श्रीमद भगवद गीता क्या है ? और हमारे लिए कितनी महत्वपूर्ण है

श्रीमद भगवद गीता क्या है ? और हमारे लिए कितनी महत्वपूर्ण है

जब मैं छोटा (15-16 साल का ) था तो मैंने श्रीमद भगवद गीता का नाम सुना था, और यह भी सुना था कि इसमें भगवान् श्रीकृष्ण जी ने अर्जुन को उपदेश दिए थे। लेकिन फिर भी भक्ति की तरफ कभी इतना रुझान नहीं हुआ था क्योंकि अपने लिए बचपन के खेल ही सब कुछ थे तो तब कौन इन सब चक्करो में पड़ने वाला था। लेकिन जब पढाई लिखाई ख़त्म हुई बाहर जॉब करने निकले तो दुनिया भर के पाखंडी बाबाओं, झूठे पंडितो, जातिवाद, बलि प्रथा, धर्म के नाम पर हिंसा किसी पर शनि का दोष लगना ये सब एक दम इल्लॉजिकल सा लगता था क्योंकि मैं Science Student रह चूका हूँ। उसके बाद ही धीरे-धीरे मेरे अंदर यह सवाल पनपने लगे ?

  • भगवान् क्या है ?
  • इंसान सभी जीवो से बुद्धिमान है तो फिर इस मनुस्य जीवन का कुछ न कुछ उद्देश्य तो जरूर होगा ही ?
  • क्या इस सृष्टि का बनना महज एक इत्तेफ़ाक़ था, या किसी ने इसको बनाया ?

श्रीमद भगवद गीता क्या है ? और हमारे लिए कितनी महत्वपूर्ण है

मेरे पास ऐसे ही सैकड़ों सवाल थे लेकिन ये वो तीन सवाल थे जिनके अंदर मुझे मेरे सभी सवालो का जवाब मिल सकता था ? मुझे अच्छे से पता था कि दुनिया का एक धर्म (हिन्दू) और तीन पंथ (मुस्लिम, इसाई, सिक्ख) सबसे ऊपर हैं और इन चारो के अपने अलग अलग पवित्र ग्रन्थ हैं –

  • श्रीमद्भगवद्गीता ( भगवान् श्रीकृष्ण )
  • गुरु ग्रन्थ साहिब (गुरु नानक देव जी )
  • बाइबिल (ईसा मसीह )
  • क़ुरान (पैगम्बर मोहम्मद )

मुझे नहीं पता था कि मुझे कौन सा ग्रन्थ पढ़ना चाहिए इसलिए मैंने तीन ग्रंथो (भगवद्गीता, बाइबिल और कुरान) को आर्डर कर दिया गुरु ग्रन्थ साहिब इसलिए नहीं मंगवाई क्योंकि वह हिन्दू धर्म से ही टूटकर बना है। एक हफ्ते बाद तीनो किताबें मेरे पास पहुंची और मैंने इनको पढ़ना शुरू किया मैं साथ ही साथ जॉब भी करता था इसलिए लगातार वक़्त मुझे नहीं मिल पता था लेकिन सुबह शाम रात को जब मुझे वक़्त मिलता था तब मैं इनको पढता था, सैटरडे संडे को भी मेरी छुट्टी रहती थी तो तब भी मैंने इनको पढ़ा समझा।  और इन सबको पढ़ते पढ़ते मुझे करीब 5 -6 महीने लग गए। मैं शब्दों की जगह context पर ज्यादा ध्यान दे रहा था।  तो क्या क्या लिखा था इन ग्रंथो में मैंने वह आपको बताता हूँ पहले शुरू करता हूँ भगवद्गीता से।

श्रीमद भगवद गीता ?

श्रीमद भगवद गीता हिन्दू धर्म का सबसे पवित्र ग्रन्थ है। आज से करीब 5200 साल पहले जब कौरव और पांडवो के बीच धर्मयुद्ध हुआ था। श्रीकृष्ण के बार बार समझाने पर भी कौरव अपने घमंड में डूबे जा रहे थे इतना तक कि उन्होंने द्रोपदी को निर्वस्त्र करने की कोशिश भी की लेकिन श्रीकृष्ण ने वहां पर द्रोपदी की लाज बचायी थी, और ऐसे ही अनेक कुकृत्यों को कौरव किये जा रहे थे।  श्रीकृण और पांडवों ने कई बार उन्हें समझाया लेकिन वह अपनी हठ पर अड़े रहे और फिर हुआ महाभारत का घमासान धर्मयुद्ध। युद्ध से पहले ही अर्जुन ने मोहवश होकर अपना धनुष नीचे रख दिया और कहने लगा मैं  पितामह, गुरु द्रोण, कृपाचार्य, और अन्य कौरवों का वध कैसे कर सकता हूँ। फिर अर्जुन को इस मोह से बाहर निकालने के लिए और धर्म अधर्म और मनुष्यों के कर्त्तव्य को समझाने के लिए भगवान् श्रीकृष्ण ने अर्जुन को  गीता का दिव्य ज्ञान सुनाया था, और अर्जुन ने भी अपने मन में उठ रहे कुछ सवाल पूछे थे। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को यह दिव्य ज्ञान कुरुक्षेत्र की रणभूमि में रविवार के दिन करीब 45 मिनट तक सुनाया था। और उस दिन एकादशी थी। इसलिए हमारे हिंदू धर्म में एकादशी का इतना ज्यादा महत्व है। महाभारत के इस युद्ध को संजय ने भी दिव्य दृष्टि से देखा था और पल पल का हाल कौरवों के पिता धृतराष्ट्र को सुनाया था।

