अंधे और लंगड़े की दोस्ती

अंधे और लंगड़े की दोस्ती

यह कहानी मित्रता के लिए एक प्रेरणात्मक कहानी है। जिस से हमें पता चलता है कि मित्रता हमारे कितने काम आती है। और किसी
भी चीज से ज्यादा हमें उस मित्र की मित्रता को बनाये रखना होता है जो हर समय आपका साथ
देने के लिए आपके तैयार रहता हो ।

अंधे और लंगड़े की दोस्ती


एक गाँव में एक लंगड़ा रहता था जिसका नाम विष्णु था एक दिन वह पास के ही एक गाँव जा रहा था। रास्ता
बहुत पथरीला और ऊबड़ खाबड़ वाला था जिस से उसको चलने में बहुत परेशानी आ रही थी। आगे चलकर
विष्णु को सामने वाले एक पेड़ के नीचे बैठा हुआ व्यक्ति दिखाई दिया,विष्णु उसके पास गया और उस से
उसका परिचय पूछा।
उस व्यक्ति ने अपना परिचय देते हुए कहा – मेरा नाम सूरदास है और मुझे बगल वाले गाँव जाना है
लेकिन मैं अन्धा हूँ क्या तुम मेरी सहायता करोगे।

इस पर विष्णु ने कहा – देखो सूरदास मेरे पास एक बहुत अच्छी योजना है जो जिस से आपका और मेरा
दोनों का लाभ होगा।
सूरदास ने  कहा – ऐसी कौन सी योजना है आपके पास मित्र।

विष्णु ने कहा – देखो सूरदार मैं लंगड़ा हूँ इसलिए सही से चल नहीं पाता, और तुम अंधे हो देख नहीं पाते, इसलिए आप मुझे अपने कंधे पर बैठा दो मैं तुम्हे रास्ता बताऊंगा और तुम किसी से टकराओगे भी नहीं टकराओगे इस तरह हम दोनों बिना किसी समस्या के गाँव पहुँच जायेंगे।सूरदास को बिष्णु की यह योजना भा गई और उसने विष्णु को कंधे पर बैठा दिया और दोनों गाँव की ओर चलने लगे तभी क्या हुआ  कि बिष्णु को एक पेड़ के नीचे कुछ दिखा उसने

सूरदास को कहा – सूरदास रुको वहां पेड़ के नीचे कुछ रखा हुआ है उस तरफ चलो, दोनों उस चीज के
पास गए और देखा की वहां पर तो  गठरी रखी हुई है जब उसने वह गठरी खोली तो उसमें सोने के गहने रखे हुए थे, विष्णु  ने यह बात सूरदास को बताई तो

सूरदास कहने लगा- लाओ यह गठरी मुझे दे दो इस पर मेरा हक है क्योंकि इस तुमको यहाँ
तक मैं ही तो लेकर आया।
विष्णु कहने लगा – नहीं, इसपर मेरा हक है।

मित्रता की परीक्षा –


वे दोनों आपस में लड़ने लगे एक कहता अगर मैं तुम्हे इसके बारे में नाह बताता तो क्या तुम्हे पता चल पाता की इस गठरी में क्या रख हुआ है। तो  दूसरा कहता यदि मैं तुम्हे यहाँ तक नहीं लाता तो तुम्हे कैसे पता चलता कि यहाँ यह गठरी रखी हुई है।
दोनों में से कोई भी समझने को तैयार नहीं था।

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तभी वहां से एक सज्जन गुजर रहा तो उनको लड़ते हुए देख वह उनके पास गया और दोनों की बात सुनी
दोनों की बात सुनने के बाद उसने दोनों को समझाया ।

कि इस गठरी पर तुम दोनों का सामान अधिकार है। क्योंकि तुम दोनों एक दुसरे की सहायता
से ही यहाँ तक पहुँच पाए हो इसलिए इस पर तुम दोनों का सामान अधिकार है ।

और यह तो सिर्फ धन है जो आता जाता रहता है। मगर इस धन के लिए तुम्हे आपस में नहीं लड़ना चाहिए
और अपनी मित्रता बनायीं रखनी चाहिए क्योंकि तुम्हारी यह मित्रता जीवन भर काम आएगी ।

अंधे और लंगड़े की कहानी से सीख –


दोस्तों इस अंधे और लंगड़े की दोस्ती कहानी से यह सीख मिलती है कि धन-दौलत तो आती जाती रहेगी मगर
मित्रता और रिश्ते तो विश्वास का नाम होते हैं जो जीवन भर हमारे काम आएंगे।
दुनिया में हर तरह के लोग होते हैं कुछ रिश्तो की कद्र करते हैं तो कुछ  नहीं करते हैं ।
मगर    जिनसे अपका रिश्ता हो और वह आपकी कद्र करते हो तो आप भी जरुर उनसे सच्चा रिश्ता निभाएं ।

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4 thoughts on “अंधे और लंगड़े की दोस्ती”

  1. Sir सूरदास को एक पेड़ के नीचे कुछ दिखा
    सूरदास toh अन्धा thaa..

    1. aap apni email Id daalo
      fir subscribe pr cick karo
      fir apne email ID ka inbox check karo
      waha confirmation sms aya hoga us pr click kar do subscirbe ho jayegi

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