अजंता की गुफाएं अदभुद शिल्पकारी के नमूने

अजंता की गुफाएं , अजंता की गुफाओ के बारे में पूरी जानकारी

अजंता की गुफाएं – 

अजंता की गुफाएं  यह महाराष्ट्र की ऊँची चौरस भूमि पर पर्वतों में से खोजी गयी एक गुफा श्रंखला है जो पूरी दुनिया में विख्यात है। 7 शताब्दियों तक परंपरागत अनजान कलाकार वह शिल्पियों द्वारा निष्ठा से खोदी गयी ये गुफाएं बौद्ध संप्रदाय के अपूर्व उपासना रूप  हैं। ये अजन्ता की गुफाएं  बेनाम कलाकारों का शाश्वत आनंद उत्तरदान है । यहाँ  29 बौद्ध गुफाएं हैं।अजंता की पहाड़ी श्रेणी में ये गुफाएं बघोरी नदी के एक तरफ वक्र कंदराओं में खोदी गयी हैं। वास्तु कला  के ये कलाकार इतने कुशल थे कि उन्होंने किन्ही गुफाओ को तो 100 फीट तक भी खोद डाला । यहाँ के चित्रों  का इतिहास काफी लम्बा और घटना पूर्ण है। वक़्त के ढांचे को लांघता अनेक राजवंशो के बीच से होता ये चित्र पीढ़ी दर पीढ़ी कलाकारों द्वारा अनेक शताब्दियों तक बनाये गए थे। गुफाओं की जो संख्या हमको अब मिलती है वे काल क्रमानुसार नहीं है बल्कि सुविधा तथा इनकी प्राकृतिक स्थिति के मुताबिक रखी गयी है।

अजंता की गुफाएं , अजंता की गुफाओ के बारे में पूरी जानकारी
अजंता की गुफाये

गुफा नम्बर 9 और 10 सबसे पुरानी  हैं इनको बनाने में  200 इसा पूर्व से लेकर इसा के 200 शताब्दी तक 400 साल का लम्बा समय लगा था गुफा नम्बर 10 के खम्बे करीब 350वीं शताब्दी में ही जोड़े गए थे या इस से भी देर से । गुफा संख्या 4, 6, 11, 15, 16, 17,  350 और 500 शताब्दियों के बीच जोड़ी गयी अजंता की गुफाएं पैठन के उत्तर में 130 KM की दूरी पर स्थित हैं।  ये रस्ते प्राचीन व्यापार मार्ग के काफी पास थे जो उत्तर भारत को दक्षिण के प्रतिष्ठान से उज्जैन और महिस्मति के बीच से होकर मिलाते थे। बौद्ध गुफाएं अंदर से दो भागों में विभक्त थी एक विहार (वास्थान) जो काफी सीधा साधा है और दूसरा चैत्य कक्ष (आराधना का स्थान ) अद्भुत मूर्तियों से सुसज्जित जिनकी वेद पूजा करते थे।

यह भी पढ़ें :- गीजा के महान पिरामिड के बारे में

चैत्य कक्ष भगवान् बुद्ध को समर्पित थे और उपासना के स्थल थे। ये विशाल आयताकार कक्ष खम्भों की श्रेणियों से बंटे हुए हैं और चक्राकार मध्य भाग से मिले हैं । प्रार्थना करते समय परिक्रमा करने के लिए ये तीनो तरफ से घिरे हुए हैं। चूँकि ये भगवान् बुद्ध को समर्पित थे इसलिए इसकी मूर्तियाँ और चित्र बोद्धि सत्वा के अनेक अवतारों के वर्णन से भरपूर हैं।  विहार बुद्ध के धार्मिक उपदेश ध्यान और अध्ययन के लिए भिक्षु उपयोग करते थे। ये आयताकार कक्ष थे जिनमे छोटी छोटी कोठरियां पंक्तिबद्ध दोनों और जुडी हुई थी। प्रवेश के सामने बुद्ध की मूर्ति या स्तूप थे।

अजंता की गुफाएं , अजंता की गुफाओ के बारे में पूरी जानकारी

अजंता की गुफाएं निर्माण कला के अच्छे नमूने हैं ये दो अलग अलग परिवर्तित कालों में बनाये गए हैं । एक तेरवाढ काल और और दूसरा महायान काल

  1. तेरवाढ काल में दो चैत्य कक्ष गुफा नंबर 9 और 10 बनाये गए और चार विहार कक्ष जो गुफा नम्बर 8, 12, 13, और 15 में हैं ।
  2. महायान काल के अंतर्गत तीन चैत्य कक्ष गुफा नम्बर 19, 26, और गुफा नुम्बर 29 में और 11 अद्भुत विहार गुफा  नम्बर 1, 2, 4, 6, 7, 11, 15, 17, 20, 21, 22, 23 और 24 में हैं ।

26 नम्बर की गुफा का एक शिलालेख उस काल की इस घटी का बंदरो और पक्षियों की गुंजन से प्रतिध्वनित एक अतीत अविस्मरणीय काल वर्णन करता है। गुफा नम्बर 16 में एक शिलालेख है जिसमे इन भिक्षुओ पर्वतों के वैभव पूर्ण शिखओं और उनपर लटकती हुई वर्षाकाल की घनघोर घटाओं के बीच रहते दिखाते हैं।

यह भी पढ़ें :- क्या है शंगरी ला घाटी का रहस्य | shangri la velly mystery in hindi

अजंता की गुफओं का स्थान क्यों यहाँ निर्धारित किया गया इसका भी पूर्ण रूप से संकेत मिलता है। इनकी व्यापारिक मार्गो से निकटता आध्यात्मिक, गूढ़ और प्रेरित कर देने वाले प्रकृतिक दृश्य, और यहाँ का सुहाना वातारवरण अजंता के चित्रों का विषय मुख्यतः बुद्ध के जीवन की घटनाओ से सम्बंधित है। इसके साथ ही जातक की कथाओ के दृश्य,  कुछ लौकिक चित्र, साधारण जनजीवन के चित्र, राज दरबारो के चित्र और कुछ रोजमर्रा के जनजीवन के चित्र भी हैं। इनके अलावा फूल और पशु पक्षी भी चित्रित हैं।

अजंता की गुफाएं , अजंता की गुफाओ के बारे में पूरी जानकारी

गुफा नम्बर 16 में एक शिलालेख रहने की जगह का वर्णन करता है। अलंकृत खिड़कियाँ दरवाजे मचान इंद्रा की सभा की अप्सराएँ नक्काशी से भरे खम्भे, सीढियां और अन्दर आभूषित सजा हुआ बुद्ध का एक मंदिर, अजंता की गुफाओं का मुख्य उद्देश्य बुद्ध के आदेशो का प्रचार और उनकी जीवन की घटनाओ का वर्णन करना था। लेकिन अजंता की इन गुफाओ से ये भिक्षु कब निकल पड़े इसका कोई भी स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलता। तथापि इसा की नवीं  सदी के अंत में ये विहार उपयोग में नहीं थे। इस प्रकार अजंता की गुफाएं विस्मित शताब्दियों के बाद पुरारुद्धार की प्रतीक्षा मे रहीं।

कैसे खोजी गयी अनाजता की गुफाएं –

पत्तियों के झुरमुट में छुपी ये गुफाएँ मनुष्य की असावधानी के कारण समय के साथ उजडती अपने को पंचभूतों के हाथ सौंप चुकी थी। शिल्पकला के ये अपूर्व नमूने पुनर्जन्म की प्रतीक्षा में परोपकारी सूर्य किरणों के प्रकाश और पहचान की आशा में पड़े रहे। फिर महाराष्ट्र की इस चौरस भूमी पर 1819 ईस्वी में John smith और और उनके कुछ अंग्रेजी साथी officers मनोरंजक यात्रा के लिए यहाँ आये हुए थे, कि उनको घाटी के उस पार हरी पत्तियों से घिरे पहाड़ो पर जलाशय युक्त घुमावदार रेखा सी दिखाई पड़ी। उनको यह जानने की इच्छा हुई और जैसे ही वे वहां पहुंचे उन घने पत्तों के गुच्छो के बीच उन्होंने जो अतुल्य चीज ( अजंता की गुफाएं ) देखी, वो उनकी कल्पना के बाहर थी। और इस प्रकार शुरू हुई अजंता नामक एक अद्भुद जगह की जो आज भी महाराष्ट्र में मौजूद हैं  ।

नीचे दी गयी कुछ अन्य जानकारियां भी पढ़ें :- 

पुनर्जन्म का रहस्य क्या है ? आइये जानते हैं | punarjanm ka rahasya

मिश्र के पिरामिड 10 रहस्य | mystery of pyramids in hindi

भारत की रहस्यमयी घटनाये जिन्हें आप नहीं जानते होंगे

क्या आप जानते हैं भारत की इन रहस्यमयी जगहों के बारे में

Share post, share knowledge

One thought on “अजंता की गुफाएं अदभुद शिल्पकारी के नमूने”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *