सबसे नजदीकी ग्रह है इसकी सतह क्रेटरो से अटी पड़ी है और बिलकुल हमारे चाँद की तरह ही नज़र आती है। जो साबित करता है कि यह भूवैज्ञानिक रूप से  अरबो साल तक बेजान रहा होगा अब तक हमारी पृथ्वी के दो अंतरिक्ष यान बुध (Mercury) पर जा  चुके हैं।

  1. Meriner-10 –  यह यान 1974 से 1975 के बीच दो बार इस ग्रह की यात्रा कर चुका है ।
  2. Messenger Probe – यह यान 2004 में NASA द्वारा भेज गया था इसने 2011 में बुध ग्रह के  चक्कर लगाये और इस से पहले जनवरी 2008 में कभी न देखी गयी high quaility फोटो भेजी ।

बुध ग्रह के लगभग 50 प्रतिशत हिस्से का Map बनाया जा चुका है लेकिन सूर्य के बहुत नजदीक होने की वजह से और अत्यधिक प्रकाश और चकचौंध की वजह से हबल दूरबीन इसके बाकी हिस्से का नक्शा नहीं बना पाती।

शुक्र | Venus 

शुक्र गृह को पृथ्वी की बहन भी कहा जाता है क्योंकि इसका अकार, संरचना, गुरुत्वाकर्षण कुछ-कुछ धरती की तरह ही है Venus acid से भरे बदलो की मोटी चादर से ढाका है जिसकी वजह से हमें इसकी सतह हमें धरती से नज़र नहीं आती इसकी सतह पर काफी मात्र में ज्वालामुखी मौजूद हैं 100 किलोमटर के दायरे में आपको 150 बड़े-बड़े ज्वालामुखी देखने को मिल जायेंगे।

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शुक्र गृह की उपरी सतह पर भारी मात्र में बादल होने के बावजूद शुक्र पर बारिश नहीं होती हालाँकि सतह से कुछ किलोमीटर उपर तेजाब की बारिश होती है लेकिन वह सतह से 25 किलोमीटर उपर ही भाप बन जाता है शोधकर्ताओ का मानना है कि अरबो साल पहले   इसकी सतह पर पर्याप्त पानी मौजूद था जो समय के साथ भाप बनता रहा । और एक अलग तरह का Green House Effect पैदा हुआ शुक्र (Venus) जीवन नहीं है लेकिन वैज्ञानिक मानते हैं कि इसके निचले और बीच के बदलो की परतो में रहने लायक माहौल मौजूद है ।

मंगल | Mars 

1965 में भेजे गए  Mariner 4 से अब तक भेजे गए सभी मंगलयानो से मिली जानकारी हमें यह बताती है कि सौरमंडल के सभी ग्रहों में हमारी पृथ्वी के अलावा मंगल पर जीवन और पानी होने की सम्भावना सबसे जादा है।  धरती से करोडो किलोमीटर दूर मंगल को वैज्ञानिक इस नज़र से देखते हैं कि भविष्य में इस पर बस्ती बसा पाएंगे उसके बाद है एक पिंड Asteroid belt जो  mars और jupitar के बीच रह कर सूर्य के चक्कर लगाती है।

बृहस्पति | Jupiter 

बृहस्पति यानी की Jupiter  हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा गृह है यह अपने चार बड़े और दर्जनों छोटे चन्द्रमा के साथ जुपिटर अपने आप में एक छोटे सोलर सिस्टम की तरह है। अगर सौर व्यवस्था के बाकी सरे ग्रहों को मिल लिया जाए वे तब भी जुपिटर का सामना नहीं कर पाएंगे । इसकी सतह पर इसका एक great red spot है भयंकर तूफान से बना यह लाल धब्बा हमारी धरती से करीब तीन गुना बड़ा है । अनुमान है कि बृहस्पति गृह का यह तूफ़ान पिछले साड़े 300 सालो से नहीं थमा।

शनि | Saturn 

शनि अपने शाही छल्लो से घिरा हुआ है और सौरमंडल में सबसे खुबसूरत नज़र आता है। यह छल्ले बर्फ के कणों से मिलकर बने हैं और शनि की सतह से उपर लाखो किलोमीटर तक फैले हैं कुल 62 चन्द्रमा शनि के चक्कर लगाते हैं । जिनमे से Titan सबसे बड़ा और वायुमंडल को कैद करके रखने वाला सोल्लर सिस्टम का एक मात्र चन्द्रमाँ है।

अरुण और वरुण | Uranus and Naptune 

ये दोनों सौरमंडल के सबसे बाहरी ग्रह हैं जो हमारे पूर्वजो की जानकारी से बाहर थे और इनका पता इंसानों को टेलिस्कोप की खोज के बाद ही लग पाया । ये दोनों सौरमंडल के सबसे ठन्डे ग्रह हैं।

Kuiper Belt 

इन ग्रहों से अभी आगे है कुइपेर बेल्ट (Kuiper belt) जो Mars  और Jupiter  के  बीच की Asteroid belt  से 20 गुना चौड़ी और 200 गुना ज्यादा फैली है । जिसमे लाखो की संख्या में खगोलीय वस्तुएं मौजूद हैं जो ठण्ड से जमे पानी, मीथेन और अमोनिया  की बनी है । इनसे से एक हमारा ग्रह भी है जिसका नाम हैं यम (Pluto) लेकिन वैज्ञानिको ने यम को 2006 में सौरमंडल के ग्रहो की लिस्ट से बाहर कर दिया । इस गृह को क्यों हमारे सौरमंडल की लिस्ट से क्यों हटाया गया उसके बारे में जानने के लिए आप हमारा यह आर्टिकल पढ़ सकते हैं । –

आखिर क्यों हटाया गया यम (Pluto) को ग्रहों की List से 

और इस से भी आगे है मानव इतिहास का सबसे महान अंतरिक्ष यान Voyager 1

Voyager 1 

voyager-1 अपने 40 साल के सफ़र में सौरमंडल से भी भर जा चुका है यह यान हमरी धरती से लगभग 19 अरब किलोमीटर दूर है । यह मानवों द्वारा भेजा गया ऐसा यान है जिसमे इंसानों को सबसे ज्यादा सौरमंडल के छिपे रहस्यों के बारे में बताया और यही पर हमारा सौरमंडल ख़त्म हो जाता है । जहाँ से हमारा सूर्य एक सामान्य तारे की तरह दिखाई देता है

voyager 1 सबसे दूर मानव निर्मित अंतरिक्ष यान
voyager 1

अभी तक के सफ़र 👆👆 में हम अपने सफ़र से इतने दूर आ चुके हैं की उसके प्रकाश को भी यहाँ आने में एक साल अलग जाता है।

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लकिन यहाँ भी सूर्य की gravity का असर ख़त्म नहीं होता है क्योकि अरबो की संख्या में कुछ छोटे-छोटे कोम्मेट्स अब भी सूरज के खिंचाव की वजह से बने हुए हैं। धूमकेतु  (Comets ) का विशाल बादल यहाँ से हमारे सौरमंडल को घेरे हुए हैं जिसको हम Oort cloud  के नाम से जानते हैं।

Oot Cloud

Oot Cloud एक ऐसा विशाल बदल है जहाँ एक Comet से दुसरे Comet  की दूरी करोडो किलोमीटर में है । इसलिए Oort cloud वाकई में है या नहीं इसका कोई पुख्ता सबूत तो नहीं मगर यह सिर्फ  वैज्ञानिको का मत है माना जाता है कि ये बदल हमारे सौरमंडल की गुरुत्वाकर्षण सीमा पर है । जिसके बाद सूरज का खिंचाव बहुत कामं रह जाता है और यही पर हमारे Solar system का अंत हो जाता है, लेकिन ब्रह्माण्ड का सफ़र तो अब  शुरू हुआ है ।

इसके बाद  ऐसी जगह आती है जहाँ हम इंसानी आँखों से कुछ नहीं देख सकते हमको वहाँ अंधेरा ही अँधेरा दिखाई देगा इसलिए यहाँ हमको infrared vision की जरुरत पड़ेगी जिस से हमको सोर्मंडल में छिपे हुए वे गृह जिन तक किसी तारे की रौशनी नहीं पहुच पा रही।  वे ग्रह भी दिखाई देंगे जिनको हम Rogue Planet कहते हैं ।

Rogue Planet

यह वे प्लेनेट होते हैं जिनका कोई तारा नहीं होता और जो इस अँधेरे में अकेले भटक रहे होते हैं हमारी Galaxy में ऐसे ग्रहो की संख्या करोडो में हो सकती है । ये Planet परिवार के उन सदस्यों की तरह हैं जो बनने के समय अपने साथियों से बिछड़ गए थे । यह Rogue Planet भले ही उपर से बर्फ की मोती चादर से ढके हो लेकिन इनके केंद्र  में पानी का विशाल समद्र भी हो सकता है।  और क्या पता इनपर जीवन किसी और तौर तरीके से साँसे ले रहा हो ! इस से आगे जाने पर फिर हमको दिखती है आकाश गंगा (Milky Way) ।

आकाशगंगा  | Milky way 

आकाश गंगा में चमकता हर एक बिंदु अपने आप में एक बिशाल तारा है और हम हमारी गैलेक्सी में एक छोटे से बिंदु पर मौजूद हैं। यानी गैलेक्सी के केंद्र से 30,000 प्रकाश वर्ष (Light years) दूर और यहा पर हमारे सफ़र का एक और पड़ाव ख़त्म होता है। उसके बाद उस से बाहर जाये तो हम इतनी दूर चले जायेंगे कि प्रकश को भी यहाँ आने में हजारो साल लग जायेंगे और यहाँ से हम अपनी पडोसी आकाशगंगा एंड्रोमेडा (Andromeda) को देख सकते हैं ।

