भगवान और गुरु से प्यार करना निरंकारी विचार

भगवान और गुरु से प्यार करना निरंकारी विचार

भगवान और गुरु से प्यार करना निरंकारी विचार


भगवान और गुरु से प्यार करना निरंकारी विचार

प्यार कब्ज़ा नहीं पहचान है, अधिकार नहीं कर्त्तव्य है, चाहत नहीं स्वयं को मिटाना है। बलिदान की नीव पर ही प्रेम-महल का निर्माण होता है ।प्यार भरा जीवन जीने के लिए भक्ति का रंग ही सबसे सुन्दर होता है। प्रेम के श्रोत से इश्वर एवं सद्गुरु से जुड़कर ही ह्रदय में प्रेम उत्पन्न होता है।

प्यार ही जीवन की अमूल्य पूंजी एवं संपत्ति है सद्गुरु और परमात्मा का दूसरा नाम प्रेम है जिस ह्रदय में प्रेम का वास है, वहां नफरत, इर्ष्या, द्वेश, संकीर्णता आदि नकारात्मक भावनाओ के लिए कोई स्थान नहीं, प्रेम के खजाने के लिए इन भावनाओ को पनपने से पहले ही रोकना है ।

जहाँ प्यार है वह भगवान है यदि भगवान की कृपा निरंतर चाहते हैं तो भगवान् की रचना यानी इंसान से प्यार करना आवश्यक है। धन्यवाद करे उस परमात्मा का शुक्रिया अदा करे उस ईश्वर का जिसने इतनी विशाल प्रकृति हमारी सेवा के लिए बनायीं इसलिए भगवान की रचना का उपयोग तो करना है, पर दुरूपयोग एवं शोषण नहीं।

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यदि हम अपने भगवान से प्रेम करने का दावा करते हैं तो कर्म द्वरा प्रेम प्रकट भी करना है। हमारा प्रभु-प्रेम केवल बातो तक सीमित नहीं रहना चाहिए प्रेम सदैव निष्काम करना चाहिए प्रेम करने प्रभु से कुछ फल की इच्छा रखना अपने प्रेम को कमजोर करना है। प्रभु को अपने पैमानों से देने दो मांग कर अपने आपको छोटा नहीं करना है बेगरज जिन्हा दी उल्फत है, नमाज दी कीमत  नहीं  मंगदे।

प्यार की कोई भाषा नहीं होती केवल भावना होती है। प्रेम जुबान से नही आँखों से बोलता है प्रेम दिल की जुबान जानता है इसलिए दिल की बात सुन लेता है प्रेम में कभी दूरी नहीं होती दुरी धरती पर है। हृदयों में नहीं प्रेम किसी भाषा का मोहताज नहीं, किसी जाती, मजहब, वर्ण एवं सामाजिक स्तर को नहीं पहचानता।यह तो इंसान को इंसान से जोड़ता है प्रेम से ही सद्गुरु विश्व-कुटुम्बकम की भावना को सर्वत्र फ़ैला देता है ।

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प्रभू प्रेमी जब मिलते हैं तो बैकुंठ का आनंद जमीन पर ही प्राप्त कर लेते हैं। प्रभु प्रेमी दुःख व पीड़ा की भट्ठी में से निकल कर और भी निखर कर प्रकट होते है प्रभु के लिए तातना सहन करने वाले भय की सीमा पार कर जाते हैं । प्रभु-प्रेमी शरीर से उपर का खेल खेलते हैं यह खेल उन्हें उस बुलंदी तक ले जाता है कि यदि भक्ति के कारण उन्हें शारीरिक कष्ट भी दिए जाए तो वे विदही होकर अपने शरीर का तमाशा स्वयं ही देख रहे होते हैं ।

दया और करुना प्रभु भक्तो के स्वाभाव में होती है इसके लिए उन्हें कोई प्रयास नहीं करना पड़ता, हमारी प्रेम धरा सबके लिए बहती चली जाए यह केवल बहना जानती है हिन्दू मुस्लिम, सिख या इसाई को नही पहचानती प्रेम देना हमारा स्वभाव है ।

प्रभु प्रेम सदैव मानव को जिन्दा रखता है प्रभु-प्रेमी मरकर भी नहीं मरते वे तो एक ह्रदय से निकलकर असंख्य हृदयों में वास करने लगते हैं प्रभु प्रेमी कभी भी अपने प्रेम पर अभिमान नहीं करता वह नम्रता से ही प्यार की तिजोरी भरता रहता है।

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प्रभु-प्रेमी के लिए जीत या हार का कोई महत्व नहीं होता प्रभु की रजा में जीना ही उसकी जीत होती है ।।

प्रभु प्रेमी मन को ही मंदिर बना लेता है जिसका मन भगवान से जुड़ा रहता है वही निर्मलता और पावनता की सुगंध फैलता है ।

प्रेम व्यापर नहीं साधन है प्रेम उर्ध्वगामी है, जिसमे कोई लेन-देन नहीं, शर्त नहीं, निश्छल है, परम त्याग व इसमें सम्पूर्ण समर्पण निहित है, यही अध्यात्म की सर्वोच ऊंचाई तक पहुचाने वाला है ।

हमारा प्यार अपने निरंकार और सदगुरु के प्रति इतना गहरा होना चाहिए कि हमें पूरा विश्वास हो कि कोई भी शक्ति हमें प्रभु से अलग नहीं कर सकती। न ही सांसारिक प्राप्तियां व शक्तिया और न ही इनके आभाव ।

सद्गुरु एवं   गुरुभाइयो से सच्चे दिल से प्यार व उनका सम्मान करना है, भक्त अपने प्रेम को सेवा द्वारा ही प्रकट करता है ।

जो निरंकार की रजा में जीवन जीते हैं, निरंकार एवं सद्गुरु पर पूर्ण विश्वास रखते हैं, कोई भी दुनियावी वास्तु उनको रब्बी प्यार से अलग नहीं कर सकती, न मौत, न जीवन, न समय, न कोई अन्य शक्ति ।

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भयानक से भयानक जीव या शक्ति भी प्रभू-प्रेमियों की सेवा करना अपना सौभाग्य मानती  है, जैसे अपने सुना और पढ़ा होता कि श्री गूरु नानक देव जी को तीखी धुप से बचने के लिए सांप ने छाया की।

“जे तू मेरा होय राए सब जग  तेरा होय”

भक्त प्रभु का और प्रभु भक्त का हो जाता है ।

निरंकारी विचार 

About kailash

मेरा नाम कैलाश रावत है और मैं hindish.com का एडमिन व लेखक हूँ और इस ब्लॉग पर निरंतर हिन्दी में ,टेक,टिप्स,जीवनियाँ,रहस्य,व अन्य जानकारी वाली पोस्ट share करता रहता हूँ, मेरा मकसद यह है की जैसे बाकि भाषाए इन्टरनेट पर अपनी एक अलग पह्चान बना रही हैं तो फिर हम भी अपनी मात्र भाषा की इन्टरनेट की दुनियां में अलग पहचान बनाये न की hinglish में ।

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