भगवान श्री राम के बारे में कुछ रोचक बातें

भगवान राम से जुड़ा यह सवाल काफी अच्छा है तो चलिए इससे जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में जानते हैं।

भगवान राम एक ऐतिहासिक महापुरुष थे और इसके पर्याप्त प्रमाण हैं। शोधानुसार पता चलता है कि भगवान राम का जन्म 5114 ईस्वी पूर्व हुआ था। चैत्र मास की नवमी को हुआ था इसी लिए चैत्र नवमी को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है। उपरोक्त जन्म का समय राम की वंशपरंपरा और उनकी पीढ़ियों से भी सिद्ध होता है। अयोध्या के इतिहास और अयोध्या की वंशावली से भी यह सिद्ध होता है।। अयोध्या मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी 9 नवंबर 2019 को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया जिसमे अयोध्या में श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण की अनुमति दी गयी।

राम शब्द का वैदिक अर्थ है ‘जिसका अंतर दिव्य रोशनी से भरा हो’

राम नाम रघु राजवंश के गुरु महर्षि वशिष्ठ ने दिया था।

भगवान राम के जन्म के लिए जब दशरथ ने यज्ञ करवाया तो वह 60 साल के थे।

भगवान् राम राजा दसरथ की पहली पत्नी रानी कौशल्या के पुत्र थे।

श्री राम की माँ कौशल्या,कौशल देश की राजकुमारी थी। इनके पिता का नाम सकौशल व माता का नाम अमृत प्रभा था। पूर्वजन्म में भगवान विष्णु ने कौशल्या को त्रेता युग में उनके गर्भ से जन्म लेने का वरदान दिया था। इसी कारण वो भगवान राम के रूप में इस धरती पर अवतरित हुए।

श्री राम को विष्णु जी का 7वां अवतार माना जाता है।

भगवान् श्री राम का जन्म त्रेता युग में हुआ था और इस युग में श्रीराम को मानव रूप में पूजे जाने वाले देवता माने जाते थे।

राम का अवतार एक पूर्ण अवतार नहीं माना जाता है क्योंकि उनको 14 कलाएं ज्ञात थीं. श्री कृष्ण सोलह की सोलह कलाओं में पारंगत थे. ऐसा जान बूझ कर किया गया था क्योंकि रावण को कई वरदान प्राप्त थे, लेकिन एक मनुष्य उसका वध कर सकता था.

भगवान राम को 14 वर्ष को वनवास हुए था। उनमें से 12 वर्ष उन्होंने जंगल में रहकर ही काटे। 12वें वर्ष की समाप्त के दौरान सीता का हरण हो गया तो बाद के 2 वर्ष उन्होंने सीता को ढूंढने, वानर सेना का गठन करने और रावण से युद्ध करने में गुजारे। 14 वर्ष के दौरान उन्होंने बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य किए जिसके चलते आज भी हमारे देश और देश के बाहर राम संस्कृति और धर्म को देखा जा सकता है।

वनवास जाते समय भगवान् राम की आयु 27 वर्ष थी

रामजी के धनुष का नाम कोदंड था.

प्रभु श्रीराम पर वैसे को कई ग्रंथ लिखे गए लेकिन वाल्मीकि कृत रामायण ही प्रमाणिक ग्रंथ माना जाता है। यह मूल संस्कृत में लिखा गया ग्रंथ है।

वैवस्वत मनु के दस पुत्र थे। उनमें से एक इक्ष्वाकु के कुल में रघु हुए। रघु के कल में राम हुए। राम के पुत्र कुश हुए कुश की 50वीं पीढ़ी में शल्य हुए जो महाभारत के काल में कौरवों की ओर से लड़े थे। शल्य की 25वीं पीढ़ी में सिद्धार्थ हुए जो शाक्य पुत्र शुद्धोधन के बेटे थे। इन्हीं का नाम आगे चलकर गौतम बुद्ध हुआ।

रामचरित मानस के अनुसार कि राम-रावण का युद्ध 32 दिन चला था जबकि दोनों सेनाओं के बीच 87 दिन तक युद्ध हुआ

जिस जंगल में भगवान् राम, सीता मैया और लक्षमण जी ने वनवास काटा था उस जंगल का नाम दंडकारण्य था

14 वर्ष के वनवास में से अंतिम 2 वर्ष प्रभु श्रीराम दंडकारण्य के वन से निकलकर सीता माता की खोज में देश के अन्य जंगलों में भ्रमण करने लगे और वहां उनका सामना देश की अन्य कई जातियों और वनवासियों से हुआ। उन्होंने कई जातियों को इकट्ठा करके एक सेना का गठन किया और वे लंका की ओर चल पड़े।

लंका पर चढ़ाई करने से पहले श्रीराम ने रामेश्वरम में शिव लिंग बना कर शिव अराधना की थी. आज भी रामेश्वरम हिन्दुओं के सबसे प्रमुख तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। इसके बाद प्रभु श्रीराम ने नल और नील के माध्यम से विश्व का पहला सेतु बनवाया था और वह भी समुद्र के ऊपर। आज उसे रामसेतु कहते हैं ज‍बकि राम ने इस सेतु का नाम नल सेतु रखा था।

लंका पहुँचने के लिए समुन्द्र पर रामसेतु का निर्माण करने में सिर्फ 5 दिन लगे थे.

ऐसा माना जाता है कि अयोध्या में ग्यारह हजार वर्षों तक भगवान राम का शासन था. इस सुनहरे काल को राम राज्य के रूप में चुना गया. इस दौरान राज्य आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से संपन्न था.

राम जी के अनुज लक्ष्मण सीता मैया और भगवान् राम की रक्षा करने के लिए 14 वर्ष के वनवास में एक भी दिन नहीं सोये थे. इसलिए उनका एक नाम गुडाकेश भी है.

माना जाता है कि गिलहरी पर जो तीन धारियां हैं वह भगवान राम के आर्शीवाद के कारण हैं. दरअसल, जब लंका पर आक्रमण करने के लिए रामसेतु बनाया जा रहा था तब एक गिलहरी भी इस काम में मदद कर रही थी. उसके समर्पण भाव को देखकर श्रीराम ने प्रेमपूर्वक  उसकी पीठ पर अपनी उँगलियाँ फेरी थीं और तभी से गिलहरी पर ये धारियां मौजूद है

भगवान राम चार भाई थे – राम, लक्षमण, भरत, शत्रुघ्न, और उनकी एक बड़ी बहन भी थीं जिनका नाम शांता था।

सीता जी के स्वयंवर में राम जी ने शिव जी के जिस धनुष को तोड़ा था उसका नाम पिनाक था

भगवान राम ने रावण को युद्ध में परास्‍त करने के बाद रावण के छोटे भाई विभीषण को लंका का राजा बना दिया था

गौतम ऋषि ने अपनी पत्नी अहिल्‍या को पत्थर बनने का श्राप दिया था. इस श्राप से उन्हें भगवान राम ने ही मुक्ति दिलाई थी.

बाल्मीकि रामायण के के अनुसार 33 करोड़ नहीं अपितू 33 कोटि अर्थात 33 प्रकार के देवी देवता है |

गायत्री मंत्र में 24 अक्षर होते हैं और वाल्मीकि रामायण में 24,000 श्लोक हैं।  रामायण के हर 1000 श्लोक के बाद आने वाले पहले अक्षर से गायत्री मंत्र बनता है। यह मंत्र इस पवित्र महाकाव्य का सार है। गायत्री मंत्र को सर्वप्रथम ऋग्वेद में उल्लेखित किया गया है।

लव और कुश राम तथा सीता के दो जुड़वां बेटे थे।

अरण्य नाम के एक राजा ने रावण को श्राप दिया था कि मेरे वंश से उत्पन्न युवक तेरी मृत्यु का कारण बनेगा और भगवान राम इन्ही के वंश में जन्मे थे।

माता सीता को रावण की कैद से आजाद कराने के लिए रास्ते में पड़े समुद्र को पार करने के लिए भगवान राम ने एकादशी का व्रत किया था।

वनवास वापसी के बाद भगवान राम के अयोध्या वापसी की खुशी में अयोध्यावासियों ने दीप जलाए थे तब से दिवाली का त्योहार मनाया जाता है।

रावण महाज्ञानी विद्वान था। भगवान राम ने भी उन्हें महाब्राह्मण कहा था। इसलिए जब रावण मृत्यु शय्या पर था तब प्रभु राम ने लक्षमण से रावण के पास जाकर उससे ज्ञान अर्जित करने को कहा था।

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