मिल्की वे , आकाशगंगा

वैज्ञानिको का मानना है कि हमारी Milky way और Andromeda बहुत तेजी से एक दूसरे की तरफ आगे बढ़ रही हैं और करीब चार अरब साल बाद ये आपस में टकरा जाएँगी । ऐसे ही बहुत सारी छोटी बड़ी गैलेक्सियां आपस में मिलकर एक लोकल ग्रुप बनती हैं । इनकी तादात इतनी ज्यादा है कि हम यहाँ से अपनी तरफ से गैलेक्सी को ढूँढ भी नहीं सकते ।

Supercluster 

अगर आप इसको देखकर हैरान हो तो यह जानकर आप और भी हैरान हो जायेंगे कि ऐसे ही हज़ारो लोकल ग्रुप मिलकर एक Supercluster बनाते हैं  यानी एक Supercluster में हजारो Galaxies के Local Group हो सकते हैं । और यहाँ पर आकार हमें प्रकाश का जो छोटा सा छोटा बिंदु दिखाई देता है वह अपने आप में एक पूरी Galaxy है जिनमें हर Galaxy में अरबो तारे समाये हुए हैं ।

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करोडो पिंडो दर्जनों गृह, उपग्रहों और कोम्मेट्स जो एक तारे की परिक्रमा करते हैं उसको कहते हैं सौरमंडल । और नजाने कितने करोडो  सौरमंडल को मिलकर  बनती है हमारी आकाशगंगा । और अरबो आकाशगंगाओ  से मिककर बनता है एक Supercluster । और इसके बाद भी हम इस Supercluster  को अपने ब्रह्माण्ड का एक छोटा सा हिस्सा मानते हैं । क्योंकि हमारे ब्रह्माण्ड में करोडो से भी ज्यादा Supercluster होने की सम्भावना है ।

ब्रह्माण्ड कितना बड़ा है
local supercluster

करोडो Supercluster  मिलकर बनाते हैं हमारा ब्रह्माण्ड (Universe)  जिसको हम ज्ञात ब्रह्माण्ड (observable universe) भी कहते हैं । और यहीं पर हमारे विज्ञान की भी सीमा समाप्त हो जाती है इस से आगे न तो हम देख सकते हैं और न ही अंदाज़ा लगा सकते हैं ।

ज्ञात ब्रह्माण्ड | Observable universe

ब्रह्माण्ड कितना बड़ा है
universe

ज्ञात ब्रह्माण्ड में खराबो की संख्या में galaxy समायी हुई हैं और इसका व्यास (diameter) 91 अरब प्रकाश वर्ष है यानी इसके एक छोर से दुसरे छोर तक प्रकाश को पहुँचने में भी 91 अरब साल लग जायेंगे, लेकिन यह केवल observable universe का size है । पूरा ब्रह्माण्ड कितना बड़ा है यह किसी को नहीं पता । कुछ लोग मानते हैं कि ब्रह्माण्ड यहीं पर ख़त्म हो जाता है लेकिन कुछ का मानना है की यह विशाल ब्रह्माण्ड  समुद्र में तैरती हुई एक बूंद की तरह है जहां इसके जैसे और ब्रह्माण्ड होने की संभाना भी हो सकती है, जिनका कोई अंत नही है जब दो या दो से अधिक ब्रह्माण्ड मिलते हैं। तो तब हम इस सिधांत को हम महाब्रह्माण्ड यानी Multiverse कहते हैं। लेकिन यह सिर्फ एक अंदाज़ा है जो गलत भी हो सकता है ।

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तो दोस्तों देखा अपने हमारा ब्रह्माण्ड कितना बड़ा है , इसको पढ़ कर तो हमको ऐसा महसूस होता है कि हमारा वजूद ही कहा है जब ब्रह्माण्ड से हमारा सूर्य भी एक  धुल के कण से छोटा नज़र आता है वहां हमारा वजूद क्या होगा । आप खुद सोच सकते हैं जिस इश्वर ने इस ब्रह्माण्ड की रचना की हम उसको बचाने की बात करते हैं और एक दुसरे के धर्म , जात, पात, मजहब के चक्कर में फंस एक दुसरे को मारते हैं। जिसने इतना बड़ा ब्रह्माण्ड बनाया हमको बनाया आपको बनाया सारे जीव जन्तुओ को बनाया. क्या उसको हम बचा सकते हैं ? क्या उसको बचाने की हमारी कोई औकात है ? जो इस ब्रह्माण्ड का रचियता है, उसको अपनी रक्षा के लिए किसी की जरुरत नहीं होती। चाहे आप किसी भी धर्म को माने ईश्वर को खुश करने के लिए बस शांति, श्रद्धा और प्रेम ही काफी है ।

आपका इसके बारे में क्या सोचना है क्या ब्रह्माण्ड तक ही यह सीमा समाप्त हो जाती है या इस से भी बहार Multiverse होने की सम्भावना है कमेंट बॉक्स में जरुर अपनी राय दें ।

 

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9 thoughts on “ब्रह्माण्ड कितना बड़ा है आइये जानते हैं”

  1. Nice sir, scientists universe ke baare me itna khoj kar liye lekin manav mastik ki sima bhi anant hai samanya manav murkh hai swarthi hai mananav se selfish koi dusra prani nahi

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