भारत के 10 अविष्कार जिनका श्रेय विदेशी ले गए

भारत के 10 अविष्कार जिनका श्रेय विदेशी ले गए

यह  तो हम सभी जानते हैं कि शुन्य और दशमलव  की खोज भारत ने ही की है। क्योंकिओ इसका उल्लेख स्पष्ट रूप से आर्यभट्ट द्वारा लिखी किताबो में आज भी उपलब्ध है जिसके कारण यूरोप और अमेरिका के लोग इसका श्रेय हथिया नहीं सके।  जिन Binary Digits (0, 1) पर आज का कंप्यूटर चलता है, उनमे से 0 भारत की ही देन है। भारत की भावना पहले से ही विश्व कल्याण की रही है यदि किसी ने कोई खोज की है तो उसको सम्मानित किया जाता था लेकिन अंग्रेज जिस भी खोज को करते थे उसको अपने नाम दर्ज (patent) देते हैं , और ऐसे कई आईडिया है जो भारत के हैं लेकिन गुलामी के दौर में भारतीय मजबूर थे और अंग्रेजो ने यहाँ की खोज यहाँ के लोगो के आईडिया को अपने नाम पर पेटेंट करवा दिया और आज दुनिया को ऐसा लगता है की सचमे वह खोज अंग्रेजो ने ही की है। जबकि सच तो यह है कि भारत ने कई अविष्कार किये हैं लेकिन उसका क्रेडिट उनको नहीं मिला

इतिहास में जब कोई खोज या अविष्कार होते थे तब तब वास्तव में यह पता लगा पाना बहुत मुश्किल काम होता था की किसी अविष्कार का वास्तविक अविष्कारक कौन है। ऐसी परिस्थिति में यदि किसी व्यक्ति ने किसी बड़े प्लेटफार्म पर आकर कसी अविष्कार का प्रदर्शनक कर दिया उसको ही अविष्कारक मान लिया जाता था। और वह इतिहास के पन्नो में दर्ज भी हो जाता था। चाहे उनके अविष्कार चोरी के ही क्यों न हो। ऐसे में छोटे शहरो के अविष्कारक और खोजकर्ता जिनकी पहुँच ऊपर तक नहीं होती वह ऐसे ही गुमनाम रह जाते थे। और आज हम ऐसे ही अविष्कार और खोजो के बारे में बताएँगे जिनका अविष्कार के सबूत भारत में मिलते हैं, जिनके श्रेय का असली हकदार भारत है, लेकिन उसे हम सही से जानते तक नहीं।

01- हवाई जहाज –

इतिहास की किताबों और स्कूल के कोर्स में पढ़ाया जाता है की विमान का अविष्कार Right Brothers ने किया था, लेकिन यह गलत है हाँ हम मान सकते हैं की आज के आधुनिक विमान की शुरुवात राइट ब्रदर्स ने 1903 में की थी। लेकिन उनसे कई हज़ारो साल पहले ऋषि भरद्वाज ने विमान शाश्त्र लिखा था जिसमे हवाई जहाज बनाने के कई तकनीक का वर्णन किया गया था। आसमान में पंछीयो की तरह उड़ान भरने की चाहत तो दशकों पुरानी है। हमारे धार्मिक ग्रंथो में भी इसका उल्लेख मिलता है, और हम सभी जानते हैं किसी भी अविष्कार से सम्बन्धित theory  सिद्धांत भी उतने ही अहम् होते हैं जितना  कि एक अविष्कार। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि इस क्षेत्र में लोग बाद वाले को ही लोग हमेशा याद रखते हैं।

भारत के 10 अविष्कार जिनका श्रेय विदेशी ले गए

चौथी शताब्दी ई. पू. में महर्षि भारद्वाज द्वारा लिखित वैमानिक शाश्त्र में एक उड़ने वाले यंत्र विमान के कई प्रकारों का वर्णन किया था। तथा हवाई युद्ध के कई नियम और प्रकार भी इसमें बताये गए थे। जरा सोचिये हज़ारो साल पहले लोगों का पूर्वानुमान की भविष्य में लोग आसमान में लोग हवाई जहाज से युद्ध लड़ सकते हैं। विमानों का मॉडल तैयार कर देना क्या मायने नहीं रखता।

02- रेडियो और वायरलेस कम्युनिकेशन –

भले ही आज रेडियो बीते ज़माने की बात हो गयी है, लेकिन उसकी वायरलेस टेक्नोलॉजी आज भी हर जगह काम आती है। दोस्तों वो भी क्या दिन थे जब हम रेडियो पर क्रिकेट कमेंट्री और हेलो फरमाइश सुना करते थे। हम 90 की पीढ़ी हैं और रेडियो पर झलक दिखला जा और अगर तुम मिल जाओ जैसे गाने सुन कर बड़े हुए हैं। जैसा की हम सभी जानते हैं मार्कोनी को Wireless Telegraphy की खोज में उनके योगदान के लिए वर्ष 1909 में भौतिकी के नावेल पुरुष्कार से सम्मानित किया गया था। लेकिन इस से करीब 14 साल पहले श्री जगदीश चंद्र बॉस ने वर्ष 1895 में ही Radio Wave Receiver का अविष्कार कर दिया था। अब जरा सोचिये बिना receiver के कोई रेडियो कैसे चला सकता था। इनके ही अविष्कार के दो साल बाद मार्कोनी ने लन्दन में रेडिओ का प्रदर्शन कर दिया जिसके बाद सार्वजनिक तौर पर रेडियो के अविष्कारक के रूप में मार्कोनी को ही पहचाना गया। इसको दुर्भाग्य ही कहिये कि दुनिया सिर्फ मार्कोनी को ही रेडियो के अविष्कारक के रूप में जानती है। वायरलेस कम्युनिकेशन के जनक माने जाने वाले जगदीश चंद्र बॉस को नहीं।

03- पहिए का आविष्कार –

आज से 5,000 और कुछ 100 वर्ष पूर्व महाभारत का युद्ध हुआ जिसमें रथों के उपयोग का वर्णन है। जरा सोचिए पहिए नहीं होते तो क्या रथ चल पाता ? इससे सिद्ध होता है कि पहिए 5,000 वर्ष पूर्व थे। पहिए का आविष्कार मानव विज्ञान के इतिहास में महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। पहिए के आविष्कार के बाद ही साइकल और फिर कार तक का सफर पूरा हुआ। इससे मानव को गति मिली। गति से जीवन में परिवर्तन आया। हमारे पश्‍चिमी विद्वान पहिए के आविष्कार का श्रेय इराक को देते हैं, जहां रेतीले मैदान हैं, जबकि इराक के लोग 19वीं सदी तक रेगिस्तान में ऊंटों की सवारी करते रहे।
हालांकि रामायण और महाभारतकाल से पहले ही पहिए का चमत्कारी आविष्कार भारत में हो चुका था और रथों में पहियों का प्रयोग किया जाता था। विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता सिन्धु घाटी के अवशेषों से प्राप्त (ईसा से 3000-1500 वर्ष पूर्व की बनी) खिलौना हाथीगाड़ी भारत के राष्ट्रीय संग्रहालय में प्रमाणस्वरूप रखी है। सिर्फ यह हाथीगाड़ी ही प्रमाणित करती है कि विश्व में पहिए का निर्माण इराक में नहीं, बल्कि भारत में ही हुआ था।

04- USB Port –

USB की फुल फॉर्म होती है Universal Serial Bus इस डिवाइस से हमको इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को आपस में जोड़ने में मदद मिली जिस से हम एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस तक डाटा का आदान प्रदान आसानी से कर पाते हैं। इस से उस शख्श की भी जिंदगी बदल गयी जिसने इसको बनाने में मदद की उस शक्श का नाम अजय भट्ट है। 1990 के दशक में भट्ट और उनकी टीम ने जब इस डिवाइस पर काम शुरू किया तब लोगो ने इसको बेकार का इक्विपमेंट बताया था, लेकिन अविष्कार के बाद उस दशक के आखिर तक कंप्यूटर कनेक्टिविटी के लिए यह सबसे अहम् फीचर बन गया था लेकिन तब भी इन्हे क्रेडिट नहीं दिया गया था। भारत में जन्मे अजय भट्ट को इस मामले में सार्वजनिक तौर पर पहचान तब मिली जब 2009 में इंटेल कंपनी के लिए टेलीविशन विज्ञापन आया था इसके बाद 2013 में भट्ट को यूरोपियन इंवेंटर अवार्ड से भी नवाजा गया था।

05- गुरुत्वाकर्षण का नियम –

हालाँकि हम सभी जानते हैं कि आधुनिक गुरुत्वाकर्षण का नियम न्यूटन की देन है। जरा सोचिये की हज़ारो सालों से चलती आ रही इस दुनिया में न्यूटन के अलावा कोई और ऐसा इंसान नहीं हुआ जो कि धरती के इस बल को नोटिस कर सके। हमको यही बताया गया है कि न्यूटन ने पेड़ सेब को गिरते हुए देखा और न्यूटन लॉ लिख डाले। बिलकुल हम इस बात से सहमत हैं कि मॉडर्न ग्रैविटी के नियम न्यूटन ने दिए लेकिन इस से पहले भी लोग धरती के इस बल के बारे में ज़िक्र किया करते थे। न्यूटन से 500 साल पहले भास्कराचार्य ने गुरुत्वाकर्षण के नियम को विस्तार से उल्लेखित किया था। उन्होंने अपने ग्रन्थ सिद्धांत सिरोमणि में भी इसका उल्लेख किया था इस ग्रन्थ को बाद में अनेक विदेशी भाषाओ में अनुवाद किया गया और सिद्धांत को यूरोप में भी प्रचारित हुआ। गुरुत्वाकर्षण नियम के सम्बन्ध में उन्होंने लिखा था पृथ्वी अपने आकाश का पदार्थ 100 शक्ति से अपनी और खींच लेती है इस कारण आकाश का हर पदार्थ पृथ्वी पर गिरता है इस से सिद्ध होता है की पृथ्वी में कोई न कोई बल जरूर है।

06- भाषा का व्याकरण –

दुनिया का पहला व्याकरण पाणिनी ने लिखा। 500 ईसा पूर्व पाणिनी ने भाषा के शुद्ध प्रयोगों की सीमा का निर्धारण किया। उन्होंने भाषा को सबसे सुव्यवस्थित रूप दिया और संस्कृत भाषा का व्याकरणबद्ध किया। इनके व्याकरण का नाम है अष्टाध्यायी जिसमें 8 अध्याय और लगभग 4 सहस्र सूत्र हैं। व्याकरण के इस महनीय ग्रंथ में पाणिनी ने विभक्ति-प्रधान संस्कृत भाषा के 4000 सूत्र बहुत ही वैज्ञानिक और तर्कसिद्ध ढंग से संग्रहीत किए हैं। अष्टाध्यायी मात्र व्याकरण ग्रंथ नहीं है। इसमें तत्कालीन भारतीय समाज का पूरा चित्र मिलता है। उस समय के भूगोल, सामाजिक, आर्थिक, शिक्षा और राजनीतिक जीवन, दार्शनिक चिंतन, खान-पान, रहन-सहन आदि के प्रसंग स्थान-स्थान पर अंकित हैं।

इनका जन्म पंजाब के शालातुला में हुआ था, जो आधुनिक पेशावर (पाकिस्तान) के करीब तत्कालीन उत्तर-पश्चिम भारत के गांधार में हुआ था। हालांकि पाणिनी के पूर्व भी विद्वानों ने संस्कृत भाषा को नियमों में बांधने का प्रयास किया लेकिन पाणिनी का शास्त्र सबसे प्रसिद्ध हुआ। 19वीं सदी में यूरोप के एक भाषा विज्ञानी फ्रेंज बॉप (14 सितंबर 1791- 23 अक्टूबर 1867) ने पाणिनी के कार्यों पर शोध किया। उन्हें पाणिनी के लिखे हुए ग्रंथों तथा संस्कृत व्याकरण में आधुनिक भाषा प्रणाली को और परिपक्व करने के सूत्र मिले। आधुनिक भाषा विज्ञान को पाणिनी के लिखे ग्रंथ से बहुत मदद मिली। दुनिया की सभी भाषाओं के विकास में पाणिनी के ग्रंथ का योगदान है।

07- प्लास्टिक सर्जरी –

आपको यह जानकर हैरानी होगी की प्लास्टिक सर्जरी की शुरुवात भारत से ही हुई थी। और वह भी ईसा से करीब 2000 साल पहले। प्लास्टिक सर्जरी के अविष्कार से दुनिया में क्रांति आ गयी पश्चिम के लोग के अनुसार प्लास्टिक सर्जरी आधुनिक विज्ञान की देन है। लेकिन अगर हम इसके बेसिक को ट्रेस करे जहाँ से इसकी शुरुवात हुई हो तो भारत में ही मिलेगा। भारत में शुश्रुत को पहला शल्य चिकित्सक माना जाता है आज से करीब 3000 साल पहले शुश्रुत युद्ध और प्राकृतिक विपदाओं में जिनके अंग ख़राब हो जाते थे या नाक ख़राब हो जाती थी तो उनको ठीक करने का काम करते थे। इसके अलावा शुश्रुत ने 1000 ईसा पूर्व में ही अपने समय के स्वस्थ्य वैज्ञानिको के साथ मिलकर प्रसव, मोतियाबिन्द, कृत्रिम अंग लगाना, पथरी का इलाज जैसी कई तरह की जटिल शल्य चिकित्सा के सिद्धांत प्रतिपादित भी किये। जिनके सबूत आज भी मौजूद हैं।

08- फाइबर ऑप्टिक्स –

आज जो हम इतना तेज इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं यह बिना ऑप्टिकल फाइबर के संभव नहीं हो पाता। इन ऑप्टिकल फाइबर को दुनिया के हर देशो में बिछा कर रखा गया है। जिस से हमारा डाटा पल भर में एक जगह से दूसरी जगह पहुँच  जाता है।  भारतीय मूल के अमेरिकी भौतिक विज्ञानी हैं जो फाइबर ऑप्टिक्स में अपने काम के लिए जाने जाते हैं। फॉर्च्यून मैगज़ीन ने अपने ‘बिजनेसमैन ऑफ द सेंचुरी’ अंक (1999-11-22) में उन्हें सात “अनसंग हीरोज” (ऐसे नायक जिनकी उतनी प्रशंसा नहीं होती जितनी होनी चाहिए) में से एक के रूप में नामित किया गया था। उन्हें “फ़ाइबर ऑप्टिक्स का पितामह” माना जाता है।  1955 से लेकर 1965 के बीच कई टेक्निकल पेपर लिखे इनमे से एक पेपर 1960 में साइंटिफिक अमेरिकन में प्रकाशित हुआ था। इस पेपर ने फाइबर ऑप्टिक्स को वास्तविक रूप उपयोग में आने में मदद की थी।

09- टॉयलेट – 

पुरातात्विक सबूतों के आधार पर यह बात पूरी तरह से सिद्ध हो चुकी है कि टॉयलेट सिंधु घाटी सभ्यता के समय पर मौजूद था हालाँकि इस दौरान उपयोग में आने वाले टॉयलेट काफी बेसिक हुआ करते थे इतने मॉडर्न और चकाचक नहीं हुआ करते थे जैसा कि आज हम देखते हैं, बस काम हो जाया करता था। पहली बार इस तरह के टॉयलेट का इस्तेमाल सिंधु घाटी की सभयता के लोगो ने ही किया था।  हम सभी जानते हैं कि सिंधु घाटी सभ्यता मोहनजोदड़ो एक पूरी तरह से विकसित शहर था, जहाँ निकासी व्यवस्था अतुलनीय थी, इस सभ्यता के लोग hydraulic engineering में भी निपुण थे। लेकिन एक बात मुझे समझ नहीं आती की पहले हम इतने उन्नत थे आज भी हम उन्नत हैं लेकिन फिर बीच में खेतों में जाने की प्रथा कहाँ से शुरू हो गयी अगर इसका जवाब आपको मिले तो नीचे कमेंट में जरूर बताइयेगा।

10- शैम्पू –

शैम्पू से बाल धोने के बाद भला कौन अच्छा महसूस नहीं करता खुशबू चमक और आत्मविश्वाश को आसानी से महसूस किया जा सकता है दरअसल शैम्पू शब्द चम्पू शब्द से बना है सर में तेल लगाकर मालिश करने की परंपरा बंगाल में 17वीं शताब्दी में शुरू हुई थी बाद के दिनों में शैम्पू के तौर पर इस परंपरा का विकास हुआ था।  भारत में 15वीं शताब्दी में कई पौधों की पत्तियों और फलों के बीज से शैम्पू बनाया जाता था। ब्रिटिश उपनिवेश काल में व्यापारियों ने शैम्पू को भारत से यूरोप पहुंचाया और फिर वहां से यूरोपियो ने पूरी दुनिया में इसका विस्तार कर दिया।

ऊपर बताये गए अविष्कारों और खोजो के अलावा स्याही और पटरी स्तेमाल बाइनरी नंबर से जुडी खोज हीरो का खनन, शर्ट के बटन, शतरंज, ताश, सांप सीढ़ी, खेल जैसे कई ऐसे खोज और अविष्कार हैं जिनका मूल भारत है लेकिन उनका क्रेडिट कोई और देश ले गया।


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