श्रीमदभगवद्गीता में कुल 700 श्लोक हैं। जिसमें से भगवान श्री कृष्ण ने 574 श्लोक, अर्जुन ने 85 श्लोक, धृतराष्ट्र ने 1 श्लोक, तथा संजय ने 40 श्लोक कहे हैं।

१- अर्जुनविषादयोग (47 श्लोक) (अर्जुन मोहवश होकर युद्ध करने से मना करता है और रथ के पिछले भाग पर जाकर बैठ जाता है )

२-सांख्ययोग (72 श्लोक)( अर्जुन की कायरता के विषय में श्री कृष्णार्जुन-संवाद )

३-कर्मयोग (43 श्लोक)(ज्ञानयोग और कर्मयोग के अनुसार अनासक्त भाव से नियत कर्म करने की श्रेष्ठता का निरूपण)

४-ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (42 श्लोक)( सगुण भगवान का प्रभाव और कर्मयोग का विषय )

५-कर्मसंन्यासयोग (29 श्लोक)( सांख्ययोग और कर्मयोग का निर्णय )

६-आत्मसंयमयोग (47 श्लोक) ( कर्मयोग का विषय और योगारूढ़ पुरुष के लक्षण )

७-ज्ञानविज्ञानयोग (30 श्लोक)( विज्ञान सहित ज्ञान का विषय )

८-अक्षरब्रह्मयोग (28 श्लोक)( ब्रह्म, अध्यात्म और कर्मादि के विषय में अर्जुन के सात प्रश्न और उनका उत्तर )

९-राजविद्याराजगुह्ययोग (34 श्लोक)( प्रभावसहित ज्ञान का विषय )

१०-विभूतियोग (42 श्लोक)( भगवान की विभूति और योगशक्ति का कथन तथा उनके जानने का फल)

११-विश्वरूपदर्शनयोग (55 श्लोक)( विश्वरूप के दर्शन हेतु अर्जुन की प्रार्थना )

१२-भक्तियोग (20 श्लोक)(साकार और निराकार के उपासकों की उत्तमता का निर्णय और भगवत्प्राप्ति के उपाय का विषय)

१३-क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग (34 श्लोक)(ज्ञानसहित क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ का विषय)

१४-गुणत्रयविभागयोग (27 श्लोक)(ज्ञान की महिमा और प्रकृति-पुरुष से जगत्‌ की उत्पत्ति)

१५-पुरुषोत्तमयोग (20 श्लोक)(संसार वृक्ष का कथन और भगवत्प्राप्ति का उपाय)

१६-दैवासुरसम्पद्विभागयोग (24 श्लोक)(फलसहित दैवी और आसुरी संपदा का कथन)

१७-श्रद्धात्रयविभागयोग (28 श्लोक)(फलसहित दैवी और आसुरी संपदा का कथन)

१८-मोक्षसंन्यासयोग (78 श्लोक)(त्याग का विषय)

श्रीमद भगवद गीता में इतने कम शब्दों में नीचे दिए गए सारे विषयो को बहुत अच्छे से और बहुत गहरे कॉन्टेक्सट में समझाया गया है।

  • परमात्मा
  • आत्मा
  • मन
  • बुद्धि
  • शरीर
  • देवी, देवता
  • भूत, प्रेत
  • मोक्ष
  • पूजा-पाठ
  • जन्म-मरण
  • पाप-पुण्य
  • सुख-दुःख
  • स्वर्ग-नर्क
  • रिश्ते-नाते
  • अपने-पराये
  • योग-ध्यान
  • क्रोध-मोह
  • ज्ञान -अज्ञान
  • प्रारब्ध-कर्मफल
  • कर्म-अकर्म-विकर्म

जिन्होंने भगवद गीता पढ़ी नहीं है वह गीता को एक धार्मिक किताब समझने लगते हैं और यहाँ तक कि भगवद गीता पर प्रश्न भी खड़ा कर देते हैं। यह एक धार्मिक किताब कम और ज्ञान की गंगा ज्यादा लगती है जिसने पढ़ी होगी उसको पता होगा गीता में कहीं भी कोई भेद-भाव जाती धर्म विशेष की कोई भी बात नहीं कही गयी है, और  जिनको लगता है की गीता में भेद भाव धर्म जाती आदि की बाते लिखी हुई हैं तो वह इस बात को सिद्ध करे। मैं उसको खुला चैलेंज देता हूँ इस इस विषय पर मेरे साथ चर्चा करने का वह नीचे कमेंट करे और मुझे बताये की भगवद्गीता में जाती धर्म के बारे में कहा पर लिखा है ?  मैं आपकी एक शंका को दूर कर देता हूँ जिसके कारण हमारे कुछ मूर्ख हिन्दू आज जातियों में बंट गए है और एकता खोकर खुदका विनाश कर रहे हैं।

चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागश:।         
तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम्। (4.13)

चातुर -वर्ण्यम् – मानव समाज के चार विभाग, मया – मेरे द्वारा,  सृष्टम् – उत्पन्न किये हुए,  गुण – गुण,  कर्म– तथा कर्म का, विभागशः – विभाजन के अनुसार,  तस्य – उसका,  कर्तारम् – जनक, अपि – यद्यपि, माम् – मुझको,  विद्धि – जानो,  अकर्तारम्– न करने के रूप में, अव्ययम् – अपरिवर्तनीय को।

अर्थात –> ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र इन चार वर्णो की रचना मेरे द्वारा की गयी है, गुण और कर्मो के आधार पर मैने इनका विभाग किया है। इस प्रकार इस सृष्टि रचनादि कर्म का कर्ता होने पर भी मुझ अविनाशी परमेश्वर को तू वास्तव में अकर्ता ही जान। इन चारो विभागों को जन्म से नहीं बल्कि इनके गुण और कर्मो के आधार पर बांटा गया है जिसके जैसे गुण जैसे कर्म होंगे वह उसी वर्ण का होगा। यदि कोई शूद्र के यहाँ जन्म लेता है लेकिन बड़ा होकर वह शास्त्रार्थ की शिक्षा लेता है तो वह ब्राह्मण बन जायेगा, इसी प्रकार यदि वह वीर साहसी है और देश और समाज के की रक्षा की चेष्टा रखता है और प्रशिक्षण द्वारा युद्ध कला में निपुण होता है तो वह क्षत्रिय बन जायेगा।  और यदि कोई व्यक्ति ब्राह्मण के घर में जन्म लेता है परन्तु उसको शास्त्र का ब्रह्म का कोई ज्ञान नहीं तो वह ब्राह्मण नहीं कहलायेगा। इसलिए हमेशा याद रखें की जिनको हम आज जाति कहते हैं वह हिन्दू धर्म में कभी थी ही नहीं। लोगों ने वर्ण को ही जाती बना दिया और उसको भी जन्मजात मान लिया जो कि गलत है। इसलिए गीता में कहा गया है व्यक्ति जन्म से नहीं कर्म से महान होता है।  

वही एक श्लोक है जिसको अपने भी सुना होगा

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।         
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि। (2.47)

अर्थात –> तेरा कर्म करने में ही अधिकार है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तू फल की दृष्टि से कर्म मत कर और न ही ऐसा सोच की फल की आशा के बिना कर्म क्यों करूं

 इस श्लोक में चार तत्त्व  हैं – १. कर्म करना तेरे हाथ में है | २. कर्म का फल किसी और के हाथ में है |३. कर्म करते समय फल की इच्छा मत कर | ४. फल की इच्छा छोड़ने का यह अर्थ  नहीं है की तू कर्म करना भी छोड़ दे। भगवद गीता में ऐसे ही अन्य बहुत श्लोक हैं जिनको पढ़कर अवश्य ही आपका जीवन बदल जायेगा, आपमें अनुशाशन आएगा, मानवता आएगी, चिंता से मुक्त होंगे, मन शांत होगा, बुरी लत से कैसे मुक्त हो जायेंगे, जीवन का मार्गदर्शन होगा और ऐसी चीजे सीखने को मिलेंगी जो न तो आपको किसी गुरु ने सिखाई होंगी और न ही माता पिता ने।

बाकी ग्रन्थ –

मुझे बहुत ख़ुशी होती अगर बाकि के दोनों ग्रंथो में भी समस्त मानव जाती के लिए कुछ ऐसा सन्देश होता जो हर इंसान को कर्म करने पर प्रेरित करता, मानवता के लिए प्रेरित करता, एकता के लिए प्रेरित करता,जीवन का मार्गदर्शन  करता और हर इंसान को यह सिखाता कि उसका धर्म क्या है।  समस्त जीव जन्तुओ और प्राणियों के साथ तुम्हारा आचरण कैसा होना चाहये। पर दुर्भाग्यवश मुझे ऐसा कुछ मिला ही नहीं जिसे मैं आपके साथ शेयर कर सकूँ। और अगर मैंने आपके साथ कुछ शेयर किया भी तो आप उसका गलत मतलब निकल देंगे।

सम्पूर्ण भगवद गीता को देखें हिन्दी में  –

यह भी पढ़ें –

भगवान् को किसने बनाया ?

हिन्दुओं में जातिवाद की सच्चाई क्या है ?

रामायण के 5 महाझूट जिनको आप सच समझते हैं

विज्ञान और भगवान से जुड़े कुछ सवाल

महाभारत को सच साबित करते 10 सबूत देखिये

Share post, share knowledge

2 thoughts on “श्रीमद भगवद गीता क्या है ? और हमारे लिए कितनी महत्वपूर्ण है”